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काँटों पर चलना सीखे – मनीभाई नवरतन
प्रायश्चित- मनीभाई नवरत्न
हाय यह क्या हो गया?- मनीभाई नवरत्न
ये तो बस मूर्खों की पीढ़ी बनायेगा
बेखुदी की जिंदगी- मनीभाई नवरत्न
मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न
हे दीन दयालु हे दीनानाथ- मनीभाई नवरत्न
मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न
तुम तो लूटोगे ही प्यारे,लुटेरों की बस्ती में
मनीभाई के पिरामिड रचना
मन की आंखें
आ सनम आ मेरे दिल में तू आ
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