मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

इच्छा निवेश करती है, प्यार पोषण करता है।

हिंदी कविता

Desire Invests, Love Nurtures(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर कोईतुम्हारे जीवन मेंइसलिए हैकि वहतुम्हारी ज़रूरतें पूरी करे,तो वहाँ प्रेम नहीं—बसआसक्ति है,निर्भरता है,जकड़न है,और धीरे-धीरेपीड़ा है। ज़रूरत पर टिका रिश्ताअहिंसक नहीं हो सकता,वहएक सूक्ष्म हिंसा है—जहाँ देना नहीं,पाना मुख्य लक्ष्य होता है। अधिकतर लोगप्रेम कोइच्छा कासभ्य नाम दे देते हैं।और इच्छाहमेशा निवेश करती है—लाभ के लिए।

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प्यार जो आपको आज़ाद करता है

मन और भावनाएँ

Love That Sets You Free(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर किसी रिश्ते कोपरखना हो,अगर संगति कीगुणवत्ता जाननी हो—तोया तोसच की बात शुरू करो,याफालतू शोरबंद कर दो। खुद से पूछो—क्या यह प्रेम है?तो देखो,उस व्यक्ति की संगतितुम्हारे भीतरक्या जगाती है— उथल-पुथलयाशांति? क्या वहअपनी मौजूदगीमनवाना चाहता है,यातुम्हेंअपने पैरों परखड़ा करना चाहता है? क्या उसके पास रहकरअसुरक्षाऔर अधिकार-बोधबढ़ता

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ऊष्मा में टूटता प्रेम

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

ऊष्मा में टूटता प्रेम जो प्रेमरसायन की देन हैवह ताप माँगता है,निकटता का दबाव,परिस्थिति की अनुकूलता। थोड़ी-सी गर्मी,थोड़ा-सा आकर्षण,और दो अस्तित्वबंधन में बँध जाते हैं—जैसे हाइड्रोजनऑक्सीजन से मिलकरपानी बन जाए। देखने मेंदोनों विलीन हो गए,कुछ नया जन्मा।पर सत्य यह नहीं। वे गए नहीं,बस छिप गए।परिस्थिति बदली,बंधन टूटा,और दोनोंफिर अपने-अपने नाम सेखड़े हो गए। ऐसा ही

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कल्पना से परे प्रेम

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

कल्पना से परे प्रेम प्रेमकिसी को पकड़ने का नाम नहीं,प्रेम हैपकड़ने की जरूरत सेमुक्त हो जाना। जब सारी उम्मीदेंटूटकर गिर जाती हैं,जब यह साफ दिखने लगता हैकिअचेत मनुष्यों के बीचप्रेम संभव ही नहीं—तभीप्रेम की पहली संभावनाजन्म लेती है। यह समझ आना किजिसे हम प्रेम कहते रहे,वह प्रेम था ही नहीं—यहीजागरण की शुरुआत है। बहुत समय

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“जैसे हो, वैसे ही रहो?”

मन और भावनाएँ

“जैसे हो, वैसे ही रहो?” गलत के साथ रहने सेअकेला होनाकहीं बेहतर है। पूछो अपने मन से—जो तुम्हारे साथ है,वह तुम्हेंबल दे रहा हैयाधीरे-धीरेकमज़ोर बना रहा है? क्या वहतुम्हें मुक्त करता है,यादेखभाल के नाम परपिंजरे मेंढाल देता है? जो सीमाएँ खींचे,जो उड़ान से डरे,जो कहे—मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँऔर तुम्हेंछोटा बनाए रखे—वह न मित्र है,न

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The Stainless Mind

हिंदी कविता

The Stainless Mind प्रतिक्रिया नहीं—सचेत उत्तर चाहिए,जहाँ मन उछलता नहीं,ठहरकर देखता है। उकसावे से नहीं,स्पष्टता से जन्मे कर्म—तीव्र हों, सुंदर हों,पर मजबूरी से नहीं। जो तुरंत भड़कता है,वह अपना नहीं रहता,उसके कर्मदूसरों की चिंगारियों कीउधार ली हुई आग होते हैं। घाव, घाव को जवाब देता है—यही तो कैद है,न मौलिकता,न स्वतंत्रता। मन भी एक पात्र

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उधार की रोशनी के पार

समाज और यथार्थ

उधार की रोशनी के पार(Beyond Borrowed Light)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) सबसे गहरी जिज्ञासाकठोर प्रश्न से शुरू होती है—औरविनम्र मौन मेंसमाप्त होती है। हम जाँचते नहीं,मान लेते हैं।किसी पुराने धर्माचार्य ने कहा—तो सच होगा।किसी अमीर,किसी सत्ता-शिखर,किसी प्रसिद्ध चेहरे ने बोला—तो सही ही होगा। घर की परंपरा है,समाज की रीति है—इसलिएहम झुक जाते हैं। पर क्याहम

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डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति

हिंदी कविता

डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति जिस दिनतुम सच में परिपक्व हो जाओगे,डेडलाइनखुद गिर जाएगी।काम होगा—क्योंकि होना है। पर जब तकवह दिन नहीं आया,डेडलाइन सेनफ़रत मत करो।उसे अपनाओ। डेडलाइनदंड नहीं है—आईना है।वह बताती है:अभी भीतरस्पष्टता पूरी नहीं है। ईमानदारी से कहो—“अगर प्रेम होता,तो आदेश की ज़रूरत नहीं पड़ती।” डेडलाइन इसलिए हैक्योंकिबिना उसकेहम टालते हैं,भागते हैं,सोते

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रोज़ की जीत

हिंदी कविता

रोज़ की जीत महान होनाअतिमानव होना नहीं है।महान होनाअपनी सीमा सेएक क़दम आगे जाना है। जीनायुद्ध में होना है—हर दिन,हर पल। अंतिम विजय परमत अटको।अगर वह आई,तो वहउपहार होगी—लक्ष्य नहीं। असल मायने रखते हैंआज के युद्ध—छोटे,शांत,अदृश्य। रात को सोओयोद्धा बनकर।सुबह उठोयुद्ध जानते हुए। बिना लड़ेकभी मत थको।ईमानदार संघर्ष कीथकान—यही जीत है। दुनिया की तालियाँज़रूरी नहीं।अपनी

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सही कर्म का आनंद

हिंदी कविता

सही कर्म का आनंद सही विकल्प चुनो,सही निर्णय लो,सही युद्ध लड़ो—अबजीत-हारमहत्वहीन है। क्योंकिजहाँ तुम्हें खड़ा होना था,तुमवहीं खड़े हो। विजयबाहर की ट्रॉफी नहीं,वहभीतर की स्पष्टता है—अपने सबसे सचेतस्वरूप सेमेल। जब निर्णय स्वच्छ हो,जब चयनअंदर से न्यायपूर्ण हो,तो परिणामकेंद्र में नहीं रहता। महत्व बस इतना है—तुमनेपीठ नहीं फेरी। पूरी ताक़त सेजो क्षण माँगे,उसे दो।कुछ बचाकर मत

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असंभव ही निमंत्रण है

हिंदी कविता

असंभव ही निमंत्रण है जब करने योग्य मेंपूरा डूबे हो,तोनिराशा के लिएजगह कहाँ बचती है? अगर हर रेशाइस क्षण की माँग मेंलगा है,तोदुख रचने कासमय किसे है? स्थिति जितनीभारी होती है,उतनी हीनाटकीयता कीगुंजाइशघट जाती है। जब शत्रुदो हज़ार गुना हों,तो क्याकोने में बैठकररोने कीफुर्सत मिलती है? कुचली हुई परिस्थितिशोक का निमंत्रण नहीं—वहकर्म का आदेश है।

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लड़ने योग्य युद्ध

हिंदी कविता

लड़ने योग्य युद्ध सच मानो—ज़िंदगी का बड़ा हिस्साहमनेफालतू लड़ाइयों मेंगँवा दिया। ऐसी चीज़ों परजिन्हें हारने काकोई अर्थ नहीं था,और जीतने काकोई मूल्य नहीं। इसलिएन साहस जगा,न संकल्प,न भीतर कीकोई शक्ति। फिरअचानकएक असली युद्ध सामने आता है—भारी,अर्थपूर्ण,डराने वाला। यहीअनुग्रह है। अनुग्रहआराम बनकर नहीं आता,वहचुनौती बनकर आता है। पुराना तुमकमज़ोर है,भागना चाहता है—“क्यों मुसीबत मोल लूँ?”“क्यों यह

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