मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता संस्कारों में जकड़ामनप्रेम कोजान ही नहीं सकता। “मैं तुम्हेंहमेशा प्रेम करूँगा”—अक्सरइसका अर्थ होता है:जब तकतुम मुझेसुख देते रहो। जिसेहम प्रेम कहते हैं,वहअक्सरशर्तों कागठ्ठर होता है—औरवहउसी समय तकज़िंदा रहता हैजब तकपरिस्थितियाँअनुकूल रहती हैं। सुनकरचुभता है न? सदियों सेतारे गवाह रहे हैं—हाथों में हाथ,आँखों में सपने,आवाज़,शरीर,रंग,आकृति सेमोहितलोगों नेअनंतता कीकसम खाई। औरफिरइतना

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The Stainless Mind

हिंदी कविता

The Stainless Mind प्रतिक्रिया नहीं—सचेत उत्तर चाहिए,जहाँ मन उछलता नहीं,ठहरकर देखता है। उकसावे से नहीं,स्पष्टता से जन्मे कर्म—तीव्र हों, सुंदर हों,पर मजबूरी से नहीं। जो तुरंत भड़कता है,वह अपना नहीं रहता,उसके कर्मदूसरों की चिंगारियों कीउधार ली हुई आग होते हैं। घाव, घाव को जवाब देता है—यही तो कैद है,न मौलिकता,न स्वतंत्रता। मन भी एक पात्र

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उधार की रोशनी के पार

समाज और यथार्थ

उधार की रोशनी के पार(Beyond Borrowed Light)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) सबसे गहरी जिज्ञासाकठोर प्रश्न से शुरू होती है—औरविनम्र मौन मेंसमाप्त होती है। हम जाँचते नहीं,मान लेते हैं।किसी पुराने धर्माचार्य ने कहा—तो सच होगा।किसी अमीर,किसी सत्ता-शिखर,किसी प्रसिद्ध चेहरे ने बोला—तो सही ही होगा। घर की परंपरा है,समाज की रीति है—इसलिएहम झुक जाते हैं। पर क्याहम

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दूसरा जन्म

मन और भावनाएँ

दूसरा जन्म मनुष्यजन्म से नहीं बनता।मनुष्यबनना पड़ता है। गर्भ से निकलनापर्याप्त नहीं,देह मिल जानामानव होना नहीं है। मानवताकोई जैविक उपहार नहीं,यहएक संभावना है—जिसेजगाना पड़ता है। जन्म के साथहम शुद्ध नहीं आते,हम साथ लाते हैं—अज्ञान,लोभ,वासना,भय,ईर्ष्या। हम इनसे ऊपर नहीं,इन्हीं के भीतरपैदा होते हैं। यदि कुछ नहीं बदला,यदि भीतरक्रांति नहीं हुई,तो जीवनकेवलदेह की पटकथा बन जाता है—भूख

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डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति

हिंदी कविता

डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति जिस दिनतुम सच में परिपक्व हो जाओगे,डेडलाइनखुद गिर जाएगी।काम होगा—क्योंकि होना है। पर जब तकवह दिन नहीं आया,डेडलाइन सेनफ़रत मत करो।उसे अपनाओ। डेडलाइनदंड नहीं है—आईना है।वह बताती है:अभी भीतरस्पष्टता पूरी नहीं है। ईमानदारी से कहो—“अगर प्रेम होता,तो आदेश की ज़रूरत नहीं पड़ती।” डेडलाइन इसलिए हैक्योंकिबिना उसकेहम टालते हैं,भागते हैं,सोते

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पिंजरा बाहर नहीं था

हिंदी कविता

पिंजरा बाहर नहीं था तुम पक्षी हो।उड़ना तुम्हारा स्वभाव है।उड़ना सीखना नहीं पड़ता—सिर्फ़मुक्त होना पड़ता है। फिर भीहम अजीब हैं। हमदरवाज़ा खोलने के बजायपिंजरे के भीतरपंख फड़फड़ाने काअभ्यास कराते हैं।और उसेआध्यात्मिक साधनाकह देते हैं। यह किसे धोखा देना है? पक्षी कोकिसी प्रशिक्षण कीज़रूरत नहीं।उसे चाहिए—आकाश।खुली जगह। ठीक वैसे हीतुम्हेंकुछ हासिल नहीं करना है।तुम्हेंसिर्फ़जो झूठ हैउसे

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रोज़ की जीत

हिंदी कविता

रोज़ की जीत महान होनाअतिमानव होना नहीं है।महान होनाअपनी सीमा सेएक क़दम आगे जाना है। जीनायुद्ध में होना है—हर दिन,हर पल। अंतिम विजय परमत अटको।अगर वह आई,तो वहउपहार होगी—लक्ष्य नहीं। असल मायने रखते हैंआज के युद्ध—छोटे,शांत,अदृश्य। रात को सोओयोद्धा बनकर।सुबह उठोयुद्ध जानते हुए। बिना लड़ेकभी मत थको।ईमानदार संघर्ष कीथकान—यही जीत है। दुनिया की तालियाँज़रूरी नहीं।अपनी

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सही कर्म का आनंद

हिंदी कविता

सही कर्म का आनंद सही विकल्प चुनो,सही निर्णय लो,सही युद्ध लड़ो—अबजीत-हारमहत्वहीन है। क्योंकिजहाँ तुम्हें खड़ा होना था,तुमवहीं खड़े हो। विजयबाहर की ट्रॉफी नहीं,वहभीतर की स्पष्टता है—अपने सबसे सचेतस्वरूप सेमेल। जब निर्णय स्वच्छ हो,जब चयनअंदर से न्यायपूर्ण हो,तो परिणामकेंद्र में नहीं रहता। महत्व बस इतना है—तुमनेपीठ नहीं फेरी। पूरी ताक़त सेजो क्षण माँगे,उसे दो।कुछ बचाकर मत

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असंभव ही निमंत्रण है

हिंदी कविता

असंभव ही निमंत्रण है जब करने योग्य मेंपूरा डूबे हो,तोनिराशा के लिएजगह कहाँ बचती है? अगर हर रेशाइस क्षण की माँग मेंलगा है,तोदुख रचने कासमय किसे है? स्थिति जितनीभारी होती है,उतनी हीनाटकीयता कीगुंजाइशघट जाती है। जब शत्रुदो हज़ार गुना हों,तो क्याकोने में बैठकररोने कीफुर्सत मिलती है? कुचली हुई परिस्थितिशोक का निमंत्रण नहीं—वहकर्म का आदेश है।

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लड़ने योग्य युद्ध

हिंदी कविता

लड़ने योग्य युद्ध सच मानो—ज़िंदगी का बड़ा हिस्साहमनेफालतू लड़ाइयों मेंगँवा दिया। ऐसी चीज़ों परजिन्हें हारने काकोई अर्थ नहीं था,और जीतने काकोई मूल्य नहीं। इसलिएन साहस जगा,न संकल्प,न भीतर कीकोई शक्ति। फिरअचानकएक असली युद्ध सामने आता है—भारी,अर्थपूर्ण,डराने वाला। यहीअनुग्रह है। अनुग्रहआराम बनकर नहीं आता,वहचुनौती बनकर आता है। पुराना तुमकमज़ोर है,भागना चाहता है—“क्यों मुसीबत मोल लूँ?”“क्यों यह

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जीवन के योग्य कर्म

हिंदी कविता

जीवन के योग्य कर्म किसी काम के लिए जियोजिसके लिएमरने का साहसरख सको। यहीतुम्हारा पेशा हो। क्योंकिकामसिर्फ़ रोज़ी नहीं,वहतुम्हारे जीवन कासबसे बड़ा हिस्सा है। जागते समय काअधिकांश भागतुमउसी मेंखपा दोगे। तो पूछो—इस एक जीवन केइतने समय के साथक्या करनासार्थक है? अधिकांश लोगगलत कारणों सेकाम चुन लेते हैं—सुरक्षा,परंपरा,दबाव,संयोग। फिरऊब,कड़वाहट,चिड़चिड़ापनउनका स्वभावबन जाता है। काम की गुणवत्तातनख़्वाह से

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डूबे हो या खोए हुए?

हिंदी कविता

डूबना या खो जाना (अतुकांत कविता) जब सार्थक में डूबते हो,तो फालतू बातेंदरवाज़े पर दस्तक देती हैं,पर भीतर कोई नहीं मिलता—वे लौट जाती हैं,अपमानित, उपेक्षित। सार्थक डूबानमन को इतना भर देता हैकि रिक्तता को जगह नहीं मिलती।ध्यान इतना गहरा होता हैकि तुच्छ आकर्षणकेवल मच्छर-सी भनभनाहट बनकर रह जाते हैं। पर सावधान!हर डूबना साधना नहीं होता।कुछ

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