कविता बहार

माँ कुष्माण्डा पर कविता

हिंदी कविता

माँ कुष्माण्डा पर कविता सूर्य मंडल में बसी,अलौकिक कांति भरी,शक्ति पूँज माँ कुष्माण्डा,तम हर लीजिए।अण्ड रूप में ब्रम्हाण्ड,सृजन कर अखण्ड,जग जननी कुष्माण्डा,प्राण दान दीजिए।दुष्ट खल संहारिनी,अमृत घट स्वामिनी,आरोग्य प्रदान कर, रुग्ण दूर कीजिए।शंख चक्र पद्म गदा,स्नेह बरसाती सदा,सृष्टि दात्री माता रानी,ईच्छा पूर्ण कीजिए ✍ सुकमोती चौहान “रुचि”बिछिया,महासमुन्द,छ.ग.कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

माँ कुष्माण्डा पर कविता Read More »

कटुक वचन है ज़हर सम

हिंदी कविता

कटुक वचन है ज़हर सम वाणी ही है खींचती भला बुरा छवि चित्रवाणी से बैरी बने वाणी से ही मित्रसंयम राखिए वाणी पर वाणी है अनमोलनिकसत है इक बार तो विष रस देती घोल। कटुक वचन है ज़हर सम मीठे हैं अनमोलवाणी ही पहचान कराती तोल मोल कर बोलकटु वाणी हृदय चुभे जैसे तीर कटार

कटुक वचन है ज़हर सम Read More »

बासंतिक नवरात्रि की आई मधुर बहार

Uncategorized

बासंतिक नवरात्रि की आई मधुर बहार बासंतिक नवरात्रि की आई मधुर बहारआह्वान तेरा है मेरी मां आजा मेरे द्वारमंदिर चौकी कलश सज गएदर्शन दे माता दुर्गे होकर सिंह सवार।नौ दिन हैं नवरात्रि के नवरूप तेरे अपारलाल चुनर साड़ी सिंदूर से करुं तेरा श्रृंगारसंकटहरिणी मंगलकरणी नवदुर्गेखुश हो झोली में भर दे तू आशीष हजार।हाथ जोड़ विनती

बासंतिक नवरात्रि की आई मधुर बहार Read More »

चुनाव का बोलबाला

नारी जीवन और संवेदना

चुनाव का बोलबाला हर  गली   में   बोलबाला  है।अब  वक्त  बदलने  वाला  है।।जो चुनाव नजदीक आ गया,बहता   दारू  का   नाला  है।।उन्हें  वोट  चाहिए  हर  घर  से,हर  महिला  इनकी  खाला  है।।साम, दाम, दण्ड, भेद अपनाए,सच  की  छाती  पर  छाला  है।।झुग्गी  में   नेता   रोटी   खाए,समझ  लो गड़बड़  झाला  है।।कल  चाहे  ये  बलात्कार   करें,आज  बहन  हर  एक  बाला है।।ये 

चुनाव का बोलबाला Read More »

कालचक्र गतिशील निरन्तर होता नहीं विराम

हिंदी कविता

कालचक्र गतिशील निरन्तर होता नहीं विराम कालचक्र गतिशील निरन्तर                      होता नहीं विराम,दुख    के   पर्वत,नदिया,नाले               सुख का अल्प विराम।अब तक मुझको समझ न आया                   इस जगती का रागरास       न आयी   इसकी  माया                 कैसे    हो   अनुराग !शिथिल हुआ है तन ये जर्जर               मन भागे   अविरामदुख के पर्वत , नदिया , नाले ,             सुख का अल्प विराम।छायी है

कालचक्र गतिशील निरन्तर होता नहीं विराम Read More »

सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ

हिंदी कविता

सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ ~~~~सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ।कंठ में बिराजे जेकर भाग जागय ओ।तोरे आसरा म नान्हे लइका पढ़ जाथे।बुद्धि पाके ज्ञानी कलाकार बन जाथे।मन ल भरमा के तंय,धार ल ठहरा के तंय।डहके डुबत नइयां लागय ओ।सरसती दाई ………बिनती हावय दाई सब ल ज्ञान म नौहादे।दुखिया ल सुख दे तंय पीरा

सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ Read More »

आया है चैत्र नवरात्र का त्योहार

हिंदी कविता

उगादी सृष्टि की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए नौ दिनों में मनाया जाता है, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने उगादी पर ब्रह्मांड का निर्माण शुरू किया था. त्योहार दुर्गा के नौ रूपों का जश्न मनाता है, और पहला दिन (चैत्र नवरात्रि) मानव जाति की शुरुआत का जश्न मनाने

आया है चैत्र नवरात्र का त्योहार Read More »

दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैं

हिंदी कविता

दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैं दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैंकहने को तो हम कह जाएँ पर कहने से बचते हैं।दिल वालों की इस बस्ती में कौन किसी का अपना हैकहने को अपना कह जाएँ पर कहने से डरते हैं ।चाहत की बुनियाद पे

दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैं Read More »

अनिता मंदिलवार सपना की कविता

समाज और यथार्थ

अनिता मंदिलवार सपना की कविता समझदार बनो कहते हैं बड़े बुजुर्गसमझदार बनोजब बेटियाँ चहकती हैंघर के बाहरखिलखिलाती हैंउड़ना चाहती हैंपंख कतर दिये जाते हैंकहा जाता हैतहजीब सीखोसमझदार बनो !जब वह बराबरीकरती दिखती भाई कीउसे एहसासदिलाया जाता है कितुम लड़की होतुम्हें उड़ने का हक नहीं हैबस बंद रहना हैविचारों के कटघरे मेंतुलना न करो तुमअपने हद

अनिता मंदिलवार सपना की कविता Read More »

बना है बोझ ये जीवन कदम

हिंदी कविता

बना है बोझ ये जीवन कदम (मुज़तस मुसम्मन मखबून)बना है बोझ ये जीवन कदम थमे थमे से हैं,कमर दी तोड़ गरीबी बदन झुके झुके से हैं।लिखा न एक निवाला नसीब हाय ये कैसा,सहन ये भूख न होती उदर दबे दबे से हैं।पड़े दिखाई नहीं अब कहीं भी आस की किरणें,गगन में आँख गड़ाए नयन थके

बना है बोझ ये जीवन कदम Read More »

क्षुधा पेट की बीच सड़क पर

हिंदी कविता

क्षुधा पेट की बीच सड़क पर क्षुधा पेट की, बीच सड़क पर।दो नन्हों को लायी है।।भीख माँगना सिखा रही जो।वो तो माँ की जायी है।।हाथ खिलौने जिसके सोहे।देखो क्या वो लेता है।कोई रोटी, कोई सिक्का,कोई धक्का देता है।।खड़ी गाड़ियों के पीछे ये।भागे-भागे जाते हैं।करे सफाई गाड़ी की झट।गीत सुहाने गाते हैं।।रोटी की आशा आँखों में।रोकर बोझा

क्षुधा पेट की बीच सड़क पर Read More »

गरीबी का घाव

हिंदी कविता

गरीबी का घाव आग की तपिस में छिलते पाँवभूख से सिकुड़ते पेटउजड़ती हुई बस्तियाँऔर पगडण्डियों परबिछी हैं लाशें ही लाशेंकहीं दावत कहीं जश्नकहीं छल झूठे प्रश्नतो कहीं …. आलीशान महलों की रेव पार्टियाँदो रोटी को तरसतेहजारों बच्चों परकर्ज की बोझ से दबेलाखों हलधरों परऔर मृत्यु से आँखमिचोली करतेश्रमजीवी करोड़ों मजदूरों परशायद! आज भी …. किसी

गरीबी का घाव Read More »

Scroll to Top