हिंदी कविता

फरवरी माह पर दोहे

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फरवरी माह पर दोहे माह फरवरी शीत में, पछुआ मंद बयार।बासंती मौसम हुआ, करे मधुप गुंजार।। माह फरवरी जन्म का, वेलेन्टाइन संत।प्रेम पगा संसार हो, प्रीत रीत का पंत।। भारत में उत्सव मनें, फाग बसन्ती गीत।माह फरवरी में चले, प्राकृत पतझड़ रीत।। काम देव के बाण से, पीड़ित सभी सजीव।फागुन संगत फरवरी, सबके चाहत पीव।। […]

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नन्हें मेहमान पर कविता

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नन्हें मेहमान पर कविता मुंडेर पर रखेपानी के कुंडे कोदेख रहा था मैंहोकर आशंकितमन में उठे प्रश्नकोई पक्षीआता है या नहीँपानी पीनेतभी मुंडेर परदेखी मैंनेपक्षियों की बीठेंमन को हुई तसल्लीकि आते हैंनन्हे मेहमानमेरी मुंडेर पर -विनोद सिल्ला©

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बूंदाबांदी पर कविता

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बूंदाबांदी पर कविता रात की हल्कीबूंदाबांदी नेफिजां कोदिया निखारपेङों पेपत्तों पेदीवारों पेमकानों पेजमीं धूलधुल गईसब कुछ हो गयानया-नयाऐसी बूंदाबांदीमानव मन पे भीहो जातीजात-पांतधर्म-मजहब कीजमी धूलभी जाती धुलआज कीफिजां की तरहजर्रा-जर्राजाता निखर -विनोद सिल्ला

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गणेश स्तुति गणनायक देवा,बिपदा मोर हरौ-बोधन राम निषादराज

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गणेश स्तुति जय गणेश गणनायक देवा,बिपदा मोर हरौ।आवँव तोर दुवारी मँय तो, झोली मोर भरौ।।1।। दीन-हीन लइका मँय देवा,आ के दुःख हरौ।मँय अज्ञानी दुनिया में हँव,मन मा ज्ञान भरौ।।2।। गिरिजा नन्दन हे गण राजा, लाड़ू हाथ धरौ।लम्बोदर अब हाथ बढ़ाओ,किरपा आज करौ।।3।। शिव शंकर के सुग्घर ललना,सबके ख्याल करौ।ज्ञानवान तँय सबले जादा,जग में ज्ञान भरौ।।4।।

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वसंत आया पर कविता दूल्हा बन

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वसंत आया पर कविता वसंत आया दूल्हा बन,वासंती परिधान पहन।उर्वी उल्हासित हो रही,उस पर छाया हुआ मदन।। पतझड़ ने खूब सताया,प्रियतमा बन गई विरहन ।पर्ण-वसन सब झड़ गये,किये क्षिति ने लाख जतन।। ऋतुराज ने उसे मनाया,नव कोपलें ,नव पल्हव।बनी धरा नव्य यौवना ,मही मनमुदित, है मगन।। वसुंधरा पर हर्ष छाया ,सभी मना रहे हैं उत्सव।सोलह

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पिता पर कविता~बाबूलाल शर्मा

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पिता पर कविता-बूलालशर्मा पिता ईश सम हैं दातारी। कहते कभी नहीं लाचारी। देना ही बस धर्म पिता का। आसन ईश्वर सम व्यवहारी।१ तरु बरगद सम छाँया देता। शीत घाम सब ही हर लेता! बहा पसीना तन जर्जर कर। जीता मरता सतत प्रणेता।२ संतति हित में जन्म गँवाता। भले जमाने से लड़ जाता। अम्बर सा समदर्शी

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शारदे माँ पर कविता

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शारदे माँ पर कविता (1)हे शारदे माँ ज्ञान के,भंडार झोली डार दे।आये हवौं मँय द्वार मा,मन ज्योति भर अउ प्यार दे।।हे हंस के तँय वाहिनी,अउ ज्ञान के तँय दायिनी।हो देश मा सुख शांति हा,सुर छोड़ वीणा वादिनी।। (2)आ फूँक दे स्वर तान ला,जग में सदा गुनगान हो।हे मातु देवी शारदे,माँ मान अउ सम्मान हो।।मँय मूढ़

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स्वदेश पर कविता-बाबूलालशर्मा

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स्वदेश पर कविता करें जय गान!शहादत शान!सुवीर जवान!स्वदेश महान! करें गुण गान!सुधीर किसान!पढ़े इतिहास!बचे निज त्रास! धरा निज मात!प्रणाम प्रभात!पिता भगवान!सदा सत मान! रहे यश गान!स्वदेश महान!प्रवीर जवान!सुधीर किसान! ✍©बाबू लाल शर्मा, बौहरासिकंदरा,दौसा,राजस्थान

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यादें तो यादें है -विनोद सिल्ला

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यादें तो यादें है -विनोद सिल्ला आ जाती हैं यादेंबे रोक-टोकनहीं है इन परकिसी का नियन्त्रणनहीं होने देतीआने का आभासआ जाती हैंबिना किसी आहट केदे जाती हैंकभी गम कातो कभी खुशी काउपहारजब भीआती हैं यादेंस्मृतियों केरंगमंच परचल पड़ता हैचलचित्र-सालौट आते हैंपुराने दिनपुराना समययादें तो यादें हैं

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गज़ल-मौत का क्या है

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गज़ल-मौत का क्या है मौत का क्या है कभी तो आ ही जाएगी,,,हयात का क्या है कभी तो खत्म हो ही जाएगी,, सोचते रहते हैं हम तो उनके बारे में,,,इंतजार की घड़ी कभी तो खत्म हो ही जाएगी,, अंधेरा ही नज़र आता है हर तरफ,,,आसमां की रात कभी तो खत्म हो ही जाएगी,,, “सुखवीर” से

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बसन्त ऋतु पर गीत

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बसन्त ऋतु पर गीत लगे सुहाना मौसम कितना,मन तो है मतवाला।देख बसन्त खिले कानन में,फूलों की ले माला।। शीतलता अहसास लिए हैं,चलते मन्द पवन हैं।ऋतु बसन्त घर आँगन महके,जलते विरही मन हैं।।पंछी चहके हैं डाली पर,गाते गीत निराला।।लगे सुहाना………………………… ढाँक पलास खिले तरुवर पर,अनुपम छटा बिखेरे।सरिता की पावन जल धारा,कल-कल करती फेरे।।भँवरे गुन-गुन गाते मधुरिम,पी

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साधना पर कविता

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साधना पर कविता करूँ इष्ट की साधना,कृपा करें जगदीश।पग पग पर उन्नति मिले,तुझे झुकाऊँ शीश।। योगी करते साधना,ध्यान मगन से लिप्त।बनते ज्ञानी योग से,दूर सभी अभिशिप्त ।। जो मन को हैं साधते,श्रेष्ठ उसे तू जान।दुनिया के भव जाल में,फँसे नहीं वो मान।। करो कठिन तुम साधना,दृढ़ता से धर ध्यान।मन सुंदर पावन बने,संग मिले सम्मान।। मानव

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