समाज और यथार्थ

शिक्षक का कमाल / अकिल खान

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शिक्षक का कमाल मुर्ख को ज्ञानी बनाकर दिखाया है,जिसने, अशिक्षा रूपी दानव को मिटाया है,उसने। शिक्षा के दीपक से रौशन हुआ सर्व-समाज, उचित-अनुचित की समझ का हुआ आगाज। जो शिक्षा पे हो कुर्बान वही है,सच्चा लाल, ज़माना याद करता रहेगा,शिक्षक का कमाल। इंजीनियर,डॉक्टर,खिलाड़ी नेता और अभिनेता,संसार में नाम कमाया,लेकिन गुरु बना प्रणेता। असंभव को संभव […]

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घर-घर में गणराज – परमानंद निषाद

समाज और यथार्थ

“घर-घर में गणराज” परमानंद निषाद द्वारा रचित एक कविता है जो गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की महिमा और उनकी पूजा के महत्व को दर्शाती है। यह कविता गणेश उत्सव की खुशी, भक्ति, और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रकट करती है। *घर-घर में गणराज (दोहा छंद)* आए दर पे आपके, कृपा करो गणराज।हे लम्बोदर

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महाभारत अर्जुन और कृष्ण

महाभारत पर दोहा : 10 पात्रों की व्याख्या

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यदि “महाभारत” को पढ़ने का समय न हो , तो भी इसके दस सार-सूत्र महाभारत के पात्रों पर दोहा हमारे जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं.

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वर्ल्ड जूनोसिस डे पर नारे

समाज और यथार्थ

वर्ल्ड जूनोसिस डे हर साल 6 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य जूनोटिक रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोग) के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन लुई पाश्चर द्वारा पहली सफल रेबीज वैक्सीन का परीक्षण करने की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। जूनोसिस रोगों को रोकने के लिए अच्छे स्वच्छता उपाय, पशुओं का टीकाकरण और उचित पशु चिकित्सा देखभाल महत्वपूर्ण हैं।

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जीवन का पाठ है योग / अरुणा डोगरा शर्मा

समाज और यथार्थ,

अरुणा डोगरा शर्मा की “यह”जीवन का पाठ है योग” कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के सामूहिक अभ्यास के महत्व को रेखांकित करना और पाठकों को इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जीवन का पाठ है योग /अरुणा डोगरा शर्मा भौतिक सुखों को

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yogasan

आओ मिल कर योग करें हम / शिवांगी मिश्रा

समाज और यथार्थ,

शिवांगी मिश्रा की कविता “आओ मिल कर योग करें हम” योग के सामूहिक और सामाजिक महत्व को उजागर करती है। इस कविता में कवयित्री ने योग को न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शांति का साधन बताया है, बल्कि इसे एक सामूहिक गतिविधि के रूप में भी प्रस्तुत किया है जो समुदाय और समाज में एकता

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योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई

समाज और यथार्थ,

डा० भारती वर्मा बौड़ाई की यह कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के लाभों को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इसे आसानी से समझ सकें और अपने जीवन में शामिल कर सकें। योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई योग

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नव दीप

नव दीप / जानसी पटेल

समाज और यथार्थ

यहाँ पर “नव दीप जले हर मन में” शीर्षक से जानसी पटेल की एक कविता प्रस्तुत की जा रही है: नव दीप / जानसी पटेल रचयिता: जानसी पटेल नव दीप जले हर मन में,नव ज्योति बहे हर जीवन में। अंधकार हटे हर कोने से,प्रकाश फैले इस सृष्टि में। सपने संजोए आँखों में,संकल्प हो सजीव मन

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नव दीप

नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट

समाज और यथार्थ

इस कविता में भुवन बिष्ट ने आशा, प्रेम, और भाईचारे का संदेश दिया है। हर व्यक्ति के मन में नई उम्मीदों और सकारात्मकता के दीप जलाने का आह्वान किया है, जिससे समाज में शांति, प्रेम, और सद्भावना का वातावरण बने। नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट नव दीप जले हर मन में,          अब

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kavi aur kavita

कवि और कविता/ पुष्पा शर्मा”कुसुम”

समाज और यथार्थ

कवि: कवि वह व्यक्ति होता है जो शब्दों के माध्यम से भावनाओं, विचारों, और अनुभवों को व्यक्त करता है। कवि अपनी रचनाओं में कल्पना, संवेदना, और आत्मा का मिश्रण करते हुए पाठकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है। कवि का कार्य केवल शब्दों का संग्रह करना नहीं होता, बल्कि वह अपनी रचनाओं के माध्यम

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जवाहरलाल नेहरू

जन-जन करोड़ों की मधुर मुसकान चाचा नेहरू /सुनील श्रीवास्तव ‘श्री’

समाज और यथार्थ,

भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चे प्यार से ‘चाचा नेहरू’ भी कहते हैं। जवाहरलाल नेहरू का मानना ​​था कि बच्चे किसी भी समाज की मूल नींव होते हैं, इसलिए उनका पालन-पोषण उपयुक्त वातावरण में किया जाना चाहिए और पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 14 नवंबर को बाल

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