नारी जीवन और संवेदना

बेटी की व्यथा पर कविता -दूजराम -साहू

नारी जीवन और संवेदना

बेटी की व्यथा पर कविता करूण रस – अब न जन्मूँ “वसुंधरा” में, कर जोर विनती कह रही !सूर – कबीरा के “धरा” में,देखो “बेटी” जुल्म सह रही !! यहाँ – वहाँ, जाऊँ – कहाँ, पग – पग में बैठा दानव है !किसको मैं असुर कहूँ” मां”, किसको मानूंगी मानव है !!इंसानियत अब नजर न […]

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बलात्कार पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

बलात्कार पर कविता हो रहे इन बलात्कारों का सबसे बड़ा जिम्मेदार।फिल्म, सीरियल मीडिया और विज्ञापन बाजार। अर्धनग्न तस्वीरों को मीडिया और इंटरनेट परोसता है।बालमन छुप-छुपकर इसमें ही अपना सुख खोजता है। फिल्मी गानें और नाच बच्चों को उकसाते हैं।विज्ञापन में नारी देह ही बार-बार दिखाते हैं। कमतर कपड़ों में दिखाते अश्लील आईटम डाँस।नैतिकता को छोड़

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तुम धरा की धुरी -एल आर सेजु थोब ‘प्रिंस’

नारी जीवन और संवेदना

तुम धरा की धुरी नारी तुम धरा की धुरीतुम बिन सृष्टि अधूरीमूरत तुम नेह स्नेह, वात्सल्यतुम ममतामयी, तुम करुणानिधि । माँ, बहन, बेटी और पत्नीतुम हर रूप की अवतारीचली हर कदम पुरुष के साथबन जीवन रथ की धुरी । त्याग व प्रेम की सूरत सीतुम मूरत हो प्यारीतुम से शुरू तुम पर ही खत्मतुम हो

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नारी की व्यथा पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

महिला (स्त्री, औरत या नारी) मानव के मादा स्वरूप को कहते हैं, जो स्त्रीलिंग है। महिला शब्द मुख्यत: वयस्क स्त्रियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। किन्तु कई संदर्भो में यह शब्द संपूर्ण स्त्री वर्ग को दर्शाने के लिए भी प्रयोग मे लाया जाता है, जैसे: नारी-अधिकार।  नारी की व्यथा पर कविता बरसों पहले आजाद हुआ देशपर अब भी बेटी आजाद

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नारी पर आधारित कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर आधारित कविता नारी जगत का सार     नारी सृष्टि काआधार         जननी वो कहलाती              मान उसे दीजिये।।             ???नारी ईश्वर का रूप     उसकी शक्ति अनूप         देती है सबको प्यार              उसे खुश कीजिये।। 

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Jai Sri Ram kavitabahar

चित चोर राम पर कविता / रश्मि

नारी जीवन और संवेदना

चित चोर राम पर कविता / रश्मि चित चोर कहो , न कुछ और कहो। मर्यादा पूरूषोत्तम है । हे सखी !सभी जो मन भायेवो मनभावन अवध किशोर कहो। चित चोर…….. है हाथ धनुष मुखचंद्र छटा, लेने आये सिय हाथ यहां। तारा अहिल्या  को जिसने हे सखि उन चरणों कोमुक्ति का अंतिम छोर कहो। चित चोर…… बाधें न बधें वो बंधन है। देखो वो

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आर आर साहू-भावभरे दोहे

नारी जीवन और संवेदना

भावभरे दोहे प्रकृति प्रदत्त शरीर में,नर-नारी का द्वैत।प्रेमावस्था में सदा,है अस्तित्व अद्वैत।। पावन व्रत करते नहीं,कभी किसी को बाध्य।व्रत में आराधक वही, और वही आराध्य ।। परम्पराएँ भी वहाँ,हो जाती निष्प्राण।जहाँ कैद बाजार में,हैं रिश्तों के प्राण।। एक हृदय से साँस ले, प्रियतम-प्रिया पवित्र।श्रद्धा से विश्वास का,दिव्य सुगंधित इत्र।। भाव सोच अवधारणा,होते शब्द प्रतीक।देश काल

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रावण दहन करो

नारी जीवन और संवेदना

रावण दहन करो भीतर के रावण का दमन करो,फिर तुम रावण का दहन करो।पहले राम राज्य का गठन करोफिर तुम रावण का दहन करो। चला लेना तुम बाण को बेशक़,जला देना निष्प्राण को बेशक़।बचा लेना तू विधान को बेशक़,पहले राम का अनुशरण करो।फिर तुम….. पहले राम बनकर दिखलाओ,सबको तुम इंसाफ़ दिलवाओ।पुरुषों में तुम उत्तम कहलाओ,राम

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सुनो राधिके- डा.नीलम

नारी जीवन और संवेदना

सुनो राधिके सुनो राधिकेहर बार तुम्ही प्रश्न चिह्न बनीसम्मुख मेरे खडी़ रहींहर बार ही मैंनेतुमको हल करने काप्रयत्न कियापर…….राधिके तूने कब कबमुझको समझाजब भी मैने रास कियाहर गोपी मेंतुझको ही देखाबांसुरी की हर साँस मेंतेरी ही धड़कन जानीकालिंदी कीअल्हड़ लहरेमुझको तेरी अंगडा़ई लगेकदंब तने सेजब जब लिपटातुझसे ही लिपटा जैसेहर पात पात मेंतुझको देखाहर स्वास में

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मेला पर दोहे -नवीन कुमार तिवारी

नारी जीवन और संवेदना

मेला पर दोहे मेला देखो घूमके,कितना रहता भीड़ । मानस रहते झूमते ,किसका कैसा नीड़ ।।1 खुले हाट बाजार में , बेच रहे सामान । साज बजे भोंपू सुने , बैठ  कहे श्रीमान ।।2 जमघट देखे  भागते ,उड़ने लगे गुबार । मीठा खारा खा रहे , मिलता खोया प्यार  ।।3 मेला ठेला घूमते , कटता

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हे महिषासुर मर्दिनी

नारी जीवन और संवेदना

हे महिषासुर मर्दिनी हे महिषासुर मर्दिनी ! आज फिर धरा पर आना होगा , नारी के मान , नारी की गरिमा कावसन फिर बचाना होगा ,छिपे बैठे है असुर कितनेमच्छरों सदृश मौकापरस्त कितने ,ढूंढ-ढूंढ कर उन दुश्शासनों कोमिट्टी में मिलाना होगा , हे महिषासुर मर्दिनी ! आज फिर …………हे नारी ! समय नही अब रोने काइतिहास गवाह है और

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हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी

नारी जीवन और संवेदना

हिमा नजर आ रही है हिम्मत तेरे हौसले मेंहिमा नजर आ रही हैदेश के तिरंगे का क्या खूब मान बढ़ा रही है उड़नपरी बन कर क्या खूब दौड़ लगाईचटा के धूल सबकोगोल्ड तू ले आई तेरा कद भी हिमा हिमालय से बडा हैदेश सारा तेरे लियपलके बिछाय खड़ा है बेटियों की हिम्मतनारी का तू मान है देश की उभरती

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