नारी जीवन और संवेदना

माघ शुक्ल की तीज तिथि पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

माघ शुक्ल की तीज तिथि पर कविता माघ शुक्ल की तीज तिथि,सब तीनों से श्रेष्ठ।इसके व्रत से पा रहे,साधक सुफल यथेष्ठ ।।लिखा भविष्य पुराण में,माघ शुक्ल की तीज।तिथि नारी जो व्रत रखे,तो पाती सब चीज।।माँ गौरी की कृपा से,सुप्त भाग्य भी जाग।कर देता अतिशय प्रबल,दुर्बल हुआ सुहाग।।व्रत करती है जो बहन,धन, सुख, पुत्र अनूप।लक्ष्मी जी […]

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विवाह-एक पवित्र बंधन

नारी जीवन और संवेदना

विवाह-एक पवित्र बंधन विवाह एक संस्कृति व संस्कार है।विवाह बंधनों का मधुर व्यवहार है।दो पवित्र आत्माओं का होता मिलन।लुटाएँ एक दूजे पर असीम प्यार है।1।सात जन्मों का है ये प्यारा बंधन।वंश बेला बढ़ाने का नाम है जीवन।केवल बंधन नहीं विवाह स्त्री पुरुष का।दो पवित्र आत्माओं का है मधुर मिलन।2।सुख दुख बाँटने का रास्ता है विवाह।जीवन

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नारी रत्न अमूल्य धरा पर(चौपाई छंद)

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी रत्न अमूल्य धरा पर (चौपाई छंद) नारी रत्न अमूल्य धरा पर।ईश्वर रूप सकल सचराचर।।राम कृष्ण जन्माने वाली।सृष्टि धर्म की सत प्रतिपाली।।१.बेटी बहिन मात अरु दारा।हर प्रतिरूप मनुज उद्धारा।।नारी जग परहित तन धारी।सुख दुख पीड़ा सहे दुधारी।।२.द्वय घर की सब जिम्मेदारी।बिटिया वहन करे वह सारी।।पढ़ी लिखी जब होती नारी।दो दो घर बनते संस्कारी।।३.शान मान अरमान

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छत्तीसगढ़ी कविता – तरिया घाट के गोठ

नारी जीवन और संवेदना,

( यह कविता कुछ ग्रामीण महिलाओं के स्वभाव को दर्शाती है जहाँ उनकी दिखावटीपन, आभूषण प्रियता, बातूनीपन  और  कुछ अनछुए पहलू को बताने की कोशिश की गई है ।)

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कोरोना या करमा

नारी जीवन और संवेदना

कोरोना या करमा नर मे वास करें नारायणनारी में नारायणी ,हे मानव॥स्वयंम को समझअपने कर्मों को तू बदल॥ चांद ,सूरज, पृथ्वी ,गगनसब अपने कार्य में है मगन॥नीति देखो रे मनुष्य कीजो खो गई जाने किस भवन॥ रोज सवेरे स्नान करे वोतन को रखें स्वच्छ॥मन का मैल ना धुल पावेगाचाहे काशी गंगा जावे हर वर्ष॥ तूने

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हाइकु

हाइकु प्रथम शतक

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु शतक १.खेत में डेराहाथ में मोटी रोटीदूध की डोली२तेल बिनौरीसिर पर छबड़ीगीत गुंजन३होली के रंगचौपाल पर ताशचंग पे भंग४.नीम का पेड़वानर अठखेलीदंत निंबोली५सम्राट यंत्रधूप घड़ी देखताविद्यार्थी दल६संग्रहालयकांँच बाँक्स में ‘ममी’उत्सुक छात्रा७गुलाब बागपैंथर पिँजरे मेंकूदे वानर८मोती मंगरीतोप पे लेते सेल्फीसैलानी बाला९विजय स्तंभसैलानी लेते फोटोपद्मिनी ताल१०.पुष्कर मेलाबैलगाड़ी में बैठेविदेशी बाला११आना सागरकीकर छाँव बैठारेत पे मृग१२सिंधु का

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तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल :नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नारी जीवन और संवेदना

तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल टीप-टीप बरसता पानीछतरी ओढ़ेसुबह-सुबह चहलकदमी करतेघर से दूर सड़कों तक जा निकलादेखा–सड़क के किनारेलगे हैं फूलदार पौधे कईपौधों पर निकली हैं कलियाँ कईमग़र कहीं भीदूर-दूर तक पौधों परखिले हुए फूल एक भी नहींसहसा नजरें गईनहाए न धोएफूल चुन रहे पौधों सेमहिला-पुरुष कई-कईवही जो कहलाते आस्तिक जनरखे हुए हैं झिल्ली मेंतोड़े हुए

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हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

नारी जीवन और संवेदना

हरितालिका तीज!(घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि,पूजन निर्जला ब्रत,रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी,उम्र यश लंबी माँगे,अपने प्राणेश के! दृढ़वती धर्मधारी, सुहागिन या कुँवारी,वर लेती यदि मानें, ग्रंथों के आदेश के! मुदित मधुर मन, शिव गौरी आराधना,श्रद्धा लिये वत्स कल, पूजा फिर गणेश के! –राजेश पान्डेय वत्स!0821(हरितालिका तीज २०७७)

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 6

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक २५१/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५२/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५३/ बाजार सजा~डलिया में बैंगनइतरा रहा। २५४/ सब्जी का राजा~(बैंगन)ताज भांति सिर मेंडंठल सजा।   २५५/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५६/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५७/ विषम दशा~साहसी नागफनीजीके दिखाता। २५८/ जुदा कुरूप~गमला में सजतामैं

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 4

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक १५१/ शांत तालाबपाहन की चोट सेबिखर चला। १५२/ मुस्कुरा गईनव वधु के लबमैका आते ही। १५३/ बच्चे मायुसबिजली आते उठीखुशी लहर। १५४/ अपनी सीमाकमजोरी तो नहींप्रभाव जमा। १५५/ बाल संवारेदीदी आज भाई कासहज प्रेम १५६/ भूले बिसरेयादों में झिलमिलअसल पूंजी। १५७/ आकाश गंगातारों की टिमटिमतम की आस। १५८/ भीषण शीतलब गुंजित करेशास्त्रीय गीत।

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 2

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु अर्द्धशतक ५१/ बिखरे पुष्पबंसत सुगंधितभ्रमर गीत। ५२/ कबूलफूल हो चाहे धुलप्यार है मूल। ५३/ प्यार जीवनमिट्टी की दुनिया मेंबाकी कफन। ५४/ पत्थर दिलपिघलता प्यार सेनहीं मुश्किल।  ५५/ मुड़ा भास्करउत्तरायण गति हुई संक्रांति। ५६/ उत्तरायणीहो चला दिनकरराशि मकर।   ५७/ किया तर्पणभगीरथ गंगा सेसंक्रांति दिन। ५८/ संक्रांति तिथिशरीर परित्यागमहान  भीष्म। ५९/ बाल संवारे~कांधे लटका थैलास्कूल को

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