मनुष्य का मन- ताज मोहम्मद
हिंदी कविताप्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक मनुष्य का मन जोकि ताज मोहम्मद है. इसे मानव जीवन को आधार मानकर रची गयी हैं”.
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प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक मनुष्य का मन जोकि ताज मोहम्मद है. इसे मानव जीवन को आधार मानकर रची गयी हैं”.
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प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक अपने पापा की मैं हूँ। है जोकि ताज मोहम्मद की रचना है. इसे बेटी को आधार मानकर रची गयी हैं”.
अपने पापा की मैं हूँ – ताज मोहम्मद Read More »
बचपन में माँ हमें लोरी सुनाती है माँ के बड़े होने पर वह रात मे सो नही पाती तब उसे सुलाने केलिए किए गये जतन का चित्रण
एक लोरी- माँ के नाम Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक “अशक्तता पर विजय” है जो कि आशीष कुमार मोहनिया, बिहार की रचना है. इसे अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के उपलक्ष्य में दिव्यांग व्यक्ति के स्वाभिमान पूर्वक जीवन जीने की ललक एवं चेष्टा को आधार मानकर लिखा गया है.
अशक्तता पर विजय – आशीष कुमार Read More »
सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ एक अंकुरित पौधा एक अंकुरित आम , पड़ा था सड़क किनारे ।आते जाते लोग , सभी थे उसे निहारे ।।खोज रहा अस्तित्व , उठा ले कोई सज्जन ।दे दे जड़ को भूमि , लगा दे लेकर उपवन ।।करता वह चीत्कार है , जीना चाहूँ मैं सुनो ।मुझे सहारा दो तनिक
सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ Read More »
मानव को प्रकृति की रक्षा के लिये सचेत करना
प्रकृति की पीड़ा – माला पहल Read More »
यहाँ पर मुकुटधर पांडेय की कुछ लोकप्रिय कवितायेँ प्रस्तुत की जा रही हैं जो भी आपको अच्छा लगे कमेट कर जरुर बताएँगे मेरा प्रकृति प्रेम / मुकुटधर पांडेय हरित पल्लवित नववृक्षों के दृश्य मनोहरहोते मुझको विश्व बीच हैं जैसे सुखकरसुखकर वैसे अन्य दृश्य होते न कभी हैंउनके आगे तुच्छ परम ने मुझे सभी हैं ।
मुकुटधर पांडेय की लोकप्रिय कवितायेँ Read More »
नारी का साहस जग में नारी का अवतार चार,माता , भार्या, पुत्री, बहना।सौम्य स्वभाव ,त्याग ,सेवा ,नारी का है अद्भुत गहना।नारी साहस, प्रेरणा की मूर्ति ,ममता ,वात्सल्य नारी का खजाना।नारी है गृहस्ती का पहिया,परिवार की आस्था और भावना।रणक्षेत्र में दुर्गा ,लक्ष्मी नारी ।समाज रक्षक शत्रु संहारणा ।प्राचीन नारी का गौरव देखो ,बनके उभरी सामाजिक संरचना।पशु
श्रीमती पदमा साहू की 10 कवितायेँ Read More »
यहाँ पर कुंवर नारायण की लोकप्रिय कवितायेँ दिए जा रहे हैं जो भी आपको अच्छी लगे उसे आप कमेंट कर हमें जरुर बताएं बीमार नहीं है वह / कुंवर नारायण बीमार नहीं है वहकभी-कभी बीमार-सा पड़ जाता हैउनकी ख़ुशी के लिएजो सचमुच बीमार रहते हैं। किसी दिन मर भी सकता है वहउनकी खुशी के लिएजो
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यहाँ पर भारतेंदु हरिश्चंद्र की लोकप्रिय कवितायेँ के पढेंगे . आपको जो भी कविता अच्छी लगे कमेंट करके जरुर बताएं
भारतेंदु हरिश्चंद्र की लोकप्रिय कवितायेँ Read More »
जी होता चिड़िया बन जाऊँ / सोहनलाल द्विवेदी जी होता, चिड़िया बन जाऊँ!मैं नभ में उड़कर सुख पाऊँ! मैं फुदक-फुदककर डाली पर,डोलूँ तरु की हरियाली पर,फिर कुतर-कुतरकर फल खाऊँ!जी होता चिड़िया बन जाऊँ! कितना अच्छा इनका जीवन?आज़ाद सदा इनका तन-मन!मैं भी इन-सा गाना गाऊँ!जी होता, चिड़िया बन जाऊँ! जंगल-जंगल में उड़ विचरूँ,पर्वत घाटी की सैर
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प्रस्तुत गीत का शीर्षक “हर तरफ है भ्रष्टाचार है” जोकि आशीष कुमार (मोहनिया, कैमूर, बिहार) की रचना है. इसे वर्तमान समाज में फैले भ्रष्टाचार को आधार मानकर रचा गया है. इस रचना के माध्यम से बताया गया है कि हमारे समाज में भ्रष्टाचार कितनी गहरी पैठ बना चुका है.
हर तरफ है भ्रष्टाचार – आशीष कुमार Read More »