तुम्हारे प्यार में कब-कब बिखरा नहीं हूँ मैं
हिंदी कवितातुम्हारे प्यार में कब-कब बिखरा नहीं हूँ मैं नैनों की झील में इश्क़ का पतवार लियेकौन कहता है कि कभी उतरा नहीं हूँ मैं ?बिखरा तो बहुत हूँ ज़िंदगी के जद्दोजहद मेंतुम्हारे प्यार में कब-कब बिखरा नहीं हूँ मैं ?तब मेरे बालों पे उंगलियाँ क्या फेर दीं तुमनेउस आइने से पूछिए कब से संवरा नहीं
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