गिरिराज हिमालय
हिंदी कवितागिरिराज हिमालय भारत का हिमगिरि प्रहरी हैरजतमयी अनमोल ताज।युग- युग तक कृतज्ञ रहेगा,भरतखण्ड का महा राज।अहो भाग्य है इस भारत के,जहां हिमालय अडिग खडा।शीश उठाये गिरवर निर्भय,स्वाभिमामान से धीर लडा़।गंगा उद् गम गिरिवर से है,मूल दिव्य औषधियों का।इसके अंक में पुरी विशाला,आराध्य देव है मुनियों का।अभेघ्य दुर्ग है महा हिमाल़य,सदियों से रक्षा करता।कोई दुश्मन

