खामोशी पर कविता
हिंदी कविताखामोशी पर कविता मैं ,चुप ही रहती हूं ,जाने कबसे ,मुझे पता भी ,नहीं चला ,खामोशी कब,मेरी मीत बन गई,और तुमने समझा,मैं सुधर गई,क्योंकि ,नहीं पूछती देर से आने की वजह ।नहीं कहती क्या अच्छा हैक्या बुरा ?नहीं लाती हल्के रंग की शर्ट।नहीं कहती तुम पर फबेगा।शायद ,हमारे रिश्ते के रंगहल्के हो गए हैं ,काश […]


