नारी जीवन और संवेदना

कोरोना पर दोहे

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कोरोना पर दोहे विद्यालय सब बंद है,कोरोना का घात।नर नारी सब मास्क पर,कहते डर की बात।। हाथ विचारे देख के,रहते हैं चुपचाप।नहीं बताते कुछ हमें,कोरोना पर आप।। कोरोना के काट का,खोज करो सब आज।मरे नहीं कोई यहाँ,होवे खूब इलाज।। आवत रोगी देख के,काँपे सबके हाथ।डॉक्टर परिजन सब डरे,असली रिश्ते साथ।। धोते रहना हाथ को,मास्क रहे […]

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घर मंदिर पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

घर मंदिर पर कविता त्याग और सहयोग जहाँ होघर वो ही कहलाता है।इक दूजे में प्यार बहुत होघर मंदिर बन जाता है।।1।। आँगन में किलकारी गूँजेघर बच्चों से भरा रहे।नारी का सम्मान जहाँ होप्रेम और सहयोग रहे।।2।। बड़े दिखाए स्वयं बड़प्पनछोटे आज्ञाकारी हो।आपस में सहयोग भाव होजहाँ नही लाचारी हो।।3।। संस्कारो का मान जहाँ होमिलजुलकर

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होली चालीसा – बाबू लाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

होली चालीसा :-चालीसा हिंदू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा के लिए गायी जाने वाली प्रार्थना होती है। ये प्रार्थनाएँ विशेष रूप से उन देवी-देवताओं को समर्पित की जाती हैं जिन्हें मान्यता है कि उनकी शक्ति और कृपा से भक्तों की समस्त मांग पूरी होती है। चालीसा के पाठ के माध्यम से भक्त अपने मनोकामनाओं

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रजत विषय पर दोहा

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रजत विषय पर दोहा रजत वर्ण की चाँदनी,फैल रही चहुँओर।चमक रहा है चंद्रमा, लगे रात भी भोर।। रात अमावस बाद ही , होता पूर्ण उजास।दुग्ध धवल सी पूर्णिमा,करती रजत प्रकाश।। कर्म सभी ऐसा करो , हो जाए जो खास।रजत पट्टिका में पढ़े,स्वर्णिम सा इतिहास।। रजत आब वृषभानुजा,श्याम वर्ण के श्याम।दर्शन दोनो के मिले,मिले नयन विश्राम।।

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बिखराव पर कविता

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बिखराव पर कविता नफरतों नेबढ़ा दी दूरियांइंसान-इंसान के बीच बांट दिया इंसानकितने टुकड़ों मेंस्त्री-पुरुषअगड़ा-पिझड़ाअमीर-गरीबनौकर-मालिकछूत-अछूतश्वेत-अश्वेतस्वर्ण-अवर्णधर्म-मजहब मेंखंड-खंड हो गया इंसाननित बढ़ता हीजा रहा है बिखराव -विनोद सिल्ला©

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शिव-शक्ति पर कविता

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प्रस्तुत कविता शिव शक्ति पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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होलिका दहन पर कविता-प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

होलिका दहन पर कविता मधुमासी ऋतु परम सुहानी, बनी सकल ऋतुओं की रानी।ऊर्जित जड़-चेतन को करती, प्राण वायु तन-मन में भरती।कमल सरोवर सकल सुहाते, नव पल्लव तरुओं पर भाते।पीली सरसों ले अंगड़ाई, पीत बसन की शोभा छाई। वन-उपवन सब लगे चितेरे, बिंब करें मन मुदित घनेरे।आम्र मंजरी महुआ फूलें, निर्मल जल से पूरित कूलें।कोकिल छिप

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मतदाता दिवस पर कविता

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मतदाता दिवस पर कविता अच्छे नागरिक के कर्तव्य निभाए,राष्टीय मतदाता दिवस मनाए।मानव को जागरूक बनाए,नव मतदाता के नाम जुड़वाए। युवा पीढ़ी को आगे लाएं,स्वतंत्र रूप से वोट कराए।लोकतंत्र के पर्व मनाएं,शत प्रतिशत मतदान कराए। एक वोट भी रह न पाए,आओ ये करके दिखाए।जन जन को समझाए,वोट का अधिकार दिलाए।~~~~~~~~~~~~~~~~रचनाकार-डीजेन्द्र क़ुर्रे “कोहिनूर”पीपरभवना,बलौदाबाजार (छ.ग.)मो. ‌8120587822 मतदाता जागरूकता

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विरह पर दोहे -बाबू लाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

विरह पर दोहे सूरज उत्तर पथ चले,शीत कोप हो अंत।पात पके पीले पड़े, आया मान बसंत।। फसल सुनहरी हो रही, उपजे कीट अनंत।नव पल्लव सौगात से,स्वागत प्रीत बसंत।। बाट निहारे नित्य ही, अब तो आवै कंत।कोयल सी कूजे निशा,ज्यों ऋतुराज बसंत।। वस्त्र हीन तरुवर खड़े,जैसे तपसी संत।कामदेव सर बींधते,मन मदमस्त बसंत।। मौसम ले अंगड़ाइयाँ,दामिनि गूँजि

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बेबश नारी पर कविता- लाचार ममता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

बेबश नारी पर कविता सायं ठल गई अंधेरों में कब तक यूं ही सोओगे , ममता की दुलारी चिडियाँ कब तक यूं ही खोओगे। ममता का जमीर बेच दिया-इंसानियत के गद्दरो ने,बहना का सब धीर सेज दिया-चिडियाँ के हत्यारों ने।चोर,उच्चके चौराहों पर ध्यान लगाए बैठे है, इज्जत की पौडी पर अपना- ईम्मान लगाए बैठे है।

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कुंडलियाँ – बेटी पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

  बेटी पर कविता बेटी जा पिया के घर ,            गुड़िया नहीं रोना । सजा उस घरोंदे को,            साफ सुथरा रखना।। साफ सुथरा रखना,         पति सेवा तुम करना। रखना इतनी चाह,        झगड़ा कभी न करना ।। कह डिजेन्द्र करजोरि,

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न्याय प्रक्रिया में सुधार जरूरी है-संतोष नेमा “संतोष”

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न्याय प्रक्रिया में सुधार हैदराबादकांड पर जोमानवाधिकारवाले उन्हेंकल तकअनाचारियों कोदानव कहते थे..!और बड़े हीबेफिक्री सेरहते थे.!!आज उनकाअंजाम देखउनकीमानवताजागी..!बोले बिनन्यायालय मेंअपराध सिद्ध हुएवो कहाँ हैं दागी..?यह सुन एकमहिलाबौखलाई..!बोली येदोगली नीतिकहाँ से आई..?हम भीन्यायालय केनिर्णय कोमानते हैं.!पर न्यायकब मिलेगाये भी जानते हैं..!!निर्भया कीसज़ा अभीबाकी है..!पिछलेआठ वर्षों कीयह झांकी है..!!इस पीड़ा कोआप क्यासमझेंगे.!!आप सिर्फसबूतों कोही परखेंगे..!!“संतोष”न्याय मेंअनावश्यक देरी

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