सुलगता हुआ शहर देखता हूँ
हिंदी कवितासुलगता हुआ शहर देखता हूँ इधर भी उधर भी जिधर देखता हूँ,सुलगता हुआ हर शहर देखता हूँ, कहीं लड़ रहे हैं कहीं मर रहे हैं,झगड़ता हुआ हर नगर देखता हूँ, कहीं आग में जल न जाए यहाँ सब,झुलसता हुआ हर बसर देखता हूँ, सियासत बहुत है घिनौना यहाँ पर,छिड़कता हुआ अब जहर देखता हूँ, […]
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