कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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गणतंत्र गाथा / बाबू लाल शर्मा ” बौहरा ”

हिंदी कविता

गणतंत्र गाथा / बाबू लाल शर्मा ” बौहरा ” पुरा कहानी,याद सभी को, मेरे देश जहाँन की।कहें सुने गणतंत्र सु गाथा, अपने देश महान की। सन सत्तावन की गाथाएँ,आजादी हित वीर नमन।रानी झाँसी नाना साहब, ताँत्या से रणधीर नमन। तब से आजादी तक देखो,युद्व रहा ये जारी था।वीर हमारे नित मरते थे, दर्द गुलामी भारी […]

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हिन्द देश के वीर/बलबीर सिंह वर्मा “वागीश”

हिंदी कविता

हिन्द देश के वीर/बलबीर सिंह वर्मा “वागीश” आजादी का पर्व ये, हर्षित सारा देश।छाई खुशियाँ हर तरफ, खिला-खिला परिवेश।।खिला – खिला परिवेश, गीत हर्षित हो गाए।मना रहे गणतंत्र, तिरंगा नभ लहराए।।थे सब वीर महान, जिन्होंने जान लगा दी।आया दिन ये खास, मिली हमको आजादी।। भारतवासी एक सब, एक हमारा धर्म।जाति-पाति सब भूलकर, देशभक्ति है कर्म।।देशभक्ति

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आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ /डॉ.अमित कुमार दवे

समाज और यथार्थ

आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ /डॉ.अमित कुमार दवे आओ जन-गण-मन को ऊपर उठाएँ,नित नवीन विचारों की शृंखला बनाएँ।हर चेहरे को फिर… वैसा ही महकाएँ,आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।1।। त्याग-संयम-सहयोग सदा हो सहचरऐसी संस्कारित आदर्श पीढ़ी बनाएँ।सदा सामर्थ्य जो निज कांधों में बसाएँआओ! मिलकर गणराज भारत बनाएँ।।2।। प्राचीन राष्ट्रगौरव फिर अर्वाचीन करवाएँ,जीवन्त संस्कृति अब जग में

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आजा अब परदेशिया

हिंदी कविता

आजा अब परदेशिया आजा अब परदेशिया , तरस रहे हैं नैन ।बाट जोहती हूँ खड़ी , पल भर खोजूँ चैन ।।पल भर खोजूँ चैन , लगे जग सारा सूना ।सावन भादो मास , अश्रु अब बढ़ते दूना ।।कह ननकी कवि तुच्छ , झलक अपना दिखला जा ।मिलन करो मनमीत , शीघ्रता से घर आजा ।।

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चित्र मित्र इत्र चरित्र

हिंदी कविता

चित्र मित्र इत्र चरित्र चित्र रचित कपि देखकर, डरती जो सुकुमारि।नव चरित्र वनवास में, रहती जनक दुलारि।। मित्र मिले यदि कर्ण सा, सखा कृष्ण सा साथ।विजित सकल संसार भव, वह चरित्र दे नाथ।। गन्धी चतुर सुजान नर, बेच रहे नित इत्र।सूँघ परख कर ले रहे, ग्राहक बुद्धि चरित्र।। मित्र इत्र सम मानिये, यश सुगंध प्रतिमान।भव

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विवाह-एक पवित्र बंधन

नारी जीवन और संवेदना

विवाह-एक पवित्र बंधन विवाह एक संस्कृति व संस्कार है।विवाह बंधनों का मधुर व्यवहार है।दो पवित्र आत्माओं का होता मिलन।लुटाएँ एक दूजे पर असीम प्यार है।1।सात जन्मों का है ये प्यारा बंधन।वंश बेला बढ़ाने का नाम है जीवन।केवल बंधन नहीं विवाह स्त्री पुरुष का।दो पवित्र आत्माओं का है मधुर मिलन।2।सुख दुख बाँटने का रास्ता है विवाह।जीवन

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घर का संस्कार है बेटी

हिंदी कविता

घर का संस्कार है बेटी घर आँगन की शान,अभिमान है होती।माँ बाप की जान पहचान होती है बेटी।अक्सर शादी के बाद पराए हो जाते हैं बेटे।दो कुलों की मान-सम्मान होती है बेटी।1।माँ के रूप में ममता की मूरत है बेटी।पत्नी के रूप में फर्ज की सूरत है बेटी।पीहर व ससुराल के बीच सामंजस्य बिठाये।दया,त्याग,प्रेम की

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मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ / गोपालदास “नीरज” मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ तुम शहज़ादी रूप नगर कीहो भी गया प्यार हम में तो बोलो मिलन कहाँ पर होगा ? मीलों जहाँ न पता खुशी कामैं उस आँगन का इकलौता,तुम उस घर की कली जहाँ नितहोंठ करें गीतों का न्योता,मेरी उमर अमावस काली और तुम्हारी पूनम

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हार न अपनी मानूँगा मैं ! / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

हार न अपनी मानूँगा मैं ! / गोपालदास “नीरज” हार न अपनी मानूँगा मैं ! चाहे पथ में शूल बिछाओचाहे ज्वालामुखी बसाओ,किन्तु मुझे जब जाना ही है —तलवारों की धारों पर भी, हँस कर पैर बढ़ा लूँगा मैं ! मन में मरू-सी प्यास जगाओ,रस की बूँद नहीं बरसाओ,किन्तु मुझे जब जीना ही है —मसल-मसल कर उर के

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खिलते हैं गुल यहाँ / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

खिलते हैं गुल यहाँ / गोपालदास “नीरज” खिलते हैं गुल यहाँ, खिलके बिखरने कोमिलते हैं दिल यहाँ, मिलके बिछड़ने कोखिलते हैं गुल यहाँ… कल रहे ना रहे, मौसम ये प्यार काकल रुके न रुके, डोला बहार काचार पल मिले जो आज, प्यार में गुज़ार देखिलते हैं गुल यहाँ… झीलों के होंठों पर, मेघों का राग

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दिल आज शायर है / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

दिल आज शायर है / गोपालदास “नीरज” दिल आज शायर है, ग़म आज नग़मा हैशब ये ग़ज़ल है सनमगैरों के शेरों को ओ सुनने वालेहो इस तरफ़ भी करम आके ज़रा देख तो तेरी खातिरहम किस तरह से जियेआँसू के धागे से सीते रहे हमजो ज़ख्म तूने दियेचाहत की महफ़िल में ग़म तेरा लेकरक़िस्मत से

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लिखे जो खत तुझे / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

लिखे जो खत तुझे / गोपालदास “नीरज” लिखे जो ख़त तुझेवो तेरी याद मेंहज़ारों रंग केनज़ारे बन गए सवेरा जब हुआतो फूल बन गएजो रात आई तोसितारे बन गए कोई नगमा कहीं गूँजा, कहा दिल ने के तू आईकहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाईकोई ख़ुशबू कहीं बिख़री, लगा ये ज़ुल्फ़ लहराई फ़िज़ा

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