मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

हिंदी दिवस की कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि हिन्दी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। क्योंकि भारत मे अधिकतर क्षेत्रों में ज्यादातर हिन्दी भाषा बोली जाती थी इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया और इसी निर्णय के महत्व को प्रतिपादित […]

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लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता,

लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न कितने लाभ और कितने हानि-मनीभाई नवरत्न बादल से गिरतीअमृत बनकर पानी।प्यास फिर बुझातीअपनी धरती रानी । फुटते कली शाखों परबगिया बनती सुहानी ।आती फिर धरा मेंनित नूतन जवानी । छम छम करतीसुनो बारिश की जुबानी ।दिल छू कर गुजरेध्वनि ऐसी रूहानी । घनघोर घटा चीरतीबिजली की रवानी।मूरत

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छत्तीसगढ़ी कविता – तरिया घाट के गोठ

नारी जीवन और संवेदना,

( यह कविता कुछ ग्रामीण महिलाओं के स्वभाव को दर्शाती है जहाँ उनकी दिखावटीपन, आभूषण प्रियता, बातूनीपन  और  कुछ अनछुए पहलू को बताने की कोशिश की गई है ।)

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छत्तीसगढ़ी कविता – जड़कल्ला के बेरा

हिंदी कविता

जड़कल्ला के बेरा -छत्तीसगढ़ी कविता आगे रे दीदी, आगे रे ददा, ऐ दे फेर जड़कल्ला के बेरा।गोरसी म आगी तापो रे भइया , चारोखुँट लगा के घेरा॥ रिंगीचिंगी पहिरके सूटर,नोनी बाबू ल फबे हे।काम बूता म,मन नई लागे, बने जमक धरे हे।देहे म सुस्ती छागय हे,घाम लागे बड़ मजा के।दाँत ह किटकिटावथे,नहाय लागे बड़ सजा

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12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस पर कविता

हिंदी कविता

12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस नव-चेतना का आह्वान किया।नमक कानून के खिलाफ पदयात्रा किया।जीना सिखाया हमें स्वाभिमान से,“महात्मा”बुलाते हम सम्मान से,घनघोर अँधेरा में बने आशा की किरण,सत्यअहिंसा की मिशाल बने जिनका जीवन।आज उन्हीं के काम के मान दिवस है।12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस है।। चल पड़े थे अपने मकसद में अकेले,कुछ सहयोगी भी उनके संग

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 9

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक भाग 9 ४०१/शम्मी के पेड़धनिष्ठा वसु व्रतमंगल स्वामी ४०२/मंडलाकारसौ तारे शतभिषाराहु की दशा। ४०३/ रोपित करेंपूर्व भाद्रपद मेंआम्र का वृक्ष। ४०४/मांस का दानउत्तरा भाद्रपदपूजा निम्ब के । ४०५/कांसे का दानरेवती पूषा व्रतमहुआ पूजा। ४०६/श्रीराम जन्मअभिजीत जातकहै भाग्यशाली ।   ४०७/ सांध्य का ताराशुक्र बन अगुआलड़े अंधेरा । ४०८/तरू की मुट्ठीधंस चली धरा मेंबचाने

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 8

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक ३५१/ धरा की तापहरते मौन वृक्षतप करते ३५२/ झुलस जायेतन मन जीवनऐसी तपन। ३५३/ है ऐसी धुपनैन चौंधिया जायेतेजस्वरूप । ३५४/   लू की कहरखड़ी दोपहर में  धीमा जहर ३५५/मेघ गरजेबिजली सी चमकेरूष्ट हो जैसे । ३५६/बादल छायाएकाकार हो गयेधरा अंबर। ३५७/मेघ ढाल सा।बिजली की कटारबूंदों की बौछार । ३५८/मेघ घुमड़ेबारिश की चादरधरती

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 7

समाज और यथार्थ

हाइकु अर्द्धशतक ३०१/आज के नेताहै जनप्रतिनिधिनहीं सेवक। ३०२/है तू आजादबचा नहीं बहानातू आगे बढ़। ३०३/.मित्र में खुदाकरे निस्वार्थ प्रेमरिश्ता है जुदा। ३०४/ छाया अकालजल अमृत बिनधरा बेहाल। ३०५/ सांध्य सिताराशुक्र बन अगुआलड़े अंधेरा। ३०६/ स्वाभिमान हीसबसे बड़ी पूंजीजीवन कुंजी। ३०७/ बानी हो मीठीचुम्बकीय खिचावशीतल छांव। ३०८/ प्रेरणा पथखुला पग पग मेंपरख चल। ३०९/अच्छे करमपरलोक संपत्तिजीवन

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 6

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक २५१/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५२/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५३/ बाजार सजा~डलिया में बैंगनइतरा रहा। २५४/ सब्जी का राजा~(बैंगन)ताज भांति सिर मेंडंठल सजा।   २५५/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५६/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५७/ विषम दशा~साहसी नागफनीजीके दिखाता। २५८/ जुदा कुरूप~गमला में सजतामैं

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 5

हिंदी कविता

हाइकु अर्द्धशतक २०१/ प्रभात बेला~   शहर में सजती रंगीन मेला। २०२/ हिलते पात~ दिवस सुधि लेते आई प्रभात। २०३/ खनिज खान~पठार की जमीनचौड़ा सपाट। २०४/रूई बिछौना~पामीर के पठारसंसार छत। २०५/ फंसा पतंगा फूल की लालच में लोभ है जाल। २०६/ पिरो के रखा~   एकता के सूत्र में अंतरजाल।   २०७/ बारिश बूंदें~उगी है

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 4

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक १५१/ शांत तालाबपाहन की चोट सेबिखर चला। १५२/ मुस्कुरा गईनव वधु के लबमैका आते ही। १५३/ बच्चे मायुसबिजली आते उठीखुशी लहर। १५४/ अपनी सीमाकमजोरी तो नहींप्रभाव जमा। १५५/ बाल संवारेदीदी आज भाई कासहज प्रेम १५६/ भूले बिसरेयादों में झिलमिलअसल पूंजी। १५७/ आकाश गंगातारों की टिमटिमतम की आस। १५८/ भीषण शीतलब गुंजित करेशास्त्रीय गीत।

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 3

प्रकृति और पर्यावरण

हाइकु अर्द्धशतक १०१/ विकासशीलजगत का नियमहरेक पल १०२/अनुकूलनअस्तित्व का बचावकर पहल १०३/वातावरणकरता प्रभावितचल संभल १०४/ बच्चों के संगमिल जाती खुशियाँअपरम्पार।   १०५/ जीवन कमसमय फिसलताख्वाब हजार। १०६/ सूक्ष्म शरीरमन की चंचलताचांद के पार। १०७/ सर्वसमतानेकी बदी की छायाहरेक द्वार। १०८/ शहर शोरहो जुदा तू कर लेमौन विहार। १०९/ स्वर्ण बिछौना बिछाये धरा पररवि की रश्मि। ११०/

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