हिंदी कविता

तुमने पत्थर जो मारा

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तुमने पत्थर जो मारा चलो तुमने पत्थर जो मारा वो ठीक था।पर लहर जो क्षरण करती उसका क्या? पीर छूपाये फिरता है खलल बनकर तू,विराने में आह्ह गुनगुनाये उसका क्या? बेकार…कहना था तो नज़र ताने क्यों?गौर मुझ पे टकटकी लगाए उसका क्या? मेरी इज्जत…,मेरी आबरू क्या कम है?तो जो खुलकर बोली लगाए उसका क्या? मै

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वतन को नमन करता हूँ

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वतन को नमन करता हूँ भारत माँ की चरण धूलि,चंदन माथे धरता हूँ ।सपूत हूँ नाम वतन के ,जीवन अर्पण करता हूँ । बहता शोणित यूँ रगों में,जलते अंगारों सासिंधु प्रलय सा उठती लहरें,उर में ललकारों कासिंहनाद हूँकारें भरकर,शत्रुओं से नित लड़ता हूँ। माँ की कोख निहाल होतीमाटी का कर्ज चुकाता हूँअस्मिता की रक्षा खातिरप्राणोत्सर्जन

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नव सुर-दात्री

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नव सुर-दात्री,नव लय-दात्रीनव – गान मयी,नव तान – मयी।        देवी मैं हूँ  अति अज्ञानी       नहीं है जग में   तुमसा  दानी        माँ! दान दो नव अक्षरो  का       माँ दान दो नवलय  स्वरो का जग- सृष्टा की मानस – कन्याबुद्धि दाता  न तुझसी अन्या।।          शारदे! वागेश-  वीणा – धारणी          भारती! भारत- सुतों की तारणी          नव

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जय जय वरदानी

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जय जय वरदानी जयति मातु जय जय वरदानी।सब जग पूजे मुनि जन ज्ञानी।।नित नित ध्यान करूँ मैं माता।तुम सब जन की भाग्य विधाता।। मातु ज्ञान की तुम हो सागर।जगत ज्ञान से करो उजागर।।सदा मातु बसना तुम वाणी।जय जय वंदन वीणापाणी।।           …..भुवन बिष्ट

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भारत माँ का सपूत

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23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में

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भारत माँ के सपूत

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भारत माँ के सपूत – घनाक्षरी चाहे ठंड का कहरआधी रात का पहरतिलभर न हिलते,खड़े , सीना तान के। डरते न तूफान सेडटे हैं बड़ी शान सेभूख ,प्यास ,नींद छोड़,रखवारे मान के। समर्पित हैं देश कोमातृ -भू जगदीश कोतन, मन ,धन सब,सुर -लय गान के। लगे सब देव दूतभारत माँ के सपूतबचाये त्रासदी से वो,निज

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mahatma gandhi

नमन आपको बापू नमन हैैं बारम्बार

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नमन आपको बापू नमन हैैं बारम्बार नमन आपको बापू,  नमन हैैं बारम्बार।सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया,  अत्याचार के आप प्रतिकार।। खादी को किया था आपने प्यार, स्वदेशी अपनाया।सत्य, अहिंसा के हथियार से गौरों को खूब छकाया।।आजादी के परवाने थे,सत्याग्रह के आप रहे प्रतीक।नमक छोडो आंदोलन की भी चले आप लीक।। साबरमती आश्रम में जीवन गुजारा,पोरबंदर के पूत ।सादा

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परिवार की शान होती है बेटियां

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परिवार की शान होती है बेटियां माँ के रूप में ममता हैं बेटियां,ओस की बूंद सी होती है बेटियां,पिता की ताकत होती है बेटियां,परिवार की शान होती है बेटियां । स्वभाव से शर्मिली होती है बेटियांकक्षाओ में प्रथम आती है बेटियांपरिवार को जोडे रखती है बेटियांभाई की कलाई की शान है बेटियां देश की धरोहर

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मोम की गुड़िया-बेटियां

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मोम की गुड़िया-बेटियां मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियांमाता पिता के दुलार में पलती है बेटियांअनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियांखुदा की सौगात ,जमा पूंजी का ब्याज सी होती है बेटियां दिन का चैन और रातों की नीद भी उड जाती हैजब जवान हो जाती

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जिन्दगी पर कविता

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जिन्दगी पर कविता जिन्दगी है,  ऐसी कली।जो बीच काँटों के पली।पल्लवों संग झूल झूले,महकी सुमन बनके खिली। जिन्दगी  राहें अनजानी।किसकी रही ये पहचानी।कहीं राजपथ,पुष्पसज्जित,कहीं पगडण्डियाँ पुरानी। जिन्दगी सुख का सागर ।जिन्दगी नेह की गागर।किसी की आँखों का नूर ,धन्य विश्वास को पाकर। जब डगमगाती जिन्दगी।गमगीन होती जिन्दगी ।मिले  हौंसलों के पंख तबनभ में उड़ती है

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यादों के झरोखे से

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यादों के झरोखे से ख़तमिल गयातुम्हारा कोरा देखा, पढ़ा, चूमाऔरकलेजे से लगाकररख लिया अनकही थी जो बातसब खुल गयीकालिमा भरी थी मन मेंसब धुल गयी हृदय की वीणा बज उठीछेड़ दी सरगमचाहते थे तुम कितनामगर वक़्त था कम और तुमनेकुछ नहीं लिखकर भीजैसेसब कुछ लिख दिया मैंनेदेखा, पढ़ा, चूमाफिरकलेजे से लगाकररख लिया राजेश पाण्डेय*अब्र*  अम्बिकापुर

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प्रभात हो गया

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प्रभात हो गया उठोप्रात हो गयाआँखें खोलोमन की गठानें खोलो आदित्य सर चढ़करबोल रहा हैऊर्जा संग मिश्रीघोल रहा है नवल ध्वज लेकरअब तुम्हेंजन मन धन के निमित्तलक्ष्य की ओरजाना हैगंतव्य के छोर परपताका फहराना है असीम शक्ति तरंगेंतुम्हारे इंतज़ार में हैं उठो !मेघनाद की तरहहुंकार भरोघन गर्जन करो बढो!हासिल करोविजयी बनोइतिहास रचोसमर तुम्हारा है भाग्य

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