मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

सही कर्म का आनंद

हिंदी कविता

सही कर्म का आनंद सही विकल्प चुनो,सही निर्णय लो,सही युद्ध लड़ो—अबजीत-हारमहत्वहीन है। क्योंकिजहाँ तुम्हें खड़ा होना था,तुमवहीं खड़े हो। विजयबाहर की ट्रॉफी नहीं,वहभीतर की स्पष्टता है—अपने सबसे सचेतस्वरूप सेमेल। जब निर्णय स्वच्छ हो,जब चयनअंदर से न्यायपूर्ण हो,तो परिणामकेंद्र में नहीं रहता। महत्व बस इतना है—तुमनेपीठ नहीं फेरी। पूरी ताक़त सेजो क्षण माँगे,उसे दो।कुछ बचाकर मत

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असंभव ही निमंत्रण है

हिंदी कविता

असंभव ही निमंत्रण है जब करने योग्य मेंपूरा डूबे हो,तोनिराशा के लिएजगह कहाँ बचती है? अगर हर रेशाइस क्षण की माँग मेंलगा है,तोदुख रचने कासमय किसे है? स्थिति जितनीभारी होती है,उतनी हीनाटकीयता कीगुंजाइशघट जाती है। जब शत्रुदो हज़ार गुना हों,तो क्याकोने में बैठकररोने कीफुर्सत मिलती है? कुचली हुई परिस्थितिशोक का निमंत्रण नहीं—वहकर्म का आदेश है।

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उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो

हिंदी कविता

उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो जिस काम कोतुम्हेंखुद के लिएकरना था,उसे टाल दिया—और अबकिसी और सेउसी कमी कीभरपाई चाहते हो। स्पष्टता,समृद्धि,और जीवन मेंअर्थ लाने कीमूल जिम्मेदारीकेवलतुम्हारी है। कोई औरइसके लिएजन्मा नहीं है। हाँ,कोई चाहे तोसहयोग दे सकता है—स्वेच्छा से।परयह उसका कर्तव्य नहीं। औरयदि वहतुम्हारी अपेक्षाएँन उठाए,तोतुम्हेंठगा हुआमहसूस करने काकोई अधिकार नहीं। सच सरल है—तुम्हारा जीवन,तुम्हारी

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लड़ने योग्य युद्ध

हिंदी कविता

लड़ने योग्य युद्ध सच मानो—ज़िंदगी का बड़ा हिस्साहमनेफालतू लड़ाइयों मेंगँवा दिया। ऐसी चीज़ों परजिन्हें हारने काकोई अर्थ नहीं था,और जीतने काकोई मूल्य नहीं। इसलिएन साहस जगा,न संकल्प,न भीतर कीकोई शक्ति। फिरअचानकएक असली युद्ध सामने आता है—भारी,अर्थपूर्ण,डराने वाला। यहीअनुग्रह है। अनुग्रहआराम बनकर नहीं आता,वहचुनौती बनकर आता है। पुराना तुमकमज़ोर है,भागना चाहता है—“क्यों मुसीबत मोल लूँ?”“क्यों यह

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जीवन के योग्य कर्म

हिंदी कविता

जीवन के योग्य कर्म किसी काम के लिए जियोजिसके लिएमरने का साहसरख सको। यहीतुम्हारा पेशा हो। क्योंकिकामसिर्फ़ रोज़ी नहीं,वहतुम्हारे जीवन कासबसे बड़ा हिस्सा है। जागते समय काअधिकांश भागतुमउसी मेंखपा दोगे। तो पूछो—इस एक जीवन केइतने समय के साथक्या करनासार्थक है? अधिकांश लोगगलत कारणों सेकाम चुन लेते हैं—सुरक्षा,परंपरा,दबाव,संयोग। फिरऊब,कड़वाहट,चिड़चिड़ापनउनका स्वभावबन जाता है। काम की गुणवत्तातनख़्वाह से

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डूबे हो या खोए हुए?

हिंदी कविता

डूबना या खो जाना (अतुकांत कविता) जब सार्थक में डूबते हो,तो फालतू बातेंदरवाज़े पर दस्तक देती हैं,पर भीतर कोई नहीं मिलता—वे लौट जाती हैं,अपमानित, उपेक्षित। सार्थक डूबानमन को इतना भर देता हैकि रिक्तता को जगह नहीं मिलती।ध्यान इतना गहरा होता हैकि तुच्छ आकर्षणकेवल मच्छर-सी भनभनाहट बनकर रह जाते हैं। पर सावधान!हर डूबना साधना नहीं होता।कुछ

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समस्या तकनीक नहीं, तुम हो

हिंदी कविता

“समस्या तकनीक नहीं, तुम हो” तकनीकन निर्दोष है,न अपराधी—वहबस औज़ार है। विनाशखरीदने वाले में है। अंधा उपभोगधरती को नहीं,पहलेमन कोखोखला करता है। और जब तकउपभोक्ताजागता नहीं,खपतरुक नहीं सकती। उपभोक्तासिर्फ़पैसा रखने वाला नहीं,उपभोक्ताअहंकार है—जोखुद को भरनेनिकला है। कानूनप्रगति कोनहीं रोक सकते। जिज्ञासामानव स्वभाव है—हमआगे बढ़ेंगे,खोजेंगे,तोड़ेंगे,बनाएँगे। यह ठीक है। गलती यह हैकि हमारी जिज्ञासाबाहर जाती है,भीतर नहीं।

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अच्छी आध्यात्मिकता ही अच्छी अर्थव्यवस्था है

हिंदी कविता

“अच्छी आध्यात्मिकता ही अच्छी अर्थव्यवस्था है” किसी वस्तु की क़ीमतउसके दाम से नहीं,उस असर से तय होती हैजो वहमन पर छोड़ती है। हम बाहर की चीज़ों सेभीतर की तृप्तिखोजते हैं। पर जबआत्म-बोध नहीं होता,तोमूल्य और मूल्यांकनअलग हो जाते हैं। यहीं सेव्यक्तिगत दुखऔरसामूहिक बर्बादीशुरू होती है। अर्थव्यवस्थाआख़िर है किसके लिए?मनुष्य के लिए। और मनुष्य का कल्याणक्या

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बलात्कार जहाँ सच में शुरू होता है

हिंदी कविता

“बलात्कार जहाँ सच में शुरू होता है” बलात्कारकोई अचानक घटितदुर्घटना नहीं,वहधीरे-धीरे पनपताहुआअंतिम विस्फोट है। यह तब शुरू होता हैजब दुनियाभोग की वस्तुबन जाती है। जब प्रगति का अर्थऔर ज़्यादा लेना,और ज़्यादा तोड़ना,और ज़्यादा जीतनाहो जाता है। छूने से पहलेकभी पूछा—इस स्पर्श मेंप्रेम है,यास्वार्थ? अगर स्पर्शसिर्फ़लेने के लिए है,तोशोषण दूर नहीं। रेखाबहुत पतली है। बलात्कारघर में

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जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो?

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जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो? हर जीतसफलता नहीं होती।अगर लक्ष्य ही मूर्खतापूर्ण हो,तो तेज़ी से पहुँचना भीकोई गौरव नहीं। भीड़ को खुश करने के लिएदौड़ना,अंधी चाह के पीछेभागना—यह कर्म नहीं,भटकाव है। पहले जानो—तुम कौन हो,और तुम्हें सच में चाहिए क्या। क्योंकिगलत युद्ध में मिली जीतहार से भी बदतर होती है। यह मत

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पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो

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पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो भूख पेट में नहीं,मन में रहती है।अंधी, बेचैन,कभी न भरने वाली—और उसी नेसब कुछ खा लिया। तुम गलत जीकरसही उपभोग कीआशा कैसे करते हो? धरती से रिश्तातुम्हारे जीवन जैसा है—टूटा हुआ,अचेत,लालची। सही जीवनकिसी नीति से नहीं,जागरूकता से शुरू होता है। जीवित होनासचेत होना है।और सचेत होनाखुद को जानना

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इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो

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इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो इच्छा अपराध नहीं है।आकर्षण पतन नहीं है।गलती चाहने में नहीं,गलती उस दिशा में हैजहाँ तुम चाह रहे हो। इच्छा आग है—उसी आग सेदीपक जलता है,उसी से घर भी जलते हैं। समस्या यह नहींकि तुम दौड़ते हो,समस्या यह हैकि तुम किसके पीछे दौड़ते हो। तुम मृगमरीचिका सेप्यास बुझाना चाहते हो,छाया

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