हिंदी कविता

कर्म देवता

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इस कविता के प्रत्येक चरण में 16 मात्रा वाले छंद का प्रयोग किया गया है:- मानव जीवन ईश्वर का रहस्यमय वरदान है।आज के मानव का एकमात्र उद्देश्य अति धन-संग्रह है,जिसके लिए वे अपनों का भी खून बहाने से नहीं हिचकते।वे भूल गए हैं कि जीवन क्षणिक है।मृत्यु पश्चात बेईमानी से संचित उस धन से,रिस्ते-नातों से […]

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शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी

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शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटीमैं कभी भी  सर नहीं झुकाऊंगीलाख कर लो तुम भ्रूण की हत्याफिर भी जन्म मै लेती ही जाऊंगी। कब तक तुम मुझको मारते रहोगेकभी तो तुम्हें मुझपे तरस आएगीफिर भी अगर नहीं सुधरोगे अगरसोचो बेटों की बारात कहां जाएगी। कर लो तुम

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कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे

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कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।वाह रे वा किस्मत! पाना

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥पसीना बहाया यहाँ

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बाते सोलह आने सच है

हिंदी कविता

बाते सोलह आने सच है पानी के लिए कुँएँ बावली नल में होता है खूब जमावमहाराष्ट्र में लगा था धारा 144 देख कर भीड़ में टकराव पानी के स्रोतों के पास समूह नहीं हो सकते थे खड़ेजल संकट से जूझ रहे हैं धीरे धीरे राज्य छोटे बड़े आगे चल कर के पानी के लिए छिड़

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कविता मेरी ऐसी हो

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कविता मेरी ऐसी हो कविता मेरी  ऐसी होजिसमें हो कोई संदेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।गौतम हो गुरू नानक होहो उनकी गुरु वाणीगंगा जल की पवित्रता होमहानदी का पानी ।गंगा से सिंचित कविता कोमिले नया  परिवेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।लक्ष्मी बाई हो कविता मेंभगत सिंग  बलिदानी ।विस्मिल और

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जीवन की है परिभाषा

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जीवन की है परिभाषा अक्षर अक्षर भावों से  गुंजितकल्पना की मिठास है कविताकवि मन की मर्म अभिव्यंजनामृदु निर्झरित एहसास है कविता lसुख दुख से परिपूर्ण जीवन कीशब्द शक्ति की आशा है कवितारवि किरणों से भी सशक्त है येजीवन की है परिभाषा कविता lमन  हृदयभाव उद्गारों की  निधिकपोल कल्पित स्मित है कवितामरु को  भी  मधुमय  कर

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कविता क्या है?

हिंदी कविता

कविता क्या है? कम शब्दों में अधिक वर्णन कविता है ठेस लगी तो दुख का वर्णन कविता है भावनाओं का आकर्षक वर्णन कविता है शब्दों का तरंगित होना कविता है शब्दों का रोद्र हो जाना कविता है अनायास ही गुनगुनाना कविता है शब्दों का अनुशासित होना कविता है शब्दों का बहुआयामी होना कविता है शब्दों

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करना हो तो काम बहुत हैं

हिंदी कविता

करना हो तो काम बहुत हैं नेकी के तो धाम बहुत हैंकरना हो तो काम बहुत हैं।सोच समझ रखे जो बेहतरउनके अपने नाम बहुत हैं।प्रेम रंग गहरा होता हैरंगों के आयाम बहुत हैं।गुण सम्पन्न बहुत होते हैंवैसे तो बदनाम बहुत हैं।इश्क़ खुदा से सीधी बातेंमन हल्का आराम बहुत है।लक्ष्य एक पर पंथ अलग हैंसभी में

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हमारी भाग्य विधाता मां

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। हमारी भाग्य विधाता मां ना शब्द है ना कोई बात,जो मां के लिए लिख पाऊं,उसके चरणों में मैं,नित-नित शीश

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समय -देवता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय -देवता देव,दनुज,नाग,नर,यक्ष,सभीनित मेरी महिमा गाते हैं।सत्ता सबसे ऊपर मेरी,सब सादर सीस झुकाते हैं।।1 देव मैं महान शक्तिशाली,हूँ अजर,अमर,अविनाशी मैं।सर्वत्र मेरा ही शासन है,नित प्रवहमान एकदिशीय मैं।।2 मेरी प्रवाह के साथ-साथ,जो अपनी कदम बढ़ाते हैं।पुरुषार्थी,परिश्रमी जन ही,जीवन-फल लाभ उठाते हैं।।3 पूजते जन श्रद्धा-भक्ति से ,हरदम फल पाते मन सन्तोष।अति शीघ्र रीझ मैं जाता हूँ,जैसे देवों

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तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ”

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ” वंदन अर्चन हे जन्मदायिनीसबसे  प्यारा  शब्द है   माँपहचान मेरी तेरे आँचल सेतू  ही 

तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ” Read More »

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