नारी जीवन और संवेदना

हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग १

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक १/बसंत नाचेगाये गीत फाग केप्रेम राग के। २/बासंती चिट्ठीसंवदिया बन केआया बयार। ३/  बासंती  हवा   रंग  बिखर गया। निखर गया। ४/फलक तले खिले सरसों फुलबसंत पले। ५/पी का दीदारनशा ज्यों हो शराबदिल गुलाब । ६/ नदिया तीरखड़ा है जो गंभीरशिव मंदिर। ७/ मस्जिद परअल्लाहु अकबररब का घर । ८/ हर जगहवाहेगुरू फतहजै […]

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नारी पर दोहे- डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर दोहे ★★★★नारी की यशगान हो ,नारी की ही रूप ।नारी के सहयोग से,मिलते लक्ष्य अनुप।। नारी बिन कब पूर्ण है?एक सुखी परिवार।नारी जो सुरभित रहे, सुखी रहे संसार।। जग में जो करता नहीं , नारी का सम्मान।कहलाये वह क्यो मनुज ,वह है पशु समान।।★★★★★★★★★★★★★रचनाकार – डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

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12 मई नर्स दिवस पर विशेष कविता

नारी जीवन और संवेदना,

12 मई नर्स दिवस पर विशेष कविता मौत की दहलीज में ,जब कोई हो पड़े-पड़े।खून से लथपथ ,अंग भंग हो के सड़े-सड़े ।अपने तक तरस खाते,देख दूर खड़े-खड़े ।तब एक महिला ,पस-दुर्गंधों से लड़े-लड़े।अस्पताल में महत्वपूर्ण है इसकी भूमिका ।“सिस्टर”कहते सब जिसे,वो है परिचारिका। बीमारी की पहचान में डॉक्टर करता काम।पर निदान प्रक्रिया में नर्स

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ओ नारी- मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

ओ नारी- मनीभाई नवरत्न जिन्दगी चले ना, बिन तेरे ओ नारी!उठा ली तूने,  सिर अपने  ऐसी जिम्मेदारी । मर्दों ने नाहक किये खुद पे ऐतबार ।सच तो यह है कि नारी होती जग की श्रृंगार ।महक ऐसे , फूल जैसे खिल उठे क्यारी क्यारी ।रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।। संयमित

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हे नारी तू खास है

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

चोका:- नारी तू खास है★★★★★ हर युद्ध काजो कारण बनतालोभ, लालचकाम ,मोह स्त्री हेतुपतनोन्मुखइतिहास गवाहस्त्री के सम्मुखधाराशायी हो जाताबड़ा साम्राज्यशक्ति का अवतारनारी सबला।स्त्री चीर हरण सेकौरव नाशमहाभारत कालरावण अंतसीता हरण करस्त्री अपमानहर युग का अंत।आज का दौरनारी सब पे भारीगर ठान लेदिशा मोड़े जग कासहनशीलप्रेम त्याग की देवीधैर्य की धागाबांधकर रखतीदेवों का वासतेरे आस पास

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manibhai Navratna

मनीभाई नवरत्न के दोहे

नारी जीवन और संवेदना

मनीभाई नवरत्न के दोहे 1)मित सुख दे भ्राता- पिता , सपूत भी सुख दे मित।सुखी होती  वो नारी ,   जो सुख दे पति नित।।2)धन संचय कर ना साधु ,धन का नहि होती ठौर।आज इसके पास है ,कल हो जाए किसी और।।3)धन की महिमा है बड़ी, धन से ही विपदा टरे।धन नहीं आज तेरे संग ,कल

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पुरूष सत्ता पर कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नारी जीवन और संवेदना

पुरूष सत्ता पर कविता लोग कहते रहे हैंमहिलाओं का मनजाना नहीं जा सकताजब एक ही ईश्वर ने बनायामहिला पुरुष दोनों कोफिर महिला का मनइतना अज्ञेय इतना दुरूह क्यों.. ? कहीं पुरुषों ने जान बूझकरअपनी सुविधा के लिएतो नहीं गढ़ लिए हैंये छद्म प्रतिमान ! क्या सचमुच पुरुषों ने कभीसमझना चाहा है स्त्रियों का मन ..?

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पेड़ होती है स्त्री पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

स्त्री पर कविता जीवन भरचुपचापसहती हैउलाहनों के पत्थरऔरदेती हैआशीषों की छाँह बड़ी आसानी सेकाटो तो कट जाती हैजलाओ तो जल जाती हैआपके हितों के लिएईंधन की तरह पेड़ होती है स्त्री। — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र9755852479

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सर्चिंग पर लघु कथा

नारी जीवन और संवेदना

सर्चिंग पर लघु कथा अज्ञात मुखबिर से पुलिस को सुचना मिली की सलवाजुडूम कार्यकर्ताओं पर फायरिंग करने वाले मुख्य अभियुक्त महिला नक्सली लौमन कोतरापाल में छुपी हुई हैं।नक्सल ऑपरेशन प्रमुख एस एस पी दयाराम ने टीम गठित कर सर्चिंग दल को कोतरापाल जाने का आदेश दिया।दयाराम भी दल के साथ जंगल की ओर कूच कर

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mahapurush

जलियांवाला बाग की याद में कविता

नारी जीवन और संवेदना

जलियांवाला बाग की याद में कविता जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को सलाम।अमर कुर्बानी का पावन अमृतसर शुभ धाम।।तड़ातड़ चली थी निहत्थों पर अनगिनत गोलियां।कसूर था बस बोल रहे थे इंकलाब की बोलियाँ।।जनरल डायर की बर्बरता की चली थी अंधाधुंध गोलियां।महिलाओं बच्चों पर खेली गई खून की होलियां।।निर्दयी जनरल डायर को तनिक भी दया नहीं

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लोग क्या कहेंगे पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

लोग क्या कहेंगे पर कविता वो नहीं समझ सकतेआजादी का महत्वजो आजाद हैं आजादी का महत्वजानता है बंधुआ मजदूरजिसे जबरनरखा जाता है काम पर या पूछिए अछूतों सेजिन्हें नहीं मिलीआज तलक आजादीजिन्हें धर्मग्रंथआज भी करते हैं प्रताड़ित या फिरबता सकती हैं महिलाएंलगाए गये हैं जिन परकितने अंकुशकहा जाता है बात-बात परलोग क्या कहेंगे? -विनोद सिल्ला©

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नारी चेतना पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी चेतना पर कविता ऐ! नारीतू करती है अराधनाउन अराध्यों कीजो हैं तेरे दोषीकिया शोषण सदैवजिन्होंने तेरा समझा तुझेश्रंगार-रस कीविषय-वस्तुनहीं दिया हकसमानता काकिया सदैव भेदभाव गवाह हैं इस सबकेअनेक धर्म-ग्रंथजो चीख-चीख करकरते हैं ब्यानतेरे शोषण की कहानी -विनोद सिल्ला©

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