प्रकृति की पीड़ा – माला पहल
प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कवितामानव को प्रकृति की रक्षा के लिये सचेत करना
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मानव को प्रकृति की रक्षा के लिये सचेत करना
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यहाँ पर भारतेंदु हरिश्चंद्र की लोकप्रिय कवितायेँ के पढेंगे . आपको जो भी कविता अच्छी लगे कमेंट करके जरुर बताएं
भारतेंदु हरिश्चंद्र की लोकप्रिय कवितायेँ Read More »
यहाँ पर श्रीधर पाठक की 10 लोकप्रिय कवितायेँ दी जा रही हैं आपको कौन सी अच्छी लगी , कमेंट कर जरुर बताएं हिंद-महिमा / श्रीधर पाठक जय, जयति–जयति प्राचीन हिंदजय नगर, ग्राम अभिराम हिंदजय, जयति-जयति सुख-धाम हिंदजय, सरसिज-मधुकर निकट हिंदजय जयति हिमालय-शिखर-हिंदजय जयति विंध्य-कन्दरा हिंदजय मलयज-मेरु-मंदरा हिंदजय शैल-सुता सुरसरी हिंदजय यमुना-गोदावरी हिंदजय जयति सदा स्वाधीन
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चारु चंद्र की चंचल किरणें / मैथिलीशरण गुप्त चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में,स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,मानों झीम[1] रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥ पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना,जिसके सम्मुख स्वच्छ शिला
मैथिलीशरण गुप्त की 10 लोकप्रिय कवितायेँ Read More »
मौसम कभी कभी सुहावना होता है ।।
सुहाना मौसम पर कविता -रबीना विश्वकर्मा Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक प्रकृति है जो कि प्रकृति विषय वस्तु को आधार मानकर रची गई है। यह स्वरचित कविता है। दो कविताएं हैं। पहली में प्रकृति का महत्व बताया गया है और दूसरी में खुद प्रकृति बनकर प्रकृति से पूरी होने वाली जरूरत का अहसास दिलाने की कोशिश की गई है।
प्रकृति बड़ी महान/यदि मैं प्रकृति होती Read More »
प्रकृति की आह- वृक्ष, पर्वत धरा की पीड़ा और मानव को आगाह करने की चेष्टा ।
धरा की आह पर कविता Read More »
हरेली त्यौहार की महत्व का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।
हरेली त्यौहार पर हिंदी कवितायें Read More »
प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन किलकारियाँ, खिलखिलाहट, अठखेलियाँ हवा के संग ….हमे बहुत याद आता है।बादलो का गर्जना ,बिजलियों का कड़कना ,और इन्द्रधनुष के रंग….हमे भी डराता और हसाता है। तितलियों का उड़ना ,भौरो का गुनगुनाना ,ये सब …..तुम्हे भी तो भाता है।सब कुछ था,है ,पर…..रहेगा या नही ,ये नही पता…, बरसो से खड़े रहकर
प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन- विभा श्रीवास्तव Read More »
पर्यावरण संरक्षण के लिए पृथ्वी के उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग ही मानव जीवन के लिए उपयुक्त है।
प्रकृति का प्रचंड रूप Read More »