हिंदी संग्रह कविता-नये समाज के लिए
समाज और यथार्थनये समाज के लिए नये समाज के लिए नया विधान चाहिए।असंख्य शीश जब कटेस्वदेश-शीश तन सका,अपार रक्त-स्वेद से,नवीन पंथ बन सका।नवीन पंथ पर चलो, न जीर्ण मंद चाल से,नयी दिशा, नये कदम, नया प्रयास चाहिए।विकास की घड़ी में अब,नयी-नयी कलें चलें,वणिक स्वनामधन्य हों,नयी-नयी, मिलें चलें।मगर प्रथम स्वदेश में, सुखी वणिक-समाज से,सुखी मजूर चाहिए, सुखी किसान […]
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