देह मुक्ति पर वीटो लगाएगी
हिंदी कवितादेह मुक्ति पर वीटो लगाएगी जैसा हैवैसा मत छोड़ दो।धारा के साथ मत बहो। समयतुम्हें नहीं बदलेगा।अनुभवतुम्हें नहीं जगाएगा। चालीस हज़ार साल भीजी लो—तो भीकुछ अपने आपनहीं बदलेगा। हमसुख के इच्छुक हैं,परिश्रम से बचने वाले। किसी को काम कराना होतोइनाम देना पड़ता है।काम न कराना होतोकुछ मत करो। जड़ताहमारीस्वाभाविक सुविधा है। मुक्तिसबसे ऊँची उपलब्धि है—औरसबसे
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