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माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीँ
माँ पर कविता – अभिलाषा
धरती माता रो रो कर करती यही पुकार
मौन बोलता है
हे धरती के भगवान
ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत
संवेदना के सुर बजे जब वेदना के तार पर
सही दिशा मिल जाए तो
नहीँ बताई
भगवान परशुराम पर कविता
परशुराम जयंती पर रचना
पालन अपना कर्म करो
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