कविता बहार

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बलात्कार पर आक्रोश कविता

हिंदी कविता

बलात्कार पर आक्रोश कविता तीन बरस की गुड़िया तिल तिल मरके आखिर चली गयी,आज अली के गढ़ में बिटिया राम कृष्ण की छली गयी,नन्हे नन्हे पंख उखाड़े, मज़हब के मक्कारों ने,देखो कैसे ईद मनाई,दो दो रोज़ेदारों ने, कोमल अंग काट कर खाये, कुत्तों ने इफ्तारों में,नोच कुचल कर लाश फेंक दी रमजानी बाज़ारो मेंआस्तीन में […]

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मुक्तिबोध: एक आत्मसातात्मक प्रयास

हिंदी कविता

मुक्तिबोध: एक आत्मसातात्मक प्रयास क्यों मैं रातों को सो नहीं पाताअनसुलझे सवालों का बोझ ढो नहीं पाता…रूचि, संस्कार, आदत सब भिन्न होते हुए भीक्यों मुक्तिबोध से दूर हो नहीं पाता…क्यों मैं रातों को सो नहीं पाताअनसुलझे सवालों का बोझ ढो नहीं पाता…क्यों बंजर दिल के खेत मेंआशाओं के बीज बो नहीं पाता…जज़्बातों का ज़लज़ला उठने

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आओ हम सौगंध उठाएँ

हिंदी कविता

आओ हम सौगंध उठाएँ प्रेम, सौहार्द्र, भ्रातृत्व भाव कीधरा पर अखंड ज्योति जलाएँभेदभाव न हो  जाति धर्म काआओ  हम  सौगंध  उठाएँ lईश्वर, अल्लाह, राम, रहीम कीपूज्य धरा को  स्वर्ग  बनाएँएक पिता हम सबका मालिकएकता  का  संदेश  फैलाएँ lऊँच, नीच,मज़हब,संप्रदाय काभेदभाव  मुल्क  से  ही  हटाएँअमन, शांति, चैन,  सुकून  काआओ  मिल कर बीड़ा उठाएँ lहिन्दू,  मुस्लिम,  सिक्ख,

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जल से जीवन जगत चराचर

प्रकृति और पर्यावरण

जल से जीवन जगत चराचर जल से जीवन जगत चराचर जल ही है जीवन और प्राण जल बिन अस्तित्व नहीं कोई हैं समक्ष  हमारे कई प्रमाण l जीवन का कोई काज न ऐसा जल बिन हो जाए जो पूरा धरती की क्या बात करें जल बिन अंबर भी है अधूरा l जल ही मनुज जीवन

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हमर गंवई गाँव

हिंदी कविता

हमर गंवई गाँव 1 आबे आबे ग सहरिया बाबूहमर गंवई गाँवगड़े नही अब कांटा खोभातुंहर कुँवर पांवआबे आबे सहरिया बाबूहमर गंवई गाँव।। 2 गली गली के चिखला माटीवहु ह अब नंदागे।पक्की सड़क पक्का नालीहमरो गांव म छागे।लइका मन बर स्कूल खुलगेजगाथे गाँव के नाव।आबे आबे ग सहरिया बाबूहमर गंवई गांव ।। 3 नरवा खड़ म

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बचपन पर कविता

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बचपन पर कविता चिलचिलाती हुई धूप मेंनंगे पाँव दौड़ जाना,याद आता है वो बचपनयाद आता है बीता जमाना।माँ डांटती अब्बा फटकारतेकभी-कभी लकड़ी से मारतेभूल कर उस पिटाई कोजाकर बाग में आम चुराना।याद आता है वो बचपनयाद आता है बीता जमाना।या फिर छुपकर दोपहर मेंनंगे पाँव दबे-दबे सेलेकर घर से कच्छा तौलियागाँव से दूर नहर में

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अचरज मा परगे

हिंदी कविता

अचरज मा परगे कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।वाह रे वा किस्मत! पाना अस झरगे*माछी नहीं गुड़

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बच्चे होते मन के अच्छे

हिंदी कविता

बच्चे होते मन के अच्छे खेल कूद वो दिन भर करते,रखते हैं तन मन उत्साह।पेड़ लगा बच्चे खुश होते,चलते हैं मन मर्जी राह।।मम्मी पापा को समझाते,बन कर ज्ञानी खूब महान।बात बडों का सुनते हैं वे,रखते मोबाइल का ज्ञान।। रोज लगा जंगल बुक देखें,पाते ही कुछ दिन अवकाश।बेन टेन मल्टी राजू को,मोटू पतलू होते ख़ास।।गिल्ली डंडा

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अभाव-गुरु

हिंदी कविता

अभाव-गुरु “उस वस्तु का नहीं होना” मैं,जरूरत सभी जन को जिसकी।प्रेरक वरदान विधाता का,सीढ़ी मैं सहज सफलता की।।1अभिशाप नहीं मैं सुन मानव,तेरी हत सोंच गिराती है।बस सोंच फ़तह करना हिमगिरि,यह सोंच सदैव जिताती है।।2वरदान और अभिशाप मुझेतेरे ही कर्म बनाते हैं।असफल हताश,औ’ कर्मविमुखमिथ्या आरोप लगाते हैं।।3तीनों लोकों में सभी जगह,मैंने ही पंख पसारे हैं।सब जूझ

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सीमा पर है जो खड़ा

हिंदी कविता

सीमा पर है जो खड़ा                           सीमा पर है जो खड़ा ,                          अपना सीना तान ।उसके ही परित्याग से ,                         रक्षित  हिंदुस्तान ।।रक्षित    हिंदुस्तान ,                   याद कर सब कुरबानी ।करे शीश का दान ,                    हिंद का अद्भुत दानी ।।कह ननकी कवि तुच्छ ,                    कहें सब अर्जुन भीमा ।पराक्रमी शूर  शौर्य ,                नहीं जिसकी बल सीमा

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कर्म देवता

हिंदी कविता

इस कविता के प्रत्येक चरण में 16 मात्रा वाले छंद का प्रयोग किया गया है:- मानव जीवन ईश्वर का रहस्यमय वरदान है।आज के मानव का एकमात्र उद्देश्य अति धन-संग्रह है,जिसके लिए वे अपनों का भी खून बहाने से नहीं हिचकते।वे भूल गए हैं कि जीवन क्षणिक है।मृत्यु पश्चात बेईमानी से संचित उस धन से,रिस्ते-नातों से

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