क्या मैं उसे कभी जान पाया ?
हिंदी कविताक्या मैं उसे कभी जान पाया ? कभी – कभीया बोलिये अब हर वक्त…मैं ढूंढता हूँ उसकोजो मेरे अंदर पड़ा है मौन।कहता कुछ नहींपर लगता हैउसकी आवाज दबा दी गई होकब ?ये भी तो मुझे मालूम नहीं ।लेकिन हाँ ! धीरे-धीरे… उसके अंदर के टीसमुझे जब चुभती,मैं उसे तबझूठी दिलासा देकरअक्सर शांत कर देता था […]
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