हिंदी कविता

देश पर कविता

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देश पर कविता हे ! मातृभूमि तेरी रक्षा में,हम अपना प्राँण लुटाएंगे।तन-मन-धन सब अर्पित कर,हम तेरा मान बढ़ाएंगे। देश के खातिर कफन बाँधके, सरहद पर सब डट जाएँगे। समय आए जब आहुति का, तब प्राँण होम कर जाएंगे। पले-बढ़े जिस धरती पर,अन्न जहाँ का खाया है।खून सींचकर हम अपनी,फर्ज धरा का निभाएंगे। रविबाला ठाकुर स./लोहारा, […]

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अकिल की शायरी

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अकिल की शायरी चाहत है ये मेरी कुछ ऐसा कर जाऊँ,भारत की धरती को अपने लहू से रंग जाऊँ। ख्वाहिश थी ये मेरी की माँ की गोद में झूमलूँ,बुढ़े वालिद की नजर को पढ़ूँ और बीबी के हाथों को चूम लूँ। कोई बतादे मुझको कहाँ है वो बचपन की गलियाँ,वो गुड्डा – गुड्डी, चोर-सिपाही, दोस्त

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धरती पर प्रेम का दूसरा रूप है मेरी माँ – धमेन्द्र वर्मा

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मातृपितृ पूजा दिवस भारत देश त्योहारों का देश है भारत में गणेश उत्सव, होली, दिवाली, दशहरा, जन्माष्टमी, नवदुर्गा त्योहार मनाये जाते हैं। कुछ वर्षों पूर्व मातृ पितृ पूजा दिवस प्रकाश में आया। आज यह 14 फरवरी को देश विदेश में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार द्वारा प्रदेश भर में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है। धरती

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आया रे आया बसंत आया

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आया रे आया बसंत आया आया रे आया बसंत आयाआया रे आया बसंत आया।पेड़-पौधों के लिये खुशहाली लेकर आया।।आया रे आया बसंत आया। चारों तरफ छायी है खुशियाली।पेडो़ पर आयी है नयी हरियाली।।आया रे आया बसंत आया। आने वाली है रंगो की होली।बसंत की खुशी में पशु-पक्षी डोल रहे हैं डाली-डाली।।आया रे आया बसंत आया।

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माघ शुक्ल बसंत पंचमी पर कविता

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माघ शुक्ल बसंत पंचमी पर कविता माघ शुक्ल की पंचमी,भी है पर्व पुनीत।सरस्वती आराधना,की है जग में रीति।। यह बसंत की पंचमी,दिखलाती है राह।विद्या, गुण कुछ भी नया,सीखें यदि हो चाह।। रचना, इस संसार की,ब्रह्मा जी बिन राग।किये और माँ शक्ति ने,हुई स्वयं पचभाग।। राधा, पद्मा, सरसुती,दुर्गा बनकर मात।सरस्वती वागेश्वरी,हुईं जगत विख्यात।। सभी शक्ति निज

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आया बसंत- कविता चौहान

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आया बसंत आया बसंत आया बसंत, आया बसंतछाई जग में शोभा अनंत।चारों ओर हरियाली छाईजब बसंत ऋतु है आई।रंग बिरंगे फूल खिलाएखेतों पर सरसों लहराए।फूलों पर भोरे मंडराएजब बसंत ऋतु है आए। सूरज की लाली सबको भाए।देख बसंत, शाखाएं लहराए।देख नीला आसमा मन हर्षाए।जब बसंत अपना रंग बिखराए। अलसी की शोभा निराली।कोयल कूके डाली डाली।देखो

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पुलवामा पर कविता

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पुलवामा पर कविता प्रेम दिवस पर पुलवामा में,परवानों को प्यार हुआ।आज गीदड़ों के हाथों,था शेरों का संहार हुआ।।कट गई,फट गई,बंट गई वो,फिर भी उसको हमदर्दी थी।सहज सहेजे थी अब तक,वो खून में भीगी वर्दी थी।।सिसका सिंदूर, रोई राखी,माता जी सांसे भूल गई।भाई,बाप और बच्चों की,जिंदगी अधर में झूल गई।।इंच इंच नापा था सबको,जब बेटे हमने

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शिव में शक्ति पर कविता

समाज और यथार्थ

शिवशक्ति की वंदना प्रस्तुत कविता शिव में शक्ति पर कविता भगवान शिव पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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पुलवामा घटना पर कविता

हिंदी कविता, ,

पुलवामा
आतंकी घटना पर
३०मात्रिक मुक्तक (१६,१४ पर यति)
में रचना

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प्रणय मिलन कविता-सखि वसंत में तो आ जाते

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प्रणय मिलन कविता-सखि वसंत में तो आ जाते- डॉ सुशील शर्मा सखि बसंत में तो आ जाते।विरह जनित मन को समझाते।         दूर देश में पिया विराजे,       प्रीत मलय क्यों मन में साजे,       आर्द्र नयन टक टक पथ देखें       काश दरस उनका पा जाते।       सखि बसंत में तो आ जाते।   सुरभि मलय मधु ओस

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ज्ञान दो वरदान दो माँ

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ज्ञान दो वरदान दो माँ सत्य का संधान दो।बिंदु से भी छुद्रतम मैंकृपा का अवदान दो। अवगुणों को मैं समेटेमाँ पतित पातक हूँ मैं।मोह माया से घिरा हूँ,निपट पशु जातक हूँ मैं।अज्ञानता मन में बसाये ।अहम,झूठी शान हूँ मैं।लाख मुझ में विषमताएं।गुणी तुम अज्ञान हूँ मैं। है तिमिर सब ओर माता,ज्योति का आधान दो माँ।ज्ञान

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