कविता बहार

चुगली रस – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

चुगली रस मीठा चुगली रस लगे, सुनते देकर ध्यान। छूट बात जाए नहीं, फैला लेते कान।। चुगलखोर सबसे बुरा, कर दे आटोपाट।नारद से आगे निकल, सबकी करता काट।। चुगली सबको मोहती, नर हो चाहे नार।चुगली के फल तीन हैं, फूट द्वेष तकरार।। चुगली निंदा जो करें, सही नहीं वो लोग।चुगल पतन की ओर है, पड़े

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पावस पर कविता – नीरामणी श्रीवास नियति

हिंदी कविता

पावस पर कविता पावस ऋतु अब आ गई , घिरी घटा घनघोर ।चमचम चमके दामिनी , बादल करते शोर ।।बादल करते शोर , भरे नदिया अरु नाला ।चले कृषक खलिहान , लगा कर घर में ताला ।नियति कहे कर जोड़ , दिखे ज्यों रात्रि अमावस ।अँधियारा चहुँ ओर , घटा छाये जब पावस ।। पावन

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तुम ही तुम हो – माधुरी डड़सेना मुदिता

मन और भावनाएँ

तुम ही तुम हो भावना में बसे हो कामना में तुम्हीं हो ।जिंदगी बन गये हो साधना में तुम्हीं हो ।। वादियाँ खूबसूरत हर नजारा हंसी है ईश की बंदगी में प्रार्थना में तुम्हीं हो । हर गजल में भरे हो गीत की बंदिशों मेंशक्ल आता नजर है आइना में तुम्हीं हो । इक तुम्हीं

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अनजान लोग – नरेंद्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

अनजान लोग कितने अच्छे होते हैं अनजान लोगउनको हमसे कोई अपेक्षा नहीं होतीहमें भी उनसे कोई अपेक्षा नहीं होती हम गलत करते हैंकि अनजानों से हमेशा डरे डरे रहते हैंहर बार अनजान लोग गलत नहीं होतेफिर भी प्रायः अनजानो से दया करने में कतराते हैं हमारे दिल दुखाने वाले प्रायः जान पहचान के होते हैंहमें

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तेरी यादों का सामान – सुशी सक्सेनास

हिंदी कविता

तेरी यादों का सामान तेरी यादों का सामान अभी भी पड़ा है मेरे पासजो दिलाता है तेरे करीब होने का अहसास।कुछ मुस्कुराहटें जो दिल में घर कर गई, और कुछ चाहतें जो मुझे पागल कर गई। तुझसे जुड़े हुए कुछ हंसी लम्हें प्यार भरेकुछ लफ्ज़ तेरे होठों से निकले इकरार भरेकुछ बातें जो अपनेपन का

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doha sangrah

गुरु पूर्णिमा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ

समाज और यथार्थ

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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सावन का चल रहा महीना – उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट

हिंदी कविता

सावन का चल रहा महीना सपने अब साकार हो रहे, जो थे कब से मन में पालेसावन का चल रहा महीना, देखो सबने झूले डाले।पत्थर पर जब घिसा हिना को, फिर हाथों पर उसे लगायानिखरी सुंदरता इससे तब, रंग यहाँ जीवन में छायाहरियाली तीजों पर मेला, किसके मन को यहाँ न भायाआयोजन हर साल हो

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आहट पर कविता – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

आहट पर कविता सिंहासन खतरे मेंहो ना होसिंह डरता है हर आहट से आहट भीप्रतीत होती है जलजलाप्रतीत होती है उसे खतरावह लगा देता हैऐड़ी-चोटी का जोरकरता है हर संभव प्रयासआहटों को रोकने का अंदर से डरा हुआताकतवर हो कर भीडरता है बाहर कीहर आहट से मान लेता है शत्रुतमाम अहिंसक व शाकाहारी निरिह जानवरों

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अश्रु नीर नयन के – हेमलता भारद्वाज डॉली

हिंदी कविता

अश्रु नीर नयन के अश्रु नयन के सूख गए अब ,छोड़ दिया है हमने क्योंकि ,सोचना ज्यादा अब l*बचपन में रोए बहुत ,रो-रो कर भरे नयन ।दूर की सोच बनाते थे जब,देता नहीं था साथ कोई तब,हर तरफ से डांट डपट, भरता रहता गुबार सब l *भरते -भरते मन के अंदर, हुआ समंदर “डाली “अश्रु

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गुरू पूर्णिमा पर कविता -तोषण चुरेन्द्र दिनकर

हिंदी कविता

गुरू पूर्णिमा पर कविता नित्य करें हम साधना,रखें हृदय के पास।ज्ञान रुपी आशीष से,जीवन हो मधुमास।।१।। गुरुवर की पूजा करें,गुरु ही देते ज्ञान।जिनके ही आशीष से,मिले अचल सम्मान।।२।। गुरू नाम ही साधना,साधक बनकर साध।जिनके सुमिरण से सदा,कटे कोटि अपराध।।३।। बनकर रहते सारथी,गढ़ते नित नव राह।जो भी मन की बात हो,पूरी करते चाह।।४।। गुरु महिमा नित

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गुरुवर – सुकमोती चौहान रुचि

समाज और यथार्थ

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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अटल कश्यप की हिन्दी कवितायेँ

समाज और यथार्थ

अटल कश्यप की हिन्दी कवितायेँ सैक्स-वर्कर चश्मा इंसानियत का चढ़ाकरएक सैक्स-वर्कर को टटोला था,छल्ले धुँए के उड़ाते और हलक से शराब के घूँट उतारते अपने दर्द को मेरे सामने उड़ेला था,पसीजा था मेरा कलेजा भीउसकी कहानी सुनकरमजबूरियों ने उसेदलदल में धकेला था,थे उसे भी जिदंगी से शिकवे-शिकायतेंपर चेहरें परफीकी हँसी को ओढ़ा था,पूँछा जब मैने

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