अधूरापन का उद्योग”
हिंदी कविता“अधूरापन का उद्योग” तुमसे कहा गया—तुम पूरे नहीं हो। इसलिएतुम दौड़े—डिग्रियों के पीछे,पदोन्नतियों के पीछे,रिश्तों,सामानों,सपनों के पीछे। एक खाली जगह भरने,जो शायदकभी थी ही नहीं। इसेप्रेरणा कहा गया। पर यहडर पर पलती है,तुलना पर जीती है,शर्म से बिकती है। पहलेतुम्हें तोड़ा गया,फिरमरहम बेचा गया। कहा गया—देखोफलाँ का बेटा। कहा गया—आदमी के बिनातुम कुछ नहीं। कहा
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