मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

अनिश्चित रहें, जीवित रहें

हिंदी कविता

Stay Uncertain, Stay Alive(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) भ्रम में होनामर जाना नहीं है—खोज में होनाजीवित होना है। यह बेहतर हैकि तुम प्रश्नों के साथ चलो,बजाय इसकेकि झूठे विश्वास मेंरुक जाओ। तुम्हें confidence नहीं चाहिए,तुम्हें चाहिएईमानदारीऔर जिज्ञासा। जो बहुत आत्मविश्वासी दिखते हैं,अक्सरअपने डर कोमुस्कान से ढँक लेते हैं।उनका “मैं जानता हूँ”कभी-कभीअज्ञान का शोर होता है।

अनिश्चित रहें, जीवित रहें Read More »

सेल्फ-हेल्प क्यों मदद नहीं करती

हिंदी कविता

Why Self-Help Doesn’t Help(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जिसे तुम self-help कहते हो,वह अक्सरअहंकार कीघबराई हुईबचाव-योजना होती है। अहंकारअपने ही कर्मों सेडरा हुआ है,और चाहता है—कोई आए,उसे बचा ले। मदद की यह चीखबाज़ार तक पहुँचती है,और तुरंतपुस्तकें जन्म लेती हैं,सेमिनार सजते हैं,वीडियो चमकने लगते हैं। पर एक प्रश्नलगभग कभी नहीं पूछा जाता—यह स्व है क्या,जिसे

सेल्फ-हेल्प क्यों मदद नहीं करती Read More »

सकारात्मकता से मुक्ति

हिंदी कविता

Freedom from Positivity(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जिसे तुम“सकारात्मक” कहते हो,वह तभी बनता हैजब भीतरएक केंद्र खड़ा कर दिया जाता है। केंद्र बदला,तो अर्थ बदल गया—आज जो सकारात्मक है,कल वहीनकारात्मक कहलाएगा। क्योंकि यह केंद्रसत्य का नहीं,अहंकार का होता है—सीखा हुआ,व्यक्तिगत,डरा हुआ। हर किसी कीअपनी positivity है,इसलिएयह शब्दमार्गदर्शक नहीं,भ्रमकारी बन जाता है। जिसे तुम सकारात्मक कहते

सकारात्मकता से मुक्ति Read More »

स्पष्टता के बिना साहस उन्माद है

हिंदी कविता

स्पष्टता के बिना साहस उन्माद है(Courage without Clarity Is Hysteria)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) साहस की बात नहीं है,बातस्पष्टता की है। साहसअक्सर सस्ता मिल जाता है—थोड़ी लालच,थोड़ा नशा,थोड़ा हार्मोनल उफान,और डरगायब हो जाता है। भीड़ मेंहीरो पैदा हो जाते हैं,धुंध मेंमृत्यु से भीलड़ लेने का दावा। तीन जाम के बादअहंकारसात मंज़िल कूदने कोतैयार हो जाता

स्पष्टता के बिना साहस उन्माद है Read More »

स्पष्टता विकल्प नहीं छोड़ती

हिंदी कविता

स्पष्टता विकल्प नहीं छोड़ती(Clarity Leaves No Alternatives)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जब स्पष्टता होती है,तो चुनावएक बोझ नहीं रहता। सोचो—अगर तुम जानते होकि तुम कौन हो,तुम्हें क्या चाहिए,तो क्याफिर भीउलझन बचती है? फिर यहघुमावदार सोच क्यों?यह चक्करदार प्रश्न क्यों?इतने विकल्पआख़िर आते कहाँ से हैं? विकल्पतथ्यों में नहीं होते—तथ्य तोएक होते हैं,निर्विवाद,सीधे। तथ्यों काकोई विकल्प नहीं

स्पष्टता विकल्प नहीं छोड़ती Read More »

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं

हिंदी कविता

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं(Most ‘Scriptures’ Are Just Old Books)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जो समय से बँधा है,वह बदलेगा—और जो बदले,उस पर टिकनाकैसे संभव है? सच्ची आध्यात्मिकताउसकी खोज करती हैजो नहीं बदलता—क्योंकिकेवल वहीभरोसेमंद है। वेश बदले,रीतियाँ बदलीं,देवताओं के नाम बदले,कथाएँ बदलीं—हर सदी नेअपने रंग चढ़ाए। तो क्यायही सत्य था? अगर सत्यपोशाक में

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं Read More »

अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है

हिंदी कविता

If Truth Hurts, Niceness Kills(अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त अतुकांत कविता) जो तुम्हेंवही कहेजो तुम सुनना चाहते हो—उसे तुम“अच्छा इंसान” कहते हो। जो तुम्हेंवही कहेजो तुम्हें सुनना ज़रूरी है—उसे तुमनिर्दयी मान लेते हो। कितने भोले हैं हम—मुस्कान पर जीवन गिरवी रख देते हैं,दो मीठे झूठहमें काफ़ी लगते हैंप्यार मान

अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है Read More »

बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार

हिंदी कविता

Outer Knowledge, Inner Darkness(बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार)(एक लम्बी, विचारप्रद, सत्यनिष्ठ अतुकांत कविता) अठारह साल,या पच्चीस साल—तुमने पढ़ा क्या? भाषाएँ,इतिहास,राजनीति,भूगोल,अर्थशास्त्र। सूत्र, समीकरण,मानचित्र, तिथियाँ—जानकारियों की बाढ़। पर एक असहज प्रश्न है—क्या तुमअंग्रेज़ी भाषा हो?या फ्रेंच व्याकरण? क्या तुमरासायनिक समीकरण हो?या त्रिकोणमिति का सिद्धांत? क्या तुमपाठ्यपुस्तक में छपीनदियाँ और हिमनद हो?क्या तुमअलेक्ज़ेंडर हो,या अशोक? क्या तुमहार्डवेयर हो?या कोड?

बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार Read More »

शोर नहीं, सत्य को याद रखो

हिंदी कविता

शोर नहीं, सत्य को याद रखो सब कुछजो याद है,याद रखने योग्य नहीं। अतीत का बड़ा हिस्साज्ञान नहीं—शोर है। उसे छोड़ दो।शांतिअपने आपउभर आएगी। जो कुछतुम जानते हो,वह भीसब जानने योग्य नहीं। काफी कुछउधार है,अप्रासंगिक है,मृत बोझ है। उसे गिरने दो—और देखोतुमकितने हल्के हो जाते हो। जो कुछतुम्हारे पास है,उसकामालिक मत बनो—उसेसेवक रहने दो। तबविनम्रतास्वाभाविक

शोर नहीं, सत्य को याद रखो Read More »

ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो

हिंदी कविता

ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो जो ध्यानजीवन को न बदले,वह ध्यान नहीं—मन को सुलाने कीएक आदत भर है। आँखें बंद करनाध्यान नहीं है।यदि आँखें खुलने परज़िंदगी वैसी ही रहे,तो भीतरकुछ भी नहीं जागा। सच्चा ध्यानजीवन के केंद्र तकपहुँचता है—और वहाँहस्तक्षेप करता है। वहतोड़ता हैपुरानी सुविधाओं को,उधेड़ता हैझूठी पहचान को,औरनए ढंग सेजीने की

ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो Read More »

मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है

हिंदी कविता

मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है तुम जहाँ हो,वहीं सेरास्ता खुलेगा। किसी नए स्थान,किसी नए व्यक्ति,किसी नई परिस्थिति कीज़रूरत नहीं। जो सामने है—उसी सेशुरुआत करो। यदि ऊब है,तो ऊब से भागो मत।उसे देखो।उसी मेंप्रवेश-द्वार छुपा है। यदि आसक्ति है,तो उसे न ढको,न उचित ठहराओ।वह तुम्हें दिखाएगीतुम्हारी निर्भरता,तुम्हारा भ्रम। यदि क्रोध हैया भय—तो वहीमार्ग है। उन्हें दबाने

मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है Read More »

छोटे को नज़रअंदाज़ करो

हिंदी कविता

छोटे को नज़रअंदाज़ करो मैं उसे सबक सिखाऊँगा।मैं उसे तोड़ दूँगी।उसने अपमान किया—सुना तुमने?वह व्यंग्य था या नहीं?इशारा था या दुर्घटना?मैं गलत ठहराई गई—या नहीं? रुको। अपने ऊपरथोड़ी दया करो। इन छोटे युद्धों सेखुद को बचाओ।ये लड़ाइयाँतुम्हारी ऊर्जा खा जाती हैं,तुम्हारे घंटे निगल जाती हैं,तुम्हारी चेतना कोटुकड़ों में बाँट देती हैं—और बदले मेंकुछ भी नहीं

छोटे को नज़रअंदाज़ करो Read More »

Scroll to Top