हिंदी कविता

हिंदी की है अद्भुत महिमा – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

हिंदी की है अद्भुत महिमा हिंदी की है अद्भुत महिमा गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट जिसको जीवन में अपनाया, उसपर हम होते बलिहारीहिंदी की है अद्भुत महिमा, यह हमको प्राणों से प्यारी। हिंदी का गुणगान करें हम, हिंदी के गीतों को गाएँहिंदी की मीठी बोली से, सबके मन को अब हम भाएँ सदा फले- फूले यह भाषा, […]

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अनमोल मानव जीवन पर कविता

हिंदी कविता

अनमोल मानव जीवन पर कविता पकड़ प्यार सत्य धर्म की डोर ,बढ़ सर्वदा प्रकाश की ओर।मधुर वचन सबहिं से बोल,मानव जीवन है अनमोल। औरों से सद्गुण सम्भाल,निजका अवगुण दोष निकाल।सत्य वचन से कभी ना डोल,मानव जीवन है अनमोल। वैर- विरोध का नाम मिटाओ,आपस में सद्भाव बढा़ओ।मन कि गाँठें ज्ञान से खोल,मानव जीवन है अनमोल। पर

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मन हो रहा हताश – बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

मन हो रहा हताश . ✨✨१✨✨हम ही दुश्मन मीत, अपनी भाषा के बने।बस बड़ बोले गीत, सोच फिरंगी मन वही।।. ✨✨२✨✨बदलें फिर संसार, निज की सोच सुधार लें।दें शिशु हित संस्कार,अंग्रेजी की कार तज।। . ✨✨३✨✨चलें धरातल जान, उड़ना छोड़ें पंख बिन।तब ही हो पहचान, हिन्दी हिन्दुस्तान की।।. ✨✨४✨✨ज्ञान मरघटी तात, नशा उतरता शीघ्र ही।वही

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हिंदी छा जाए दुनिया में – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

हिंदी छा जाए दुनिया में गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट जिससे हैं हम जुड़े जन्म से, वही हमारी प्यारी भाषा,हिंदी छा जाए दुनिया में, पूरी हो अपनी अभिलाषा। अपनी भाषा के हित में हम, अपना जीवन करें समर्पितजितनी उन्नति होगी इसकी, उतने ही हम होंगे गर्वित बच्चे हिंदी पढ़ें-लिखें जब, बदले जीवन की परिभाषाहिंदी छा जाए दुनिया

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संवाद पर कविता – सुकमोती चौहान रुचि

हिंदी कविता

संवाद पर कविता तुमसे कर संवाद, सुकूं मन को मिलता है |मधुर लगे हर भाष्य, सुमन मन में खिलता है |कर्णप्रिय हर बात, प्रेरणा देती हरदम | करके जिसको याद, दूर हो जाती है गम ||उत्प्रेरक संवाद सब, नित्य सँजोया तुम करो |कठिन समय में याद कर, सत्य राह नित तुम वरो || करके नित

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माता है अनमोल रतन – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

माता है अनमोल रतन स्वांस-स्वांस में माँहै समाई,सदगुरुओं की माँ गुरूताई।श्रध्दा भाव से करो जतन,माता है अनमोल रतन।। अमृत है माता की वानी, माँ आशीश है सोना -चानी।माँ से बडा़ ना कोई धन, माता है अनमोल रतन।। माँका मान बढा़ओ जग में,सेवा से सब पाओ जग में।मणि माणिक माता कंचन,माता है अनमोल रतन।। सुख शान्ति

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इस वसुधा पर इन्सान वहीं – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना

कविता इस वसुधा पर इन्सान वहीं —————————————- धन,वैभव,पदविद्या आदिका जिसको हैअभियाननहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। सत्य धर्म फैलाने आला, विषय पीकर मुस्काने वाला, अबला अनाथ उठाने वाला, प्यार, स्नेह लुटाने वाला परहित में मर जाने वाला।अपना और परायाका जिसकेउर अंदर भान नहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। पर

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Jai Sri Ram kavitabahar

राम को खेलावत कौशिल्या रानी / बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

राम को खेलावत कौशिल्या रानी / बाबूराम सिंह चैत शुक्ल नवमी को पावन अयोध्या में ,मध्य दिवस प्रगटाये रामचनद्र ज्ञानी।सुन्दर सुकोमल दशरथ नृपति -सुत ,भव्यसुख शान्ति सत्य सिन्धुछवि खानी।जिनके दर्शन हेतु तरसता सर्व देव ,बाल ब्रह्मचारी संत योगी यती ध्यानी।शुचि उत्संग बिच ले के “कवि बाबूराम “श्रीहरि राम को खेलावत कौशिल्या रानी। ललाटे तिलकभाल ग्रीवा

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दहेज प्रथा अभिशाप है – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

दहेज प्रथा अभिशाप है दानव क्रूर दहेज अहा ! महा बुरा है पाप ।जन्म-जीवन नर्क बने,मत लो यह अभिशाप।।पुत्रीयों के जीवन में ,लगा दिया है आग।खाक जगत में कर रहा,आपस का अनुराग।। जलती हैं नित बेटियाँ ,देखो आँखें खोल।तहस-नहस सब कर दिया,जीवन डांवाडोल।।पुत्री बिना सम्भव नहीं ,सृष्टि सरस श्रृंगार ।होकर सब कोइ एकजुट,इसपर करो विचार।।

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हिन्दी का गुणगान – अकिल खान

समाज और यथार्थ

हिन्दी का गुणगान संस्कृत भाषा से,अवतरित हुआ है हिन्दी,भारत की माथे की है ये अनमोल बिन्दी।‘राष्ट्रीय भाषा’का जिसे मिला है देश मे सम्मान,प्यारे देशवासियों किजीए,हिन्दी का गुणगान। हिन्दी की है प्यारी-प्यारी,मिठी-मिठी बोली,दोस्ती-व्यवहार में,हिन्दी भाषा है हमजोली।विद्वान-ज्ञानीयों ने,जिसका किया है बखान,प्यारे देशवासियों,किजीए हिन्दी का गुणगान। हम हैं हिन्दवासी,हमें नित हिन्दी है प्यारा,हिन्दी को सभी-जन ने प्यार

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सलिल हिंदी – डाॅ ओमकार साहू

हिंदी कविता

सलिल हिंदी (सरसी छंद) *स्वर व्यंजन के मेल सुहाने, संधि सुमन के हार।**रस छंदों से सज धज आई, हिंदी कर श्रृंगार..* वर्णों का उच्चारण करतें, कसरत मुख की जान।मूर्धा जिह्वा कंठ अधर सह, दंतो से पहचान।ध्वनियों को आधार बनाकर, करते भेद सुजान।*भाव सहित संदर्भ समाहित, सहज शील संचार…**रस छंदों से सज धज आई, हिंदी कर

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हिंदी का पासा – उपेन्द्र सक्सेना

हिंदी कविता

पलट गया हिंदी का पासा गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट हिंदी बनी राजभाषा ही, लेकिन नहीं राष्ट्र की भाषाक्षेत्रवाद के चक्कर में ही, पूरी हो न सकी अभिलाषा। पूर्वोत्तर के साथ मिले जब, दक्षिण के भी लोग यहाँ परहिंदी का विरोध कर जैसे, जला रहे हों अपना ही घरहिंदी की सेवा में जिसको, देखा गया यहाँ पर

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