कविता बहार

परशुराम जयंती पर रचना

हिंदी कविता

परशुराम जयंती पर रचना हे ! विष्णु के छठवें अवतारी, जगदग्नि रेणुका सुत प्यारे ।तुम अजय युद्ध रण योद्धा हो,जिनसे हर क्षत्रिय रण हारे ।।भृगुवंशी हो तुम रामभद्रब्राम्हण कुल में तुम अवतारीतुम मात पिता के परम भक्तजाए तुम पर दुनिया वारीतुम कहलाए शिव परम भक्त,सब काम लोभ तुमसे हारे ।।तुम अजय युद्ध रण योद्धा हो,जिनसे

परशुराम जयंती पर रचना Read More »

पालन अपना कर्म करो

प्रकृति और पर्यावरण

पालन अपना कर्म करो पाया जीवन है मनुष्य का,पालन अपना कर्म करो ।जीव जंतुओं पशु पक्षी पर, व्यहार को अपने नर्म करो ।।जल प्रथ्वी से खत्म हो रहा ।और पारा बढ़ता गर्मी का ।।जीवों पर संकट मंडराए ।रहा अंश ना नरमी का ।।दया नही आती जीवों पार,कुछ तो थोड़ी शर्म करो ।।जीव जंतुओं पशु पक्षी

पालन अपना कर्म करो Read More »

हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया

हिंदी कविता

हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।तोर हाँथ जोरत हँव तोर पाँव परत हँव आगी झन बरसा।।चिरई चिरगुन के खोंधरा तिप गे अंड़ा घलो घोलागे।नान्हे चिरई उड़े बर सीखिस ड़ेना ओकर भुंजागे।रूख राई जम्मो झवांगे अतका झन अगिया।हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया।बेंदरा भालू पानी पिये बर बस्ती भीतर खुसरगे।हिरन

हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया Read More »

मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है

हिंदी कविता

मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है जिसे चाहो नज़र से वो ही अक्सर दूर होता हैमुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता हैबुलंदी चाहता पाना हरिक इंसान है लेकिनमुकद्दर साथ दे जिसका वही मशहूर होता है । सभी के हाथ उठते हैं इबादत को यहाँ लेकिनख़ुदा को किसका जज़्बा देखिये  मंजूर होता है।उलटते

मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है Read More »

गर्दिश में सितारे हों

हिंदी कविता

गर्दिश में सितारे हों गर्दिश में सितारे हों जिसके, दुनिया को भला कब भाता है,वो लाख पटक ले सर अपना, लोगों से सज़ा ही पाता है। मुफ़लिस का भी जीना क्या जीना, जो घूँट लहू के पी जीए,जितना वो झुके जग के आगे, उतनी ही वो ठोकर खाता है। ऐ दर्द चला जा और कहीं,

गर्दिश में सितारे हों Read More »

प्यार का पहला खत पढ़ने को

हिंदी कविता

प्यार का पहला खत पढ़ने को प्यार का पहला खत पढ़ने को* तड़पी है यारी आँखें,पिया मिलन की* चाह में अक्सर रोती है सारी आँखें। सुधबुध खोकर जीता जिसने प्रीत का* रास्ता अपनायाप्रेम संदेशा पहुँचाये* वो जन – जन तक प्यारी आँखें। कठिन डगर पनघट की जिसने समझा अक्सर दूर रहाहै* लक्ष्य भेदने में सक्षम

प्यार का पहला खत पढ़ने को Read More »

नज़र आता है

हिंदी कविता

नज़र आता है हर अक्स यहाँ बेज़ार नज़र आता है,हर शख्स यहां लाचार नज़र आता है। जीने की आस लिए हर आदमी अब,मौत का करता इंतजार नज़र आता है। काम की तलाश में भटकता रोज यहाँहर युवा ही बेरोजगार नज़र आता है। छाप अँगूठा जब कुर्सी पर बैठा तब,पढ़ना लिखना बेकार नज़र आता है। भूखे

नज़र आता है Read More »

हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है

Uncategorized

मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता हैदेखे कितने मंजर हमने तू ही दिल को भाता हैना जानूं क्यूं खुद पे मेरा लगता अब अधिकार नहीआईना अब मैं जब भी देखूं तेरा मुखड़ा आता है ||दिल की वादी में तू रहती या दिल

हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है Read More »

यूँ ही ख़ुद के आगे तुम मजबूर नहीं होना

Uncategorized

यूँ ही ख़ुद के आगे तुम मजबूर नहीं होना यूँ ही ख़ुद के आगे तुम मजबूर नहीं होनाशौहरत हाँसिल गर हो तो मग़रूर नहीं होनालाख फाँसले तेरे मेरे दरमियाँ क्यों न होनज़र की दूरी सही लेकिन दिल से दूर नहीं होनाख़ाली हाथ हम आए थे खाली ही जाना हैदौलत के नशे में कभी भी चूर

यूँ ही ख़ुद के आगे तुम मजबूर नहीं होना Read More »

दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली

विरह और दर्द

दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली,झोली सबकी तु भर दे वो माता मेहरावाली,नौ दिन का ये त्योहार लगे बडा ही प्यारा,तुमसे सबकी मैया नाता बडा ही न्यारा,प्रेम सुधा बरसा दे तु लाल चुनरियाँ वाली,दुख दर्द सभी—————–बडी निराली मैइया दुख सबके हर लेती है,पार

दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली Read More »

बाँसुरी बजाये गिरधारी

Uncategorized

बाँसुरी बजाये गिरधारी बाँसुरी बजाये गीरधारी ब्रज में भीड़ भारी ।सखी संग नाचे वृषभानु दुलारी ब्रज में भीड़ भारी। बाँसुरी की धुन पे कान्हा गौ भी झूमेकदम की डाली मोहन तेरी पलकें चूमेसाथ गाये कोयलीया काली ब्रज में भीड़ भारी ।बाँसुरी बजाये गिरधारी ब्रज मे भीड़ भारी । कमल के फूल माधव चरण को छुएयमुना

बाँसुरी बजाये गिरधारी Read More »

कर्मठता की जीत

हिंदी कविता

कर्मठता की जीत स्वाभिमान मजबूत है , पोषण का है काज ।बैठ निठल्ला सोचता ,  बना भिखारी आज ॥लाचार अकर्मण्यता , मंगवा रही भीख ।काज बिना कर के करे , कुछ तो उससे सीख ॥आलसी लाचार बने , करे गलत करतूत ।कर्मठता सबसे बड़ी , कर देती मजबूत ॥मिलता है मेहनत से , जब भर

कर्मठता की जीत Read More »

Scroll to Top