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उषा सुहानी लगे प्यारी
स्वामी जी आपको करते हैं नमन
कुछ पल तुम्हारे साथ
हे युवा उठो चलो जागो
प्रिय का अनुपम श्रृंगार
मेरी प्यारी बहन पर कविता
हे दिवाकर तुम्हें प्रणाम
अपना प्यारा गाँव
लो चले आये तुम भी श्मशान
सुंदर और अच्छे में भेद
ख्वाब में प्रिय
हिन्दी है हमारी स्वाभिमान की भाषा
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