बेचकर देखों मुझे जरा
समाज और यथार्थबेचकर देखों मुझे जरा पूछने से पहले जवाब बना लिये।यार सवाल तो गजब़ बना लिये। किसी ने पूछा ही नहीं मैं जिंदा हूँ,मगर तुम हसीन ख्वाब बना लिये। और और,और कहते रहे गम को,लो आशुओं का हिसाब बना लिये। मेरी मिलकियत न रहीं वजूद मेरा,समाज से कहों कसाब बना लिये। सौ-सौ सवाल गोजे पे रसीद
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