मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

अधूरापन का उद्योग”

हिंदी कविता

“अधूरापन का उद्योग” तुमसे कहा गया—तुम पूरे नहीं हो। इसलिएतुम दौड़े—डिग्रियों के पीछे,पदोन्नतियों के पीछे,रिश्तों,सामानों,सपनों के पीछे। एक खाली जगह भरने,जो शायदकभी थी ही नहीं। इसेप्रेरणा कहा गया। पर यहडर पर पलती है,तुलना पर जीती है,शर्म से बिकती है। पहलेतुम्हें तोड़ा गया,फिरमरहम बेचा गया। कहा गया—देखोफलाँ का बेटा। कहा गया—आदमी के बिनातुम कुछ नहीं। कहा

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माता-पिता, पहले स्वयं को उठाओ

हिंदी कविता

“माता-पिता, पहले स्वयं को उठाओ” बच्चे को सँवारने से पहलेखुद को सँभालो। क्योंकिबच्चातुम्हारे उपदेश से नहीं,तुम्हारी स्थिति सेसीखता है। यदि घर मेंजाग्रत माँ है,जाग्रत पिता है—तोबच्चे के डरबिना समझाएघुल जाते हैं। तुम्हारी उपस्थितिपाठ बन जाती है। पहला कर्तव्यबच्चे को ठीक करना नहीं,खुद कोजगाना है। क्योंकिघायल मनकेवलघाव हीदे सकता है। तुमप्रेम का अभिनय कर सकते हो,परअचेतनहर

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पवित्र आठ-चरणीय आत्महत्या

हिंदी कविता

“पवित्र आठ-चरणीय आत्महत्या” तुम भटके नहीं हो—तुम राजमार्ग पर हो।चमकदार,चौड़ा,सुरक्षित।और यहीख़तरा है। जन्म,पढ़ाई,नौकरी,शादी,घर,गाड़ी,बच्चे,झगड़े,थकान,मृत्यु। जीवन नहीं—कन्वेयर बेल्ट। इसेपवित्र कहा गया।क्योंकिसब यही करते हैं। और जोसब करते हैं,उसेकौन सवाल करता है? हम आधे रास्ते पर हैं,फिर भीकहते हैं—“मेरा जीवन अलग है।” अलग कैसे?सड़क वही,ईंधन वही,भीड़ वही। पर उम्मीद—कि मंज़िलअद्भुत होगी। अरबों लोगइसी राह से गुज़रे,सम्मानजनक निराशा मेंडूबे।

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घाव इकट्ठा करना बंद करो

हिंदी कविता

घाव इकट्ठा करना बंद करो कोई तुम्हेंअंदर से चोट नहीं पहुँचा सकताजब तक तुमउसे अनुमति न दो। लोग चोट पहुँचा सकते हैं,पर नुकसान उतना नहींजितना तुमउसे सीने से लगाकरखुद कर लेते हो। घटना बाहर घटती है,पर तुम उसेपहचान बना लेते हो।यही असली हिंसा है। दुनिया दरवाज़ा खटखटाती है—खरोंचती है,धक्का देती है—पर केंद्र तकवह नहीं पहुँच

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अतीत ही वर्तमान है

हिंदी कविता

अतीत ही वर्तमान है अतीतपीछे नहीं रहता—यदि तुमने उससेसीखा नहीं। वह भविष्य बनकरलौट आता है,नए कपड़ों में,नए नाम से। लोग कहते हैं—भूल जाओ।छोड़ दो।केवल वर्तमान में जियो। पर यह ज्ञान नहीं,यह पलायन है—स्वतंत्रता काभेष बदले डर। जिसे तुम“अभी” कहते हो,वह अक्सरबीते हुए काछलावा होता है। वर्तमानकोई नई ज़मीन नहीं—वह अतीत कीछाया है,जो आज परपड़ी हुई

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एक ही भूल सौ बार

हिंदी कविता

एक ही भूल सौ बार क्या सच मेंकोई नई भूल होती है? ध्यान से देखो—जो आज तुम्हें गिरा रहा है,वही तोपाँच साल पहले भीतुम्हें हराकर गया था। नाम बदल गए,चेहरे बदल गए,परप्रवृत्ति?वह वहीं की वहीं है। गिरने की जगह बदली,समय बदला,बहाना बदला—पर गिरनाक्या कभी बदला? तुम कहते हो—इस बार अलग है।पर क्या सच में?या फिरपुराना

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जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो?

हिंदी कविता

जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो? हर जीतसफलता नहीं होती।अगर लक्ष्य ही मूर्खतापूर्ण हो,तो तेज़ी से पहुँचना भीकोई गौरव नहीं। भीड़ को खुश करने के लिएदौड़ना,अंधी चाह के पीछेभागना—यह कर्म नहीं,भटकाव है। पहले जानो—तुम कौन हो,और तुम्हें सच में चाहिए क्या। क्योंकिगलत युद्ध में मिली जीतहार से भी बदतर होती है। यह मत

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सुख से परे

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सुख से परे जीवन का उद्देश्यसुख नहीं है,सुख पाने कीबेचैनी से मुक्ति है। पैसा?सफलता?खुशी?इतने छोटे लक्ष्यइतने विशाल जीवन के लिए—कितनी अजीब सौदेबाज़ी। जिस सुख कोतुम जानते हो,वह सिखाया गया है,पालित है,क्षणिक उत्तेजना कानाम बदल दिया गया है। और वहदुख के बिनाजी ही नहीं सकता। सुख चाहिएतो पहले दुख चाहिए—गहरा सुख चाहिएतो गहरा दुख चाहिए।यही हैखुशी

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पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो

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पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो भूख पेट में नहीं,मन में रहती है।अंधी, बेचैन,कभी न भरने वाली—और उसी नेसब कुछ खा लिया। तुम गलत जीकरसही उपभोग कीआशा कैसे करते हो? धरती से रिश्तातुम्हारे जीवन जैसा है—टूटा हुआ,अचेत,लालची। सही जीवनकिसी नीति से नहीं,जागरूकता से शुरू होता है। जीवित होनासचेत होना है।और सचेत होनाखुद को जानना

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इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो

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इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो इच्छा अपराध नहीं है।आकर्षण पतन नहीं है।गलती चाहने में नहीं,गलती उस दिशा में हैजहाँ तुम चाह रहे हो। इच्छा आग है—उसी आग सेदीपक जलता है,उसी से घर भी जलते हैं। समस्या यह नहींकि तुम दौड़ते हो,समस्या यह हैकि तुम किसके पीछे दौड़ते हो। तुम मृगमरीचिका सेप्यास बुझाना चाहते हो,छाया

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पूर्णता नहीं, निरंतरता

हिंदी कविता

पूर्णता नहीं, निरंतरता पूर्ण होना लक्ष्य नहीं,खड़ा रहना लक्ष्य है।गिरकर भीपीठ न दिखाना—यही जीवन है। लड़ाई शुरू करने से पहलेइतना जान लो—क्या मूल्यवान है,और किसके लिएतुम हार स्वीकार नहीं करोगे। सौ बार गिरो,सही दिशा में गिरो।कीमत चुकानी पड़े—तो चुकाओ।गहराई सस्ती नहीं होती। आसानी मत माँगो।तालियाँ मत चाहो।ईमानदारी का रास्ताआराम के लिए नहीं होता। जब वार

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स्वयं को पराजित करो

हिंदी कविता

स्वयं को पराजित करो सबसे बड़ा युद्धकिसी और से नहीं—अपने ही भीतर है। इच्छाएँ हैं,हितों पर खतरे हैं,जीवनलगातार चुनौती है—और हाँ,उसी में आनंद भी छिपा है। हम हारते हैंऔर चकित रह जाते हैं—मैं क्यों नहीं जीत पा रहा?क्यों हर बारखुद से हीपीछे रह जाता हूँ? ध्यान से देखो—हार बाहर से नहीं आती।वह भीतर जन्म लेती

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