मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं

हिंदी कविता

अधिकांश ‘शास्त्र’ केवल पुराने ग्रंथ हैं(Most ‘Scriptures’ Are Just Old Books)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) जो समय से बँधा है,वह बदलेगा—और जो बदले,उस पर टिकनाकैसे संभव है? सच्ची आध्यात्मिकताउसकी खोज करती हैजो नहीं बदलता—क्योंकिकेवल वहीभरोसेमंद है। वेश बदले,रीतियाँ बदलीं,देवताओं के नाम बदले,कथाएँ बदलीं—हर सदी नेअपने रंग चढ़ाए। तो क्यायही सत्य था? अगर सत्यपोशाक में

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अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है

हिंदी कविता

If Truth Hurts, Niceness Kills(अगर सत्य चुभता है, तो ‘नाइसनेस’ मार डालती है)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, दृष्टान्तयुक्त अतुकांत कविता) जो तुम्हेंवही कहेजो तुम सुनना चाहते हो—उसे तुम“अच्छा इंसान” कहते हो। जो तुम्हेंवही कहेजो तुम्हें सुनना ज़रूरी है—उसे तुमनिर्दयी मान लेते हो। कितने भोले हैं हम—मुस्कान पर जीवन गिरवी रख देते हैं,दो मीठे झूठहमें काफ़ी लगते हैंप्यार मान

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बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार

हिंदी कविता

Outer Knowledge, Inner Darkness(बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार)(एक लम्बी, विचारप्रद, सत्यनिष्ठ अतुकांत कविता) अठारह साल,या पच्चीस साल—तुमने पढ़ा क्या? भाषाएँ,इतिहास,राजनीति,भूगोल,अर्थशास्त्र। सूत्र, समीकरण,मानचित्र, तिथियाँ—जानकारियों की बाढ़। पर एक असहज प्रश्न है—क्या तुमअंग्रेज़ी भाषा हो?या फ्रेंच व्याकरण? क्या तुमरासायनिक समीकरण हो?या त्रिकोणमिति का सिद्धांत? क्या तुमपाठ्यपुस्तक में छपीनदियाँ और हिमनद हो?क्या तुमअलेक्ज़ेंडर हो,या अशोक? क्या तुमहार्डवेयर हो?या कोड?

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शोर नहीं, सत्य को याद रखो

हिंदी कविता

शोर नहीं, सत्य को याद रखो सब कुछजो याद है,याद रखने योग्य नहीं। अतीत का बड़ा हिस्साज्ञान नहीं—शोर है। उसे छोड़ दो।शांतिअपने आपउभर आएगी। जो कुछतुम जानते हो,वह भीसब जानने योग्य नहीं। काफी कुछउधार है,अप्रासंगिक है,मृत बोझ है। उसे गिरने दो—और देखोतुमकितने हल्के हो जाते हो। जो कुछतुम्हारे पास है,उसकामालिक मत बनो—उसेसेवक रहने दो। तबविनम्रतास्वाभाविक

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ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो

हिंदी कविता

ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो जो ध्यानजीवन को न बदले,वह ध्यान नहीं—मन को सुलाने कीएक आदत भर है। आँखें बंद करनाध्यान नहीं है।यदि आँखें खुलने परज़िंदगी वैसी ही रहे,तो भीतरकुछ भी नहीं जागा। सच्चा ध्यानजीवन के केंद्र तकपहुँचता है—और वहाँहस्तक्षेप करता है। वहतोड़ता हैपुरानी सुविधाओं को,उधेड़ता हैझूठी पहचान को,औरनए ढंग सेजीने की

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मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है

हिंदी कविता

मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है तुम जहाँ हो,वहीं सेरास्ता खुलेगा। किसी नए स्थान,किसी नए व्यक्ति,किसी नई परिस्थिति कीज़रूरत नहीं। जो सामने है—उसी सेशुरुआत करो। यदि ऊब है,तो ऊब से भागो मत।उसे देखो।उसी मेंप्रवेश-द्वार छुपा है। यदि आसक्ति है,तो उसे न ढको,न उचित ठहराओ।वह तुम्हें दिखाएगीतुम्हारी निर्भरता,तुम्हारा भ्रम। यदि क्रोध हैया भय—तो वहीमार्ग है। उन्हें दबाने

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छोटे को नज़रअंदाज़ करो

हिंदी कविता

छोटे को नज़रअंदाज़ करो मैं उसे सबक सिखाऊँगा।मैं उसे तोड़ दूँगी।उसने अपमान किया—सुना तुमने?वह व्यंग्य था या नहीं?इशारा था या दुर्घटना?मैं गलत ठहराई गई—या नहीं? रुको। अपने ऊपरथोड़ी दया करो। इन छोटे युद्धों सेखुद को बचाओ।ये लड़ाइयाँतुम्हारी ऊर्जा खा जाती हैं,तुम्हारे घंटे निगल जाती हैं,तुम्हारी चेतना कोटुकड़ों में बाँट देती हैं—और बदले मेंकुछ भी नहीं

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तुम वही बन जाते हो, जो भीतर लेते हो

हिंदी कविता

तुम वही बन जाते हो, जो भीतर लेते हो साथमासूम नहीं होता।वहधीरे-धीरेतुम्हें गढ़ता है। जीवन कोसबसे तेज़और सबसे गहरेकुछ बदलता है—वह हैसंगति।वातावरण। इसलिएसतर्क रहो। किससे मिलते हो,क्या पढ़ते हो,क्या देखते हो,क्या सुनते हो,क्या खाते हो—यह सबतुम्हारे भीतरउतर रहा है। अंधाधुंधकुछ भीअंदर मत आने दो। इंद्रियाँहर क्षणपी रही हैं।औरतुम वही बनते होजोवे पी लेती हैं। हाँ,एक

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💖 प्रेम और करुणा / मनीभाई नवरत्न

प्रेम और रिश्ते, समाज और यथार्थ, हिंदी कविता

प्रेम और करुणा पर प्रेरक हिंदी लेख। जानिए कैसे सच्चा प्रेम करुणा में बदलकर जीवन को सकारात्मक और अर्थपूर्ण बनाता है।

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बसंत और बदलाव / मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

बसंत और बदलाव पर प्रेरक हिंदी लेख। जानिए कैसे बसंत ऋतु हमें जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और नए आरंभ की प्रेरणा देती है।

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आकाश और विश्वास / बेटी और पत्नी को उड़ान भरने की प्रेरणा देती मनीभाई की कविता

प्रेरणा और सकारात्मकता

बेटी और पत्नी को उड़ान भरने की प्रेरणा देती मनीभाई की कविता मत बाँधो उसेरिश्तों की परिभाषाओं में,वह बेटी है तो आकाश भी है,वह पत्नी है तो विश्वास भी है। उसके सपनों परसंदेह की छाया मत डालो,वह जिस दिशा में बढ़ेवहीं सूरज उगने दो। बेटी को कहो —“तेरे पंख मेरे आशीर्वाद से मज़बूत हैं,तू गिर

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शांत—और इसलिए खतरनाक

हिंदी कविता

शांत—और इसलिए खतरनाक एक शांत मनुष्यकमज़ोर नहीं होता। वह खतरनाक होता है। क्योंकिउसके भीतरसंदेह नहीं होता—औरजिसे संदेह नहीं,उसे बहकाया नहीं जा सकता। उसके पासकुछ पाने कीजल्दी नहीं होती—औरजिसे कुछ पाना नहीं,उसे ग़ुलाम नहीं बनाया जा सकता। सच्चा विश्रामझूले में लटकना नहीं है।बिस्तर में सिमटना नहीं है। सच्चा विश्रामतूफ़ान के बीच स्थिर रहना है। पसीने में

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