प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति की सुंदरता, ऋतुओं के परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सृष्टि के विविध रूपों को दर्शाने वाली कविताएँ इस वर्ग में संकलित हैं।

जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

प्रकृति का इंसाफ पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता, ,

प्रकृति का इंसाफ पर कविता कायनात में शक्ति परीक्षा,दिव्य अस्त्र-शस्त्र परमाणु बम से |सारी शक्तियां संज्ञा-शून्य हुई ,प्रकृति प्रदत विषाणु के भ्रम से |अटल, अविचल, जीवनदायिनी ,वसुधा का सीना चीर दिया |!दोहन किया युगो- युगो तक,प्रकृति को अक्षम्य पीर दिया ||सभ्य,सुसंस्कृत बन विश्व पटल पर,कर रहे नित हास-परिहास | त्राहिनाद गूंज रहा चहुं ओर ,अब […]

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तारों सितारों में तुझे ढूंढता हूँ

प्रकृति और पर्यावरण

इस रचना में कवि उस प्रभु को जीवन की विभिन्न कठिन परिस्थितियों में ढूँढने का प्रयास कर रहा है | उस प्रभु को खोज रहा है |

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NATURE

प्रकृति है जीवन का उपहार

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति है जीवन का उपहार प्रकृति है जीवन का उपहार,इसे हम कब संभालेंगे।धरा की पावन आसन पर , इसे हम कब पौढ़ायेंगे।बचा ले अपने जीवन में , स्वास के दाताओं को अब , नहीं तो श्वास और उच्छवास को हम भूल जाएंगे।बेखट कट रहे हैं पेड़, हमारी ही इच्छाओं से , उजड़े बाग उपवन वन

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धरती स्वर्ग दिखाई दे

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बार फिर से पहले की तरह अपनी वसुंधरा पर हरियाली और प्राण वायु के लिए प्रदूषण रोकना होगा ।
आओ मिलकर कसम खाते है कि वृक्षारोपण जरूर करना है।

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पेड़ हमारे मित्र पर कविता"

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन – शशांक गर्ग

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन पर गद्य लेख

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ओजोन परत

आक्सीजन के लिए जंग- शिवेन्द्र यादव

प्रकृति और पर्यावरण,

आक्सीजन के लिए जंग कोरोना महामारी के चलते देश में अधिकतर मौतें आक्सीजन ना मिलने के कारण हुई हैं।लेकिन मनुष्य जिस गति से अपने निजी स्वार्थ के लिए निरंतर वृक्षो का दोहन कर रहा है ऐसा ना हो कि आने वाले वर्षों में हर व्यक्ति को आक्सीजन के लिए जंग लड़नी पड़े। वन नीति के

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बस एक पेड़ ही तो काटा है -नदीम सिद्दीकी

प्रकृति और पर्यावरण

बस एक पेड़ ही तो काटा है बस एक पेड़ ही तो उखाड़ा है साहब!अगर ऐसा न हो तो बस्तियां कैसे बसेगी?प्रगति,तरक्की,ख़ुशयाली कैसे आएगी? हमें आगे चलना है,पीछे नहीं रहना है,दुनिया के साथ चलकर आगे बढ़ना है।आगे बढ़ने की रफ्तार सही नहीं जाती,तुमसे इंसान की तरक्की देखी नहीं जाती।ये कैसी तरक्की है साहब? तुमने कभी

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प्रकृति संरक्षण मंत्र-अमिता गुप्ता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति संरक्षण मंत्र-अमिता गुप्ता प्रकृति हमारा पोषण करती,देकर सुंदर सानिध्य,जीवन पथ सुगम बनाती है,जीव-जंतु जगत की रक्षा को,निज सर्वस्व लुटाती है। आधुनिकीकरण के दौर में,अंधाधुंध कटाई कर,जंगलों का दोहन क्षरण किया,खग, विहंग, पशु कीटों का,घर-आंगन आश्रय छीन लिया। प्रदूषण स्तर हुआ अनियंत्रित,प्लास्टिक,पॉलिथिन का उपयोग बढ़ा,पोखर,तड़ाग,नद, झीलों का,मृदु नीर मानव ने अशुद्ध किया। रफ्ता-रफ्ता हरियाली क्षीण

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hasdev jangal

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-दीप्ता नीमा

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

मत करो प्रकृति से खिलवाड़ मत काटो तुम ये पहाड़,मत बनाओ धरती को बीहाड़।मत करो प्रकृति से खिलवाड़,मत करो नियति से बिगाड़।।1।। जब अपने पर ये आएगी,त्राहि-त्राहि मच जाएगी।कुछ सूझ समझ न आएगी,ऐसी विपदाएं आएंगी ।।2।। भूस्खलन और बाढ़ का कहर,भटकोगे तुम शहर-शहर।उठे रोम-रोम भय से सिहर,तुम जागोगे दिन-रात पहर।।3।। प्रकृति में बांटो तुम प्यार,और

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पर्यावरण संकट

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन-तबरेज़ अहमद

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन शज़र के शाखो पर परिंदा डरा डरा सा लगता है।ऐसी भी क्या तरक्की हुई है मेरे मुल्क में।कई शज़र के शाखाओं को काटकर और कई शज़र को उजाड़ कर शहर का शहर बसा लगता है।इन पर्यावरण को उजाड़ कर शहर बसा लगता है।फिर भी कहा दिल लगता है।कभी प्रकृति की

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hasdev jangal

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-एकता गुप्ता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

इस कविता में प्रकृति संरक्षण की बात कही गई है।

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