कविता बहार

मातृ दिवस पर हिंदी कविता (Martee Divas Par Kavita )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

मातृ दिवस पर हिंदी कविता (Martee Divas Par Kavita) : मातृपितृ पूजा दिवस भारत देश त्योहारों का देश है भारत में गणेश उत्सव, होली, दिवाली, दशहरा, जन्माष्टमी, नवदुर्गा त्योहार मनाये जाते हैं। कुछ वर्षों पूर्व मातृ पितृ पूजा दिवस प्रकाश में आया। आज यह 14 फरवरी को देश विदेश में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार द्वारा […]

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कृष्ण कन्हैया – डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

कृष्ण कन्हैया आए हैं कृष्ण कन्हैयाहर्षित हैं बाबा मैयाधूम मची चहुँ ओरखुशियां मनाइए।। आए है तारणहारहोगा दुर्जन संहारस्वागत करें मिलकेघर में बुलाइए।। बादल बरस रहेकालिंदी भी खूब बहेआए हैं दुख मिटानेगुणगान गाइए।। हुई ब्रजभूमि धन्यउनसा न कोई अन्यसौम्य सुंदर रूप कोहिय में बसाइये।। नंद के दुलारे हैंजन जन के प्यारे हैंमुरलीधर गोपालादरस दिखाइए।। सूरत है

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goverdhan shri krishna

जन्माष्टमी पर दोहे -मदन सिंह शेखावत

हिंदी कविता

जन्माष्टमी पर दोहे भादौ मास अष्ठम तिथि , प्रकटे कृष्ण मुरार।प्रहरी सब अचेत हुए , जेल गये खुल द्वार।।1 जमुना जी उफान करे, पैर छुआ कर शान्त।वासुदेव धर टोकरी , नन्द राज के कान्त।।2 कंस बङा व्याकुल हुआ,ढूढे अष्ठम बाल।नगर गांव सब ढूंढकर ,मारे अनेक लाल।।3 मधुर मुरलिया जब बजी,रीझ गये सब ग्वाल।नट नागर नटखट

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हो नहीं सकती – बाबुराम सिंह

हिंदी कविता

हो नहीं सकती शुचिता सच्चाई से बड़ा कोई तप नहीं दूजा,सत्संग बिना मन की सफाई हो नहीं सकती। नर जीवन जबतक पुरा निःस्वार्थ नहीं बनता,तबतक सही किसीकी भलाई हो नहीं सकती। अन्दर से जाग भाग सदा पाप दुराचार से,सदज्ञान बिन पुण्यकी कमाई हो नहीं सकती। काम -कौल में फँसकर ना कृपण बनो कभी,सदा दान बिन

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सर्द हवाएँ – सुकमोती चौहान रुचि

हिंदी कविता

सर्द हवाएँ – सुकमोती चौहान रुचि सर्द हवाएँ हृदय समाये, तन मन महका जाये |आ कानों में कुछ कहती है, मधुरिम भाव जगाये | हमको तुम कल शाम मिले थे, पसरी थी खामोशी |भाव अनेकों उमड़ पड़े थे, लब पर थी मदहोशी ||शांत सुखद मौसम लगता है, मन ये शोर मचाये |सर्द हवाएँ हृदय समाये,

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कुम्हार को समर्पित कविता -निहाल सिंह

हिंदी कविता

कुम्हार को समर्पित कविता -निहाल सिंह फूस की झोपड़ी तले बैठकर।चाक को घुमाता है वो दिनभर। खुदरे हुए हाथों से गुंदकेमाटी के वो बनाता है मटकेतड़के कलेवा करने के बादलगा रहता है वो फिर दिन- रातस्वयं धूॅंप में नित प्रति दिन जलकरचाक को घुमाता है वो दिनभर | ऑंखों की ज्योति धुॅंधली पड़ गईचश्मे की

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हलषष्ठी पर हिंदी कविता – नीरामणी श्रीवास नियति

हिंदी कविता

हलषष्ठी पर हिंदी कविता आयी हलषष्ठी शुभम , माँ का यह व्रत खास ।अपने बच्चों के लिए , रखती है उपवास ।।रखती है उपवास , करे सगरी की पूजा ।बिना चले हल भोज्य , नहीं करते है दूजा ।।नियति कहे कर जोड़ , हृदय व्रत कर हर्षायी ।कथा सुनेंगे आज , मातु हल षष्ठी आयी

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चिकित्सक/ डाक्टर दिवस पर हिंदी कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

चिकित्सक/ डाक्टर दिवस पर हिंदी कविता चिकित्सक हिय में सेवा भावना, नहीं किसी से बैर।स्वास्थ्य सभी का ठीक हो, त्याग दिए सुख सैर।।नित्य चिकित्सक कर्म रत, करे नहीं आराम।लड़ते अंतिम श्वांस तक,चाहे सबकी खैर।। कठिन परीक्षा पास कर, बने चिकित्सक देख।धरती के भगवान है, बदले किस्मत रेख।।आओ हम सम्मान दे, उनको मिलकर आज।उठा शुभम कर लेखनी,

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doha sangrah

मित्रता पर दोहे – गोपाल ‘सौम्य सरल

हिंदी कविता

यहां पर *गोपाल ‘सौम्य सरल’‌ द्वारा रचित सच्ची मित्रता को समर्पित एक रचना प्रस्तुत है।

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Rakshabandhan

रक्षाबन्धन पर दोहे – बाबूलाल शर्मा, बौहरा

मन और भावनाएँ

रक्षा बन्धन एक महत्वपूर्ण पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह ‘रक्षासूत्र’ मात्र धागे का एक टुकड़ा नहीं होता है, बल्कि इसकी महिमा अपरम्पार होती है। कहा जाता है कि एक बार युधिष्ठिर ने सांसारिक संकटों से मुक्ति के लिये भगवान कृष्ण से उपाय पूछा तो कृष्ण

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