मित्रता पर कविता

मित्रता पर कविता

मित्रो के विवाद में संवाद करना चाहिए।
मित्रो की मित्रता में अमृत रस बना चाहिए।


मित्र ज्ञानी हो ना हो, सचा होना चाहिए।
मित्रो में कपट ना हो, प्रेम होना चाहिए।


समस्या में मित्रो का आसरा लेना चाहिए।
भूख में मित्र भोजन बनना चाहिए।


बुद्धि हो ना हो मित्र में परन्तु छल नहीं होना चाहिए।
कृष्ण, सुदामा जैसा मित्र हर व्यक्ति को मिलना चाहिए।


शत्रु भी देख कर डर जाए ऐसी मित्रता होनी चाहिए।
मित्रो के प्रलोभन को हल करना चाहिए।


दूर से ही मित्रता की भनक लग जाए,

ऐसी मित्रता करनी चाहिए।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.