हिंदी कविता

mahapurush

शहीदों पर कविता

देशभक्ति

शहीदों पर कविता , उस व्यक्ति को हम शहीद कहते हैं. ऐसे व्यक्ति जो कि किसी भी लड़ाई में देश की सुरक्षा करते हुए या देश के नागरिकों की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देते हैं. ऐसे व्यक्तियों को शहीद कहा जाता है. यह व्यक्ति पुलिस, जल सेना, वायु सेना, थल सेना, BSF, होम

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holi

होली पर कविता

समाज और यथार्थ,

होली पर कविता होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। प्राचीन काल में लोग चन्दन और गुलाल से ही होली खेलते थे। समय के साथ इनमें भी बदलाव देखने को मिला है। कई लोगों द्वारा प्राकृतिक रंगों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे त्वचा या

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doha sangrah

वृक्षारोपण पर दोहे

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वृक्षारोपण पर दोहे डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पर्यावरण सुधार पर , वृक्ष लगा दो चार।धरा बने जब सुंदरम,करना जय जयकार।। पावन मन से सब जुड़े,धरा बनाएं स्वच्छ।पर्यावरण सुधार कर, सुख पनपे प्रत्यक्ष।। हरियाली की छाँव हो,स्वच्छ पवन मृदु नीर।मृदा रहें पोषित सुलभ , नहीं रहें जग पीर।। हरियाली जो हो तभी , कृपा करें देवेन्द्र।पर्यावरण सुधार

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save nature

पर्यावरण दिवस के दोहे

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, समाज और यथार्थ

आज पर्यावरण असंतुलन हो चुका है . पर्यावरण को सुधारने हेतु पूरा विश्व रास्ता निकाल रहा हैं। लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न

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morning

भोर पर कविता -रेखराम साहू

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भोर पर कविता –रेखराम साहू सत्य का दर्शन हुआ तो भोर है ,प्रेम अनुगत मन हुआ तो भोर है। सुप्त है संवेदना तो है निशा ,जागरण पावन हुआ तो भोर है। द्वेष की दावाग्नि धधकी हो वहाँ,स्नेह का सावन हुआ तो भोर है। त्याग जड़ता,देश-कालोचित जहाँ,कर्म-तीर्थाटन हुआ तो भोर है। क्षुद्र सीमा तोड़,धरती घर हुई

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doha sangrah

मनोरमा चंद्रा के दोहे

हिंदी कविता

मनोरमा चंद्रा के दोहे मिथ्या मिथ्या बातें छोड़कर, सत्य वचन नित बोल।दुनिया भर में यश बढ़े, बनें जगत अनमोल ।। अपने मन में ठान कर, मिथ्या का कर त्याग।जीवन कटे शुकून से, समय साथ लो जाग।। सत्य झूठ में भेद अति, करलो सच पहचान।जीवन में हो सत्यता, बनो श्रेष्ठ इंसान।। झूठा बनकर सामने, खड़ा हुआ

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बीज मनुज का शैशव है-रेखराम साहू

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बीज मनुज का शैशव है आभासी परिदृश्यों से अब,हुआ प्रभावित बचपन है।नयी दृष्टि है,सोच नयी है,विश्व हुआ अधुनातन है!! परिवेशों से अर्जित करता,सद्गुण-दुर्गुण मानव है।युगों-युगों से तथ्य प्रमाणित,बीज मनुज का शैशव है।।शैशव में पोषित मूल्यों से ,बनता भावी जीवन है.. बिना सुसंस्कृति,अंधी शिक्षा,और पंगु है आविष्कार।स्वस्थ व्यक्ति निर्माण-सूत्र है,“हो सम्यक् आहार-विहार “।।ध्यान रहे यह नित्य,ज्ञान

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मां का स्पर्श -सुशी सक्सेना

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मां का स्पर्श -सुशी सक्सेना न दवा काम आई, और न दुआ काम आईजब भी जरूरत पड़ी तो, मां काम आईमां का स्पर्श होता है, एक दवा की तरहजिसके मिलते ही मिट जाते हैं सारे ज़ख्ममां का स्पर्श होता है, उस दुआ की तरहजिसके लगते ही दूर हो जाते हैं सारे ग़म जो बरसता है

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जस्टीशिया(न्याय की देवी) -रेखराम साहू

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जस्टीशिया(न्याय की देवी) –रेखराम साहू न्याय की अवधारणा,प्रतिमूर्ति में साकार है।ग्रस्त जो अन्याय से,उनका लिखा उपचार है।। नेत्र की पट्टी प्रदर्शित कर रही निश्पक्षता।है तुला,हो न्याय में व्यवहार की समकक्षता।।न्याय के रक्षार्थ कर में शक्ति की तलवार है… शेष कितना मूल्य है,अब न्याय के प्रतिमान का !वंचना यह निर्बलों को , ढाल सत्तावान का।।लोभ या

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श्याम कैसे मिले राधा से – स्वपन बोस

हिंदी कविता

श्याम कैसे मिले राधा से–स्वपन बोस श्याम कैसे मिले राधा से।राधा कृष्ण तो एक है ,फिर भी श्याम जुदा है राधा सेश्याम कैसे मिले राधा से,,,,,,। प्रेम की ये कैसी पीड़ा है आंसू हैं विरह के दोनों ओर , जैसे जल बिन मीन तरसे।बीन मेघ सावन में प्रेम की आंसू बरसें।श्याम कैसे मिले राधा से,,,,,।

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समय की चाल – पद्म मुख पंडा

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय की चाल सहज नहीं, जीवन भी जीना, नित उत्साह जरूरी है।हार गया, जो मन से, मानव की यह आदत, बूरी है।आएंगे तूफ़ान किस घड़ी, किसको भला पता है,निर्भय होकर, रहो जूझते, मिले सफलता पूरी हैज्ञानार्जन है बहुत जरूरी, बिना ज्ञान क्या कर सकते?विद्वतजन के साथ रहें तो, ये जीवन की धूरी है!है परिवर्तन शील

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