बेटी की व्यथा पर कविता -दूजराम -साहू
नारी जीवन और संवेदनाबेटी की व्यथा पर कविता करूण रस – अब न जन्मूँ “वसुंधरा” में, कर जोर विनती कह रही !सूर – कबीरा के “धरा” में,देखो “बेटी” जुल्म सह रही !! यहाँ – वहाँ, जाऊँ – कहाँ, पग – पग में बैठा दानव है !किसको मैं असुर कहूँ” मां”, किसको मानूंगी मानव है !!इंसानियत अब नजर न […]
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