कविता बहार

दीपक की ख्वाहिश

हिंदी कविता

दीपक की ख्वाहिश दीपक की ख्वाहिशमिट्टी से बना हूँ मैं तो,मिट्टी में मिल जाऊँगा।जब तक हूँ अस्तित्व में,रौशनी कर जाऊँगा ।।तमस छाया हर तरफ,सात्विकता  बढ़ाऊंगा।विवेक को जगाकर मैं,रौशनी कर जाऊँगा ।।धैर्य की बाती लगाकर,विनय से तेल बनाऊंगा।सतत ज्ञान बढ़ाकर मैं,रौशनी कर जाऊँगा ।।उत्साह मेरे है अंदर,सभी में भर जाऊँगा।ख्वाहिश एक ही बस,रौशनी कर जाऊँगा ।।मधु […]

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अब तो खुलकर बोल

हिंदी कविता

अब तो खुलकर बोल* शर्मिलापन दूर भगाकर,घूँघट के पट खोल!बोल बावरी कलम कामिनी,अब तो खुल कर बोल!!जीवन की अल्हड़ता देखी,खुशियाँ थी अनमोल!दुख को देखा इन नैनों से,तर्क तराजू तोल!ऊंच नीच की गलियाँ देखी,अक्षर अक्षर बोल!बोल बावरी कलम कामिनी,अब तो खुलकर बोल!!…………..(१) राजनिती में दल दल देखा,नेताओं का शौर!डाकू बनगये आज धुरंधर,सच्चे नेता चोर!गिरेबाँन गँदा है

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पुलवामा की घटना

हिंदी कविता

पुलवामा की घटना पुलवामा की घटना देख,                              देश बड़ा शर्मिंदा है।धिक्कार हमारे भुजबल पर ,                      अब तक कातिल जिन्दा है।वो बार -बार हमला करते ,                          हम शांति वार्ता करते है।दुश्मन इस गफलत में है,                        शायद हम उससे डरते है।गीदड की औकाद ही क्या ,                      जो हमको आँख दिखायेगा।पीठ पर घाव दिया है ,                          तो छाती

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अब तो बस प्रतिकार चाहिए

हिंदी कविता

अब तो बस प्रतिकार चाहिए आज लेखनी तड़प उठी हैभीषण नरसंहार देखकर।क्रोध प्रकट कर रही है अपनाज्वालामुखी अंगार उगलकर।दवात फोड़कर निकली स्याहीतलवारों पर धार दे रही।कलम सुभटिनी खड्ग खप्पर लेरण चण्डी सम हुँकार दे रही।जीभ प्यास से लटक रहीवैरी का शोणित पीने को।भाला बनकर आज भेद दूँआतंकी के सीने को।अबकी होली में आतंकीको होलिका बनाउंगी।फिर

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शारदे आयी हो मेरे अंगना

हिंदी कविता

शारदे आयी हो मेरे अंगना हे माँ शारदे, महाश्वेता आयी हो मेरे अंगना ।पूजूँगा तुम्हें हे शतरूपा, वीणापाणि माँ चंद्रवदना ।। बसंत ऋतु के पाँचवे दिवस पर हंस पे चढ़ कर आती हो।हे मालिनी इसलिए तुम हंसवाहिनी कहलाती हो।।माता तुम हो पुस्तक-धारिणी पुस्तक चढ़े तेरे चरणों में।ज्ञान का वर दो हे महामाया आया हूँ तेरी

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पिया जी देखो वसंत आ गया

प्रकृति और पर्यावरण

पिया जी देखो वसंत आ गया पेड़ो के झुरमुट से आतीकोयल की मीठी बोलीफूलों की हर कली पर देखोमतवाले भवरों की टोलीआम वृक्ष मंजरी व टिकोरो से लदबद गया ।पिया जी देखो वसंत आ गया ।। बेल वृक्ष पर आये नए फूलपौधो की अनुपम हरियालीनव पल्लव का पालना डालेप्रकृति नभी लाई खुशहालीटेसू के दहकते फूल

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एक कविता हूँ

हिंदी कविता

एक कविता हूँ! उंगलियों में कलम थामेसोचता हूँ…कि कहींहै वह ध्वनिजो उसे ध्वनित करे…!मैं अंतरिक्ष में तैरता..कल्पनाओं मेंछांटता हूँशब्दमीठे -मीठेकोई शब्द मिलता नहीं मुझेजो इंगित करे उसेबस….उंगलियों से ही उसे –उकेरता हूँ …मिटाता हूँ ।उंगलियों में कलम थामे…मैं सोचता हूँ ।।उसकी खूबसूरतीवो भोलापनतो मुझपे क़यामत ढाईन कोई उपमा सूझीन अतिशयोक्ति ही काम आईजब भी लिखना

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विश्वास टूटने पर कविता

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विश्वास टूटने पर कविता खण्डित जब से विश्वास हुआ है ,                     मनवा सिहर गया है।जीना         दूभर     लगता    जाने                 क्या क्या गुज़र गया है।तिनका तिनका    जोड़   घरौंदा              मिल जुल सकल बनाया।ख्वाबों ,अरमानों   ने    मिल के             पूरा         महल   सजाया ।वज्रपात जब हुआ   नियति   का            जीवन बिखर गया    है ।जीना दूभर  लगता  ,        जाने           क्या क्या गुज़र गया  

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मधुमासी चौपाइयाँ

प्रकृति और पर्यावरण

मधुमासी चौपाइयाँ शरद शिशिर ऋतु कब के बीते, हाथ प्रकृति के रहे न रीते।दिनकर चले मकर के आगे, ठंडक सूर्य ताप से भागे।1बासंती मधुमास महीना, सर्व सुगन्धित भीना- भीना।घिरा कुहासा झीना-झीना, धरा सजी ज्यों एक नगीना।2कलियों पर हैं भ्रमर घूमते, ऋतु बसंत को सभी पूजते।मादकता वन उपवन छाई, आतुरता हर हृदय समाई।3नये पात आये तरुओं

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बेचकर देखों मुझे जरा

समाज और यथार्थ

बेचकर देखों मुझे जरा पूछने से पहले जवाब बना लिये।यार  सवाल तो गजब़ बना लिये। किसी ने पूछा ही नहीं मैं जिंदा हूँ,मगर तुम हसीन ख्वाब बना लिये। और और,और कहते रहे गम को,लो आशुओं का हिसाब बना लिये। मेरी मिलकियत न रहीं वजूद मेरा,समाज से कहों कसाब बना लिये। सौ-सौ सवाल गोजे पे रसीद

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नाराच ( पंच चामर ) छंद

हिंदी कविता

नाराच ( पंच चामर ) छंद  :       24 मात्रा,   ज र ज र ज गुरु । महान  देश  की  ध्वजा  पुनीत  राष्ट्र  गान  है ।उठे  सदा  झुके  नहीं  अतीत  गर्व  प्राण   है ।।खड़े   रहे  डटे   रहे   मिसाल   दे  जवान  है ।अनंत  कर्मयोग  को  सिखा  रहा  किसान है ।।दिशा  सभी  पुकारते  निशा  प्रभा  बिखेरती ।सनेह  

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