निंदा पर सोरठा
चुगली औषधि होत, करती मरहम काम जो।
परनिंदा दुख स्रोत , स्वनिंदा बैकुंठ सम।।
✒️ मनीभाई ‘नवरत्न’
कविता बहार
📖 हाल ही की रचनाएँ
- 📝 रिश्तों का गुलाल – प्रेम और विश्वास की हिंदी कविता 08 Mar 2026
- 📝 मन का अबीर: समकालीन विद्रूप पर एक हिंदी कविता 08 Mar 2026
- 📝 रंगों की क्रांति: जागती चेतना की हिंदी कविता 08 Mar 2026
- 📝 आधी दुनिया की आवाज़: हिंदी कविता का ओजपूर्ण घोष 02 Mar 2026
- 📝 स्त्री का स्वाभिमान: हिंदी कविता जो जगा दे चेतना 02 Mar 2026
🔗 इस कविता को साझा करें
✅ लिंक कॉपी हो गया!
Post Views: 106
