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पालन अपना कर्म करो
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया
मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है
गर्दिश में सितारे हों
प्यार का पहला खत पढ़ने को
नज़र आता है
हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है
यूँ ही ख़ुद के आगे तुम मजबूर नहीं होना
दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली
बाँसुरी बजाये गिरधारी
कर्मठता की जीत
आओ सब मिल कर संकल्प करें
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