प्रेमचन्द साव प्रेम पर कविता
हिंदी कविताप्रेमचन्द साव प्रेम पर कविता (1)हिमालय है मुकुट जैसा,चरण में हिन्द महासागर।कहीं पर राम जन्मा है,कहीं राधा नटवर नागर।है अपना देश मुनियों का,जहाँ पर धर्म पलता हैं।ये भारत वर्ष हैं अपना,जहाँ है प्रेम का गागर। (2)जुबां पर प्रेम की बोली,हृदय में धर्म को धारो।कहीं मनभाव में जीना,कहीं मनभाव को मारो।मगर माँ भारती को,जो दिखाए
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