शोर नहीं, सत्य को याद रखो

शोर नहीं, सत्य को याद रखो

सब कुछ
जो याद है,
याद रखने योग्य नहीं।

अतीत का बड़ा हिस्सा
ज्ञान नहीं—
शोर है।

उसे छोड़ दो।
शांति
अपने आप
उभर आएगी।

जो कुछ
तुम जानते हो,
वह भी
सब जानने योग्य नहीं।

काफी कुछ
उधार है,
अप्रासंगिक है,
मृत बोझ है।

उसे गिरने दो—
और देखो
तुम
कितने हल्के हो जाते हो।

जो कुछ
तुम्हारे पास है,
उसका
मालिक मत बनो—
उसे
सेवक रहने दो।

तब
विनम्रता
स्वाभाविक होगी।

और जो
तुम्हारे पास नहीं है—
उसे
अभाव मत समझो।

अक्सर
जो नहीं है,
वही
ज़रूरी नहीं होता।

तब
स्वतंत्रता
बची रहती है।

स्मरण
सूचनाओं को
जकड़ने का नाम नहीं।

स्मरण है—
सत्य में
जमे रहना।

जब
सही तरह
याद रखते हो,
तो
सही तरह
जीते हो।

और
सही जीवन
कोई शोर नहीं करता—
वह
मौन मुक्ति है।

निरंतर स्मरण—
यही
अंतहीन स्वतंत्रता है।

Scroll to Top