नारी जीवन और संवेदना

गाय गरुवा के हड़ताल

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गाय गरुवा के हड़ताल हमरो बनय राशन कारड चारा मिलय सरकारी ।सब्बो योजना ल छोड़ भर पेट मिलय थारी।जब तक पूरा न होवय गरुवा घुरुवा अउ बारी ।गाय गरुवा के हड़ताल रही जारी…….। छत्तीसगढ़ के चारो कोती हामर हावय चिन्हारी ।चाहे नेता चाहे बाबा चाहे ओ रास बिहारी।लोटा लोटा गोरस पियय चारा के नइये पुछारी […]

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सांध्य है निश्चल -बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

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सांध्य है निश्चल रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई।रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।।नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई।गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो लाल, नृत्य की ताल मिलाए।उमड़-घुमड़ कर मेघ, छटा में चाँद खिलाए।।पक्षी दे संगीत, मधुर गीतों को गा कर।मोहक भरे उड़ान, पंख पूरे फैला कर।।

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बेटी की पुकार

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      बेटी की पुकार पिता का मैं ख्याल रखूंगीतेरे कहे अनुसार मैं चलूंगीरूखी सूखी ही मैं खा लूंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे धरा पर आने तो दे।।बोझ मैं तुमपर नहीं बनूंगीपढ़ लिख कर बड़ा बनूंगीतेरा मैं नाम रोशन करुंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे  धरा पर आने तो दे।।खिलती हुई नन्ही कली

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रक्त दान पर दोहे

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रक्त दान पर दोहे रक्त दान हम सब करे,तन को चंगा पाय।खुद को होवे लाभ जी,दूसर जान बचाय।। डॉक्टर हर दिन ये कहे,मानव होत महान।पर हितकारी ध्यान में,करे रक्त का दान।। जान बचे है तीन की,दान करे जब एक।भले काम को सब करे,कहते बात हरेक।। नर नारी के देह में,दस यूनिट का रक्त।ए बी सी

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कंगन की खनक समझे चूड़ी का संसार

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कंगन की खनक समझे चूड़ी का संसार नारी की शोभा बढ़े, लगा बिंदिया माथ।कमर मटकती है कभी, लुभा रही है नाथ। कजरारी आँखें हुई,  काजल जैसी रात।सपनों में आकर कहे,  मुझसे मन की बात। कानों में है गूँजती, घंटी झुमकी साथ।गिर के खो जाए कहीं, लगा रही पल हाथ। हार मोतियों का बना, लुभाती गले

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धूल पर दोहे

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धूल पर दोहे पाहन नारी हो गई,पाकर पावन धूलप्रभु श्रीराम करे कृपा,काँटे लगते फूल महिमा न्यारी धूल की,केंवट करे गुहारप्रभु पग धोने दीजिए,तभी चलूँ उस पार मातृभूमि की धूल भी,होता मलय समानबड़भागी वह नर सखी,त्यागे भू पर प्रान आँगन में सब खेलते,धूल धूसरित ग्वालमात यशोदा गोद ले,चुमती मोहन गाल कृष्ण पाद रज धो रहे,बहा नैन

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पाँच वर्ष का है त्यौहार

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पाँच वर्ष का है त्यौहार लोकतंत्र का रखना मान।जाकर करना तुम मतदान।पाँच वर्ष का है त्यौहार।चुन लेना अपनी सरकार।मत आना लालच में आप।वोट बेंचना होता पाप।सुधरे भारत की हालात।संसद भेजो रखने बात।लालच में आकर ना खोय।मत अपनी जस बेटी होय।पहनो या पहना लो ताज।सुंदर हो भारत का राज।संविधान देता अधिकार।जाने भारत को संसार।नर नारी सब

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चैत्र शुक्ल में मनाएं नवरात्रि त्यौहार

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चैत्र शुक्ल में मनाएं नवरात्रि त्यौहार चैत्र शुक्ल में मनाएं ,नवरात्रि त्यौहार ।सुख वैभव भरपूर ,खुशियां मिले अपार ।। प्रथम दिवस शैलपुत्री कुँवारी कन्या माता ।पूजा करने वाला सुख-सम्पति पाता ।। ब्रह्मचारिणी देवी है, स्त्री रूप में गुरु ।ज्ञान आनंद की दात्री पावन होती रूह ।। चंद्रघंटा के दशो भुजाओं में अस्त्र ।सिंह सवार होकर

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चुनाव का बोलबाला

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चुनाव का बोलबाला हर  गली   में   बोलबाला  है।अब  वक्त  बदलने  वाला  है।।जो चुनाव नजदीक आ गया,बहता   दारू  का   नाला  है।।उन्हें  वोट  चाहिए  हर  घर  से,हर  महिला  इनकी  खाला  है।।साम, दाम, दण्ड, भेद अपनाए,सच  की  छाती  पर  छाला  है।।झुग्गी  में   नेता   रोटी   खाए,समझ  लो गड़बड़  झाला  है।।कल  चाहे  ये  बलात्कार   करें,आज  बहन  हर  एक  बाला है।।ये 

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अब्र के दोहे

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अब्र के दोहे मस्ताया मधुमास है, गजब दिखाए रंग।फागुन बरसे टूटकर, उठता प्रीत तरंग।। लाया फूल पलाश का, मस्त मगन मधुमास।सेमल-सेमल हो गया, फागुन अबके खास।। काया नश्वर है यहाँ, मत भूलें यह बात।कर्म अमर रहता सदा, भाव जगे दिन रात।। सार्वजनिक जीवन सदा, भेद भाव से दूर।जिनका भी ऐसा रहा, वो जननायक शूर।। होली

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मन की जिद ने इस धरती पर कितने रंग बिखेरे

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मन की जिद ने इस धरती पर कितने रंग बिखेरे दिन   गुजरे   या   रातें  बीतीं  ,रोज लगाती  फेरे।मन की जिद ने इस धरती पर, कितने रंग बिखेरे।कभी  संकटों  के  बादल ने, सुख  सूरज को घेरा।कभी बना दुख  बाढ़  भयावह  ,मन में डाले डेरा।जिद ही  है जिसने  धरती  पर ,एकलव्य अवतारा।जिद  ही थी जिसने  रावण  को

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जल संकट पर कविता

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विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करना है। जल संकट पर कविता पानी मत बर्बाद कर ,          बूँद – बूँद अनमोल |प्यासे ही जो मर गये

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