जिन्दगी पर कविता – पुष्पा शर्मा
प्रकृति और पर्यावरणजिन्दगी का मकसद रोज सोचती हूँ।जिन्दगी का मकसदताकती ही रहती हूँमंजिल की लम्बी राह। सोचती ही रहती हूँप्रकृति की गतिविधियाँ,जो चलती रहती अविराम।सूरज का उदय अस्तरजनी दिवस का निर्माण। रात का अंधियारा करता दूरचाँद की चाँदनी का नूर।तारों की झिल मिल रहतीअँधेरी रातों का भय हरती। शीतल समीर संग होता सवेरा,परीन्दों के कलरव ने सृष्टि […]
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