मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

उनकी तड़प तुम्हारी ही है

हिंदी कविता

उनकी तड़प तुम्हारी ही है यदितुम्हें याद हैअपनी ही बेड़ियाँ,अपनी ही मुक्ति कीअधूरी पुकार—तोतुमदूसरों कीखामोश कैद कोमहसूस करने लगते हो। तबदूसरों की आँखों मेंजो चाहकभी कही नहीं गई,वहतुम्हेंचुभने लगती है। जब तुमसच मेंअपने आप सेप्रेम करते हो,तोएक सत्यउजागर होता है—तुम्हारी भलाईऔरदुनिया की भलाईअलग नहीं। साधारण प्रेमसौदे जैसा है—सुख के बदले सुख,आराम के बदलेआराम। कभीरिझाना,कभीरिझ जाना।

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संबंध से पहले संपूर्ण बनो

हिंदी कविता

संबंध से पहले संपूर्ण बनो किसी कायोग्य साथी बनने से पहलेक्यायोग्य मनुष्यबनना आवश्यक नहीं? अकेलापनसीखो। दूसरों सेजुड़ने से पहलेअपने साथरहना सीखो—आसानी से,सहजता से,खुशी से। यदितुम स्वयं के साथबैठ नहीं सकते,तोकृपयाकिसी और परभार मत बनो। जोअपने भीतरठीक नहीं है,वहदूसरे परसवार क्यों हो? अक्सरहमदूसरे के पासइसीलिए जाते हैंक्योंकिहमअपने पासरुक नहीं पाते। यह भी सत्य है—हमेंसंबंधों मेंजीना है।हमद्वीप

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व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो

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व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो सही संबंधसही व्यक्ति खोजने सेनहीं बनता। पहलेअपने कोकिसीसार्थक कार्य मेंलगाओ—औरजो तुम्हेंउस कार्य कोपूरा करने मेंसहायक हो,वहीसंबंध के योग्य है। उचित संगतिवरदान होती है।यदिकिसी का साथमन कोप्रकाश दे,जीवन कोऊपर उठाए—तोस्वयं कोउससेवंचित मत करो। विवाह क्या है?सबसे पहले—साथ निभाने कीएक व्यवस्था। दशकों तककिसी के साथरहने कानिर्णय। इसलिएसबसे बड़ा प्रश्नयह नहीं किवह कौन है,बल्कियह

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अंधा बंधन, आजीवन कारावास

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अंधा बंधन, आजीवन कारावास यदिबुद्धिमान होकरविवाहित हो—सुंदर। यदिबुद्धिमान होकरअविवाहित हो—वह भीसुंदर। मुद्दाविवाह नहीं,मुद्दाबुद्धि है। मुझेविवाह सेन पक्ष है,न विरोध। मुझेउस मन मेंरुचि हैजोसुरक्षा की ओरभागता है,जोकिसी दूसरे कोअपना बनाकरक़ैद करना चाहता है। उसी मन कोदेखनाज़रूरी है। विवाहकेवलसाथ रहने कानाम नहीं—वहकाम की दिशा बदल देता है,संतानों सेरिश्ता गढ़ देता है,जीवन केलगभग हर कोने कोछू लेता है।

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आप रचनात्मकता नहीं बना सकते

हिंदी कविता

आप रचनात्मकता नहीं बना सकते रचनात्मकता बनाई नहीं जाती—वह घटती है।जब मनफालतू बोझ से मुक्त होता है। तुम उसे पैदा नहीं करते,तुम बसदरवाज़ा साफ करते हो।वह स्वयं आती है,जहाँ जगह खाली हो। क्या रोकता है रचना को?भरा हुआ मन—चिंताओं से,लालसाओं से,परिणामों की भूख से। जो हर पल पूछता है—“अंत में क्या मिलेगा?”वह नयाकभी नहीं रच

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बकवास जिसे हम जीवन कहते हैं

हिंदी कविता

The Blabber We Call Life(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) हमारा पूरा जीवनखोखले शब्दों कीनींव पर खड़ा है—और फिर भीहम ऐसे चलते हैंजैसे सब समझते हों। तुम कर्म करते होक्योंकि तुम्हें लगता हैयह ज़िम्मेदारी है।तुम चिपके रहते होक्योंकि इसे प्रेम कहते हो। तुम रुक जाते होकर्तव्य के नाम पर,और दौड़ते होएक ऐसे भविष्य के पीछेजिसका अर्थतुम्हें

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अनिश्चित रहें, जीवित रहें

हिंदी कविता

Stay Uncertain, Stay Alive(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) भ्रम में होनामर जाना नहीं है—खोज में होनाजीवित होना है। यह बेहतर हैकि तुम प्रश्नों के साथ चलो,बजाय इसकेकि झूठे विश्वास मेंरुक जाओ। तुम्हें confidence नहीं चाहिए,तुम्हें चाहिएईमानदारीऔर जिज्ञासा। जो बहुत आत्मविश्वासी दिखते हैं,अक्सरअपने डर कोमुस्कान से ढँक लेते हैं।उनका “मैं जानता हूँ”कभी-कभीअज्ञान का शोर होता है।

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सेल्फ-हेल्प क्यों मदद नहीं करती

हिंदी कविता

Why Self-Help Doesn’t Help(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जिसे तुम self-help कहते हो,वह अक्सरअहंकार कीघबराई हुईबचाव-योजना होती है। अहंकारअपने ही कर्मों सेडरा हुआ है,और चाहता है—कोई आए,उसे बचा ले। मदद की यह चीखबाज़ार तक पहुँचती है,और तुरंतपुस्तकें जन्म लेती हैं,सेमिनार सजते हैं,वीडियो चमकने लगते हैं। पर एक प्रश्नलगभग कभी नहीं पूछा जाता—यह स्व है क्या,जिसे

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सकारात्मकता से मुक्ति

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Freedom from Positivity(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जिसे तुम“सकारात्मक” कहते हो,वह तभी बनता हैजब भीतरएक केंद्र खड़ा कर दिया जाता है। केंद्र बदला,तो अर्थ बदल गया—आज जो सकारात्मक है,कल वहीनकारात्मक कहलाएगा। क्योंकि यह केंद्रसत्य का नहीं,अहंकार का होता है—सीखा हुआ,व्यक्तिगत,डरा हुआ। हर किसी कीअपनी positivity है,इसलिएयह शब्दमार्गदर्शक नहीं,भ्रमकारी बन जाता है। जिसे तुम सकारात्मक कहते

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स्पष्टता विकल्प नहीं छोड़ती

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स्पष्टता विकल्प नहीं छोड़ती(Clarity Leaves No Alternatives)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जब स्पष्टता होती है,तो चुनावएक बोझ नहीं रहता। सोचो—अगर तुम जानते होकि तुम कौन हो,तुम्हें क्या चाहिए,तो क्याफिर भीउलझन बचती है? फिर यहघुमावदार सोच क्यों?यह चक्करदार प्रश्न क्यों?इतने विकल्पआख़िर आते कहाँ से हैं? विकल्पतथ्यों में नहीं होते—तथ्य तोएक होते हैं,निर्विवाद,सीधे। तथ्यों काकोई विकल्प नहीं

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अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं

हिंदी कविता

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं(Most ‘Scriptures’ Are Just Old Books)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जो समय से बँधा है,वह बदलेगा—और जो बदले,उस पर टिकनाकैसे संभव है? सच्ची आध्यात्मिकताउसकी खोज करती हैजो नहीं बदलता—क्योंकिकेवल वहीभरोसेमंद है। वेश बदले,रीतियाँ बदलीं,देवताओं के नाम बदले,कथाएँ बदलीं—हर सदी नेअपने रंग चढ़ाए। तो क्यायही सत्य था? अगर सत्यपोशाक में

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अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है

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If Truth Hurts, Niceness Kills(अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त अतुकांत कविता) जो तुम्हेंवही कहेजो तुम सुनना चाहते हो—उसे तुम“अच्छा इंसान” कहते हो। जो तुम्हेंवही कहेजो तुम्हें सुनना ज़रूरी है—उसे तुमनिर्दयी मान लेते हो। कितने भोले हैं हम—मुस्कान पर जीवन गिरवी रख देते हैं,दो मीठे झूठहमें काफ़ी लगते हैंप्यार मान

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