स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम
प्रेम और रिश्ते, समाज और यथार्थ, हिंदी कवितास्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम प्रेमस्वाभाविक नहीं है।स्वाभाविक हैजंगल—सीमा खींचना,कब्ज़ा करना,हार्मोन का शोर। यहीजंगल-प्रेम है—जो सहज आता है,औरआसानी सेहिंसक हो जाता है। सच्चा प्रेमवहाँ शुरू होता हैजहाँजंगल पार किया जाए,जहाँसमाज की सिखाई हुईपरिभाषाएँभुला दी जाएँ। जितना स्पष्टतुमअपनी कंडीशनिंग देखते हो,उतना ही कमदूसरों सेचौंकते हो। हमव्यक्ति नहीं हैं,हमस्क्रिप्ट हैं—प्रशिक्षित,प्रोग्राम किए हुए,पूर्वानुमेय। परक्योंकिहम अपनी हीस्क्रिप्ट नहीं देखते,इसलिएजीवनहमें
स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम Read More »







