वृध्दों पर दोहे- सुधा शर्मा
हिंदी कवितावृध्दों पर दोहे बूढ़ा बरगद रो रहा, सूख गये सब पात।अपनों ने ही मार दी,तन पर देखो लात।। दिया उमर भर आज तक,घनी सभी को छाँह।भूल गये सब कृतज्ञता,काट रहे हैं बाँह।। ढूंढ रहा है देख लो,बेबस अपनी छाँव।आया कैसा हैसमय,बीच धार है नाव।। मात पिता सम वट समझ ,रखो सदा ही ध्यान ।शक्ति पुंज
वृध्दों पर दोहे- सुधा शर्मा Read More »

