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नमन हे विश्ववन्दनीय महावीर
मैं भुंइया अंव
पाँच वर्ष का है त्यौहार
पिरामिड विधा पर रचना
चैत्र शुक्ल में मनाएं नवरात्रि त्यौहार
कौन समय को रख सकता है
मौत का कुछ तो इंतज़ाम करें
चैत्र नवरात्र पर घनाक्षरी
अब क्या होत है पछताने से
जग में तू आया मानव
लोकतंत्र की हत्या
वृध्दों पर दोहे- सुधा शर्मा
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