मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

ऐसो के भादों अंधियारी म पोला मनाबो

हिंदी कविता

ऐसो के भादों अंधियारी म पोला मनाबो गीतकार: मनीभाई नवरत्न बैंइला के सींग म, बैईला के खूर म तेल लगाबो । फेर वोला नवा झालर ओढ़ाबो ।ऐसो के भादों अंधियारी म पोला मनाबो। भोला के बैइला के बंदन करले ।जाता म चूल्हा म चंदन रंग ले ।ओमा ठेठरी खुरमी के भोग लगा ले । चलव […]

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चोका कैसे लिखें (How to write Choka )

हिंदी कविता

चोका कैसे लिखें शिल्प की दृष्टि से चोका की पंक्तियों में क्रमशः 5 और 7 वर्णों की आवृत्ति होती है तथा अंतिम पाँच पंक्तियों में 5,7,5,7,7 वर्णक्रम अर्थात एक ताँका के क्रम से कविता पूर्ण होती है । कविता की लंबाई की सीमा रचनाकार की भाव पूर्णता पर निर्भर  रहती है  । या यूँ कहें

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आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न ऐ दीदी ओ,  ऐ बहिनी ओ।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। सावन भादों सुख के देवय्या।झमाझम बादर चले पुरवय्या।।डारा पाना ह सबो हरियागे।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। झूलेना बने हे  सुग्घर पटनी।धरे रहव जी दवरा के गठनी।ठेठरी खुरमी अउ खारा कटनी।भजिया सुहाथे लहसून के चटनी।नोनी बाबू ऐदे खाये

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भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान। लाली चौकी फबेहे, सुग्घर भुइयां भित्ति।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।आसन बिराजे हे, भोलेबाबा पारबती।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि। सोला

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मनीभाई नवरत्न की हिंदी कवितायें

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

मनीभाई नवरत्न की हिंदी कवितायें मनीभाई नवरत्न के कविता मौत मौत क्या है ?जलती लौ का बुझ जाना।या राख हो मिट्टी में मिलना । बड़ी भयानक है ना मौत ?यह सोच ही रूह कांप उठती,कि सभी को न्योता मिलेगामौत का ,एक दिन । मौत से इतना डर क्यों ?क्या कोई इसे जानता ?एकदम करीब से

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बहुत छोटे बच्चों के लिए कविता कैसी हो?

मन और भावनाएँ

छोटे बच्चों के लिए कविता बहुत छोटे बच्चों के लिए मनोरंजक कविता लिख लेना बड़े बच्चों के लिए कविता लिखने की अपेक्षा कहीं अधिक कठिन है। छोटे बच्चों का स्वभाव इतना चंचल और मनोभावनाएँ इतनी उलझी हुई होती हैं कि बड़े उन्हें प्रायः आसानी से समझ भी नहीं पाते। उन उलझी हुई भावनाओं में रमकर

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मनीभाई नवरत्न की १० कवितायेँ

प्रकृति और पर्यावरण

हाय रे! मेरे गाँवों का देश -मनीभाई नवरत्न हाय रे ! मेरे गांवों का देश ।बदल गया तेरा वेश। सूख गई कुओं की मीठी जल ।प्यासी हो गई हमारी भूतल ।थम गई पनिहारों की हलचल ।क्या यही था विकास का पहल ?क्या यही है अपना प्रोग्रेस ?हाय रे! मेरे गांवों का देश । भूमि बनती

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जनचेतना दिवश पर कविता

समाज और यथार्थ,

करोना काल में लोग किस तरह से परेशान हुए जनता की वेदना को महसूस किया गया और उसको कविता के रूप में लिखा गया है यह मौलिक अप्रक्षित रचना मेरे द्वारा लिखी गयी है |

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जीवन पर कविता – सुधा शर्मा

हिंदी कविता

जीवन में रंग भरने दो – सुधा शर्मा कैसे हो जाता है मन  ऐसी क्रूरता करने को? अपना ही लहू बहा रहे जाने किस सुख वरणे को ? आधुनिक प्रवाह में बहे चाहें जीवन सुख गहे  वासनाओं के ज्वार में यूंअचेतन उमंगित रहे अंश कोख में आते हीविवश क्यों करते मरने को? अंश तुम्हारे शोणित

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तू रोना सीख – निमाई प्रधान

हिंदी कविता

तू रोना सीख – निमाई प्रधान तू !रोना सीख । अपनी कुंठाओं कोबहा दे…शांति की जलधि मेंअपनी महत्त्वाकांक्षाओं कोतू खोना सीख ।तू ! रोना सीख ।। कितने तुझसे रूठे ?तेरी बेरुख़ी से…कितनों के दिल टूटे ?किनके भरोसे पर खरा न उतर सका तू ?तेरे ‘मैं’ ने किनको शर्म की धूल चटा दी?कौन तेरी मौजूदगी में

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बेताज बादशाह – वन्दना शर्मा

हिंदी कविता

बेताज बादशाह – वन्दना शर्मा आज देखा मैंने ऐसा हरा भरा साम्राज्य…धन धान्य से भरपूर….सोना उगलते खेत खलियान…कल कल बहती नदियाँ….. चारों ओर शांति,सुख, समृद्धि…और वहीं देखा ऐसा बेताज बादशाह….जो अपने हरएक प्रजाजन को..परोस रहा था अपने हाथ से भोजन पानी.. अपने साम्राज्य के विस्तार में..हर कोने की खबर है उसको..कौन बीमार है, किसको कितनी

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मनीभाई के प्रेम कविता

हिंदी कविता

मनीभाई के प्रेम कविता दुख की घड़ियां है दो पल की दुख की घड़ियां है ,दो पल की।फिर क्यों तेरी ,आंखें छलकी ।।याद ना कर ,बातें कल की ….जाने जां  …जाने जां …जानेजां …जानेजां… माना दौर है , मुश्किल की ।आदत नहीं तेरी ,महफिल की ।मुस्कुरा तो जरा ,ख्वाहिश है दिल की….जाने जां  …जाने जां

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