समाज और यथार्थ

Vegetable Vegan Fruit

शाकाहार सर्वोत्तम आहार / गीता सागर

समाज और यथार्थ

शाकाहार सर्वोत्तम आहार–दोहा भोजन शाकाहार को, खाते हैं जो लोग। जीते लंबी उम्र तक, पाते बदन निरोग ।। शाकाहारी जो बने, रहे सदा संतोष। स्वच्छ रहे तन मन सदा, शीघ्र न आये रोष।। शाकाहारी अन्न के , मिलते लाभ अनेक ।जीवन होता सादगी, हो विस्तार विवेक।। सादा भोजन उच्च है, कहते संत सुजान। महापाप है […]

शाकाहार सर्वोत्तम आहार / गीता सागर Read More »

बेचकर देखों मुझे जरा

समाज और यथार्थ

बेचकर देखों मुझे जरा पूछने से पहले जवाब बना लिये।यार  सवाल तो गजब़ बना लिये। किसी ने पूछा ही नहीं मैं जिंदा हूँ,मगर तुम हसीन ख्वाब बना लिये। और और,और कहते रहे गम को,लो आशुओं का हिसाब बना लिये। मेरी मिलकियत न रहीं वजूद मेरा,समाज से कहों कसाब बना लिये। सौ-सौ सवाल गोजे पे रसीद

बेचकर देखों मुझे जरा Read More »

बसंत  की  बहार में

समाज और यथार्थ

बसंत  की  बहार में बसंत दूत कोकिला, विनीत मिष्ठ बोलती।बखान रीत गीत से, बसंत गात  डोलती। बसंत  की  बहार में, उमा महेश साथ  में।बजाय कान्ह बाँसुरी,विशेष चाल हाथ में। दिनेश  छाँव  ढूँढते , सुरेश  स्वर्ग  वासते।सुरंग  पेड़  धारते, प्रसून  काम    सालते। कली खिले बने प्रसून, भृंग संग  सोम से।खिले विशेष  चंद्रिका  मही रात व्योम से।

बसंत  की  बहार में Read More »

हकीकत तब पता चलता है

समाज और यथार्थ

हकीकत तब पता चलता है हकीकत तब पता चलता है                  कौन अपना है ,कौन पराया है ,                                 ये तो वक़्त बताता है ।हकीकत तब पता चलता है जीवन में,                    जब बुरा वक़्त आता है ।।01।।न कोई दोस्त है यहां,                                 ना कोई यार है ।यह दुनियाँ भी यारों ,                       मतलब का संसार है ।।02।।बुरे वक़्त में

हकीकत तब पता चलता है Read More »

निःशब्द तो नहीं

समाज और यथार्थ

निःशब्द तो नहीं [१]निःशब्द तो नहीं !किंचित् भी नहीं !!बस…नहीं हैं आजशहद या गुलाबी इत्र मेंडुबोयेसुंदर-सुकोमल-सुगंधित शब्दनहीं हैं आजकर्णप्रिय,रसीले,बांसुरी के तानों संगगुनगुनाते अल्फाज़…सब जल गये !भस्म हो गयेसारे के सारेअंतरिक्ष में विचरतेछंदटूट-फूटकरबिखर गये सारे अलंकारनिस्सार हो गयींसारी व्यंजनाएँलक्षणा भी हो गयीं सारीमहत्त्वहीन..अबबचे हैं तो केवलउबड़-खाबड़कंटकाकीर्णक्षिति पर पांव जमाते……कुछ शब्दजो टटोलते हैंपैरों से अपना ज़मीनपैरों के

निःशब्द तो नहीं Read More »

इन्तजार पर कविता

समाज और यथार्थ

इन्तजार पर कविता विसंगति छाई संसृति मेंकरदे समता का संचार।मुझे ,उन सबका इन्तजार…। जीवन की माँ ही है, रक्षकफिर कैसे बन जाती भक्षक ?फिर हत्या, हो कन्या भ्रूण की या कन्या नवजात की ।रक्षा करने अपनी संतान कीजो भरे माँ दुर्गा सा हुँकारमुझे, उस माँ का इन्तजार….। गली गली और मोड़ मोड़ परहोता शोषण छोर

इन्तजार पर कविता Read More »

हार कर जीतना – पूनम दुबे

समाज और यथार्थ

हार कर जीतना – पूनम दुबे सही तो है हार कर भी,मैं जीत रही हूं,तुम्हारे लिए कभी बच्चों,के लिए कभी परिवार ,के लिए मैं हार कर भी जीत ,रही हूं,क्या हुआ अगर मेरे आत्मसम्मान परचोट लगती,है मेरे आंसुओं से क्या फर्क,पड़ता है ,बात तो ठहरजाती है ना, सबकी बातरह तो जाती है ना, मैं भी

हार कर जीतना – पूनम दुबे Read More »

धर्म एक धंधा है

समाज और यथार्थ

धर्म एक धंधा है  गंगाधर मनबोध गांगुली “सुलेख “        समाज सुधारक ” युवा कवि “ क्या धर्म है ,क्या अधर्म है ? आज अधर्म को ही धर्म समझ बैठें हैं । धर्म से ही वर्ण व्यवस्था ,                             समाज में आया है ।धर्म ही इंसान को ,               इंसान का दुश्मन बनाया है ।।01।। वर्ण व्यवस्था बाद

धर्म एक धंधा है Read More »

भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य

समाज और यथार्थ

भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य हमें सोचना तो पड़ेगा।परिवार की परंपरासमाज की संस्कृतिमान्यताओं का दर्शनव्यवहारिक कुशलताआदर्शों की स्थापना।निरुद्देश्य तो नहीं!महती भूमिका है इनकीसुन्दर,संतुलित और सफल जीवन जीने में। जो बढता निरंतरप्रगति की ओरदेता स्वस्थ शरीर ,सफल जीवन और सर्वहितकारी चिन्तन।हम रूढियों के संवाहक न बने।कुरीतियों की हामी भी क्यों भरें। बचें छिछले ,गँदले गड्ढों के

भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य Read More »

patang subh makar sankranti

मकर संक्रान्ति पर सुमित्रानंदन पंत की कविता

समाज और यथार्थ

14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर (जाता हुआ) होता है। इसी कारण इस पर्व को ‘उतरायण’ (सूर्य उत्तर की ओर) भी कहते है। और इसी दिन मकर संक्रान्ति पर्व मनाया जाता है. जो की भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है।  सुमित्रानंदन पंत जन पर्व मकर संक्रांति आजउमड़ा नहान को

मकर संक्रान्ति पर सुमित्रानंदन पंत की कविता Read More »

गोपालकृष्ण गोखले पुण्यतिथि पर कविता

समाज और यथार्थ

इसे सुनेंगोपाल कृष्ण गोखले (9 मई 1866 – 19 फरवरी 1915) भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे। महादेव गोविन्द रानडे के शिष्य गोपाल कृष्ण गोखले को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का ‘ग्लेडस्टोन’ कहा जाता है। गोपालकृष्ण गोखले पुण्यतिथि पर

गोपालकृष्ण गोखले पुण्यतिथि पर कविता Read More »

14 अप्रैल डॉ.भीमराव अम्बेडकर जयन्ती पर कविता

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1951), वे डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय थे उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चला 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयन्ती पर कविता बाबा तुमको कोटि नमन सबको जीवन दान दिया है, बाबा तुमको कोटि

14 अप्रैल डॉ.भीमराव अम्बेडकर जयन्ती पर कविता Read More »

Scroll to Top