समाज और यथार्थ

बाल श्रम निषेध दिवस

बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ

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बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ: बाल-श्रम का मतलब यह है कि जिसमे कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है।

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बाल श्रम निषेध दिवस

बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक)

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हर साल 12 जून को विश्व दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने और उनकी मदद के लिए किया जा सकता है, इसके लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को एक साथ लाता है। बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक) राज, समाज, परायों अपनों, के

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परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह "दिनकर"

परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह “दिनकर”

समाज और यथार्थ

परशुराम की प्रतीक्षा ChatGPT said: ChatGPT “परशुराम की प्रतीक्षा” कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें कवि ने समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए परशुराम के अवतरण की प्रतीक्षा का वर्णन किया है। इस कविता में परशुराम का प्रतीक उन सभी शोषित और पीड़ित लोगों की आशाओं

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1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day

मजदूर की दशा पर कविता

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मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन 1 मई है। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो

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mother their kids

माँ पर कविता हिंदी में

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यहाँ माँ पर कविता हिंदी में लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ मुझको गर्भ में ले ले हे ! माँ मुझको गर्भ में ले ले,बाहर मुझको डर लागे।देह-लुटेरे ,

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dr bhimrao ambedkar

महान जननायक / अकिल खान.

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महान जननायक / अकिल खान 14 अप्रैल सन1891में जन्म लिए,जननायक.नाम था भीमराव,कर्म से कह लाए महानायक।बचपन में,विद्यालय के बाहर अर्जित किए ज्ञान, मजलूमो का जब विलुप्त हो चुका था,पहचान। बालपन से मन में यह महान कार्य,ठान लिए,समाज सुधार कार्य को,अपने संज्ञान में लिए। न पूछो कैसे थे दिन? कैसी थी उनकी कहानी, भेदभाव के चलते,मुश्किल

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JALATI DHARATI

जलती धरती/नीरज अग्रवाल

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जलती धरती/नीरज अग्रवाल पर्यावरण और वन उपवन हैं।जल थल जंगल हमारे जीवन हैं।जलती धरती बढ़ता तापमान हैं।मानव जीवन में आज  संकट  हैं।हम सभी को सहयोग जो करना हैं।जलती धरती तपता सूरज कहता हैं।वसुंधरा को हरा भरा हमको करना हैं।मानव जीवन में कुदरत के रंग भरने हैंं।आज  हम सभी को प्राकृतिक बनना हैं।न सोचो कल का

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JALATI DHARATI

जलती धरती/नीरज अग्रवाल

समाज और यथार्थ

जलती धरती/नीरज अग्रवाल सच तो यही जिंदगी कुदरत हैं।जलती धरती आकाश गगन हैं।हम सभी की सोच समझ हैं।हां जलती धरती  सूरज संग हैं।खेल हमारे मन भावों में रहते हैं।जलती धरतीं मानव जीवन हैं।हमारे मन भावों में प्रकृति बसी हैं।सच और सोच हमारी अपनी हैं।हम सभी जलती धरती के संग हैं।आज कल बरसों से हम जीते

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गंगा की पुकार

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गंगा की पुकार गंगा घलो रोवत हे,देख पापी अत्याचार।रिस्तेदारी नइये ठिकाना,बढ़गे ब्यभीचार।। कलयुग ऊपर दोष मढत हे,खुद करम में नहीं ठिकाना।कइसे करही का करही एमनओ नरक बर करही रवाना।। स्वार्थ के डगर अब भारी होगेअनर्थ होत हे प्यार।प्यार अंदर अब नफरत हवयबढे हवय अत्याचार।। प्यार नाम अब धोखा हवे सुन लौ जी संत समाज।हृदय काकरो

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शिक्षक का आशीर्वाद

समाज और यथार्थ

शिक्षक का आशीर्वाद अमूर्त को मूर्त रूप देकर,जग को दिखलाया है,शिक्षक,समाज में ज्ञान का महत्व को बताया है।शिक्षक,शिक्षा से अज्ञानी को ज्ञानी है बनायाशिक्षक,संसार मे सभी लोगों को है अपनाया।बेशक,गुरू – कृपा से शिष्य हुए हैं आबाद,जीवन में अनमोल है,शिक्षक का आशीर्वाद। असहायों का ज्ञान से रोशन होता है जमीर,ज्ञान अर्जित सभी करते हैं,गरीब हो

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दृश्य के उस पार / रमेश कुमार सोनी

समाज और यथार्थ

दृश्य के उस पार / रमेश कुमार सोनी उस एक दृश्य में उसकीआँख में मैंने गंभीर ख़ौफ़ देखाजिसे उन्होंने ही पाल-पोष कर बड़ा किया थाखून से इतनी मोहब्बत कीहुजूम चलती है उनके साथ लार टपकातेअहंकार से चूर इन्हें किसी से कोई मतलब नहीं। दूसरे दृश्य में करुणा है, लाचारी है किउसका कोई और मालिक हैमाली

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