मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

मनीलाल पटेल की लघु कविता

हिंदी कविता

मनीलाल पटेल की लघु कविता किसके बादल? स्वप्न घरौंदे तोड़के उमड़ता, घुमड़ता ।। बिना रथ के नभ में ये घन किसे लड़ता? नगाड़े ,आतिशबाजी नभ गर्जन है शोर । सरपट ही जा रहा किसके हाथों में डोर? भीग रहे, कच्ची ईंटें पकी धान की फसल किसान का ये नहीं तो, भला किसके बादल? मनीभाई नवरत्न, […]

मनीलाल पटेल की लघु कविता Read More »

मनीभाई नवरत्न की रोमांचित गीत

हिंदी कविता

मनीभाई नवरत्न की रोमांचित गीत प्यार मेरा तेरे लिए… प्यार मेरा तेरे लिए, तेरे लिए मेरा प्यार ।सबसे जुदा हसीन सबसे जुदा ।तुझ पर जानिसार ।तुझ पर जानिसार . मेरे यार मेरे यार. कदमों में तेरी पलके बिछा दूं।तू जो कहे तो खुद को सजा दूं ।मिट जाऊ तेरे लिएआजमा ले हू तैयार।तुझ पर जानिसार

मनीभाई नवरत्न की रोमांचित गीत Read More »

सावित्रीबाई फुले जयंती पर विशेष कविता – नारी शिक्षा की ज्योति

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

प्रतिवर्ष 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले का जयंती मनाया जाता हैं . यहाँ सावित्रीबाई फुले पर कविता दी जा रही हैं, आपको कैसी लगी सन्देश लिखकर भेजें . 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें समर्पित कविता। नारी शिक्षा की पथप्रदर्शक और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित विशेष काव्य।

सावित्रीबाई फुले जयंती पर विशेष कविता – नारी शिक्षा की ज्योति Read More »

manibhai Navratna

मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 50 कवितायेँ (खंड १)

समाज और यथार्थ

यहाँ पर मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 50 कवितायेँ एक साथ दिए जा रहे हैं आपको कौन सी कविता अच्छी लगी हो ,कमेंट कर जरुर बताएँगे. कविता 1 क्यों टोकाटाँकी करते हैं ? बच्चे अपने मन से जब जब   कुछ    नया    करते है।       असफलता भय से,              बुजुर्ग उन्हे,                  क्यों ?       टोकाटाँकी करते हैं।                 जिस              

मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 50 कवितायेँ (खंड १) Read More »

manibhai Navratna

मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 10 कवितायेँ (खंड २)

समाज और यथार्थ

यहाँ पर मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 10 कवितायेँ एक साथ दिए जा रहे हैं आपको कौन सी कविता अच्छी लगी हो ,कमेंट कर जरुर बताएँगे. हिंदी कविता 1 आगे बढ़ो आगे बढ़ो , आगे बढ़ो ,पीछे ना हटो तुम ।रख के खुद से भरोसा,मुश्किलों से निपटो तुम। उबड़ खाबड़ है तेरी राह ।मंजिल

मनीलाल पटेल उर्फ़ मनीभाई नवरत्न की 10 कवितायेँ (खंड २) Read More »

विश्व एड्स दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

विश्व एड्स दिवस पर लेख   एड्स एक लाइलाज बीमारी है, जिसके फैलने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध  है,  इस बीमारी से असल में बचाव सिर्फ सुरक्षा में निहित है। एचआईवी/ एड्स से ग्रसित लोगों की मदद करने के लिए धन जुटाना, लोगों में एड्स को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना और एड्स से जुड़े

विश्व एड्स दिवस पर कविता Read More »

मनीभाई नवरत्न के हिंदी में चोंका

नारी जीवन और संवेदना

यहाँ पर हम आपको मनीभाई नवरत्न के हिंदी में चोंका प्रस्तुत कर रहे हैं यदि आपको पसंद आई हो या कोई सुझाव हो तो नीचे कमेंट जरुर करें हिंदी में चोंका इसे भी पढ़ें :- चोका कैसे लिखें(How to write Choka ) चोका :- शीत प्रकोप धुंधला भोरकुंहरा चहुं ओरकुछ तो जलाजाने क्या हुई बलाक्या

मनीभाई नवरत्न के हिंदी में चोंका Read More »

खुद को है -मनीभाई ‘नवरत्न’

हिंदी कविता

यहाँ पर मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित खुद को है आप पढ़ेंगे आशा आपको यह पसंद आएगी खुद पर कविता -मनीभाई ‘नवरत्न’ खुद को है जिन्दगी के हरेक  दंगल में …लड़ना खुद को है।   भिड़ना खुद को है।  टुटना खुद को है।  जुड़ना खुद को है। ये वक्त,बेवक्त माँगती हैं कुर्बानियाँ…  बिखरना खुद को है।  सिसकना

खुद को है -मनीभाई ‘नवरत्न’ Read More »

मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न मशाल की मंजिल :-रचनाकार:- मनीभाई नवरत्नरचनाकाल :- 16 नवम्बर 2020 ज्ञानसतत विकासशीललगनशील,है जिद्दी वैज्ञानिक Iवह पीढ़ी दर पीढ़ीबढ़ा रहा अपना आकार Iवह कल्पना करतासिद्धांत बनाता स्वयंमेवउसकी प्रयोगशाला ये दुनिया।हम क्या ?बोतल में भरी रसायनया फिर बिखरी हुई मॉडलदीवाल में झूलता हुआ,कंकाल तंत्र सदृश। वो हमें परखता,देखता।हम पर घटित प्रतिक्रियाओं

मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न Read More »

अब नहीं सजाऊंगा मेला

हिंदी कविता

अब नहीं सजाऊंगा मेला अक्सर खुद कोसाबित करने के लिएहोना पड़ता है सामने . मुलजिम की भांति दलील पर दलील देनी पड़ती है . फिर भी सामने खड़ा व्यक्तिवही सुनता है ,जो वह सुनना चाहता है .हम उसके अभेद कानों के पार जाना चाहते हैं .उतर जाना चाहते हैंउसके मस्तिष्क पटल पर बजाय ये सोचे

अब नहीं सजाऊंगा मेला Read More »

तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता नशा मत करना,नशा है मृत्य समान,तम्बाकू ने ली असमय मानव जान। शौक- शौक में तम्बाकू खाने लगा अनजान,शरीर खोखला करने लगा,मन मंदिर हुआ वीरान। धीरे धीरे सामने आए,तम्बाकू के दुष्परिणाम,डॉक्टर के पास जाना पड़ा,हुआ गलती का भान। फिर कसम खाई मैंने,छोड़ दिया नशे का साथ,तम्बाकू मुक्त हो गया,मेरा भारत महान।।

तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता Read More »

Scroll to Top