अच्छी आध्यात्मिकता ही अच्छी अर्थव्यवस्था है
हिंदी कविता“अच्छी आध्यात्मिकता ही अच्छी अर्थव्यवस्था है” किसी वस्तु की क़ीमतउसके दाम से नहीं,उस असर से तय होती हैजो वहमन पर छोड़ती है। हम बाहर की चीज़ों सेभीतर की तृप्तिखोजते हैं। पर जबआत्म-बोध नहीं होता,तोमूल्य और मूल्यांकनअलग हो जाते हैं। यहीं सेव्यक्तिगत दुखऔरसामूहिक बर्बादीशुरू होती है। अर्थव्यवस्थाआख़िर है किसके लिए?मनुष्य के लिए। और मनुष्य का कल्याणक्या
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