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बेकरार दिल तुझे हुआ क्या
अपना प्यारा बीटीआई
हर शाम सुबह होने का देती है पैगाम।
एक पेड़ की दो शाखाएं
आती है खुशियां थोक में
घर के कितने मालिक -मनीभाई नवरत्न
मेरा मन लगा रामराज पाने को /मनीभाई नवरत्न
मैं उड़ता पतंग मुझे खींचे कोई डोर
सिमटी हुई कली/मनीभाई नवरत्न
बिछोह पर कविता- मनीभाई
10 दिसम्बर विश्व मानवाधिकार दिवस पर विशेष लेख
6 दिसंबर स्वयंसेवक दिवस पर विशेष लेख
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