समाज और यथार्थ

जुगाड़ पर कविता – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

समाज और यथार्थ

इस रचना को व्यंग्य के रूप में पेश किया गया है | समाज में चल रहीं अनैतिक परम्पराओं पर कुठाराघात करने की एक कोशिश रचनाकार ने की है |
जुगाड़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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शुभकामना विषय पर दोहा -बाबू लाल शर्मा

समाज और यथार्थ

शुभकामना विषय पर दोहा -बाबू लाल शर्मा करूँ सदा शुभ कामना, उन्नत होवे देश।भूमण्डल सरनाम हो, उज्ज्वल हो परिवेश।। देश वासियों के लिये, नये साल संदेश।जनता को शुभकामना, खुशियाँ सभी प्रदेश।। सामाजिक परिवेश में, मानव मान समाज।सबके हित शुभकामना, नये साल की आज।। नारी को शुभकामना, मैं देता करजोर।शक्ति देश की ये बने, बढ़े उन्नति

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तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता नशा मत करना,नशा है मृत्य समान,तम्बाकू ने ली असमय मानव जान। शौक- शौक में तम्बाकू खाने लगा अनजान,शरीर खोखला करने लगा,मन मंदिर हुआ वीरान। धीरे धीरे सामने आए,तम्बाकू के दुष्परिणाम,डॉक्टर के पास जाना पड़ा,हुआ गलती का भान। फिर कसम खाई मैंने,छोड़ दिया नशे का साथ,तम्बाकू मुक्त हो गया,मेरा भारत महान।।

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ऐसा होता  है परिवार- शिवांशी यादव

समाज और यथार्थ

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। 1995 से यह सिलसिला जारी है। परिवार की महत्ता समझाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसा होता  है परिवार- शिवांशी यादव माँ-बाप का प्यार

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बड़ी अनमोल मोती है परिवार –

समाज और यथार्थ

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। 1995 से यह सिलसिला जारी है। परिवार की महत्ता समझाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बड़ी अनमोल मोती है परिवार बड़ी अनमोल मोती है

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मौका मिला है परिवार के साथ जुड़ने का – एकता गुप्ता

समाज और यथार्थ

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। 1995 से यह सिलसिला जारी है। परिवार की महत्ता समझाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मौका मिला है परिवार के साथ को जुड़ने का

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परिवार – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना के माध्यम से कवि परिवार की महिमा को व्यक्त कर रहा है |
परिवार – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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15 मई विश्व परिवार दिवस पर लेख

समाज और यथार्थ

15 मई विश्व परिवार दिवस पर लेख पढ़ने से पहले आप इस विषय पर अब तक कविता बहार में संग्रहित रचनाएँ पढ़िए :-

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जंगल की आग – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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इस रचना के माध्यम से कवि जंगल में आग से होने वाली जन हानि , पर्यावरण एवं पशु हानि की ओर संकेत दे रहा है |
जंगल की आग – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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नवीन कल्पना करो- गोपालसिंह नेपाली

समाज और यथार्थ

नवीन कल्पना करो तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो। तुम कल्पना करो। अब घिस गईं समाज की तमाम नीतियाँ,अब घिस गईं मनुष्य की अतीत रीतियाँ,हैं दे रहीं चुनौतियाँ तुम्हें कुरीतियाँ,निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए-तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो। तुम कल्पना करो जंजीर टूटती कभी न अश्रु-धार से,दुख-दर्द दूर भागते नहीं दुलार

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कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में कवि असमंजस की स्थिति में है | उसे विषय ही नहीं सूझ रहा जिस पर वह अपने विचारों को अपनी कलम के माध्यम से साकार कर सके |
कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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